मंगलवार, अक्टूबर 13, 2026

बिहार में एनएच 22 चार लेन परियोजना को मंजूरी, नेपाल सीमा तक बढ़ेगा संपर्क

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एनएच 22 चार लेन

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड को चार लेन का बनाने के लिए 3,590.73 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

मुख्य बातें

  • पीआईबी के अनुसार, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने अगस्त 2026 में 3,590.73 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-22 के 82.57 किमी खंड को चार लेन बनाने की स्वीकृति दी।
  • यह परियोजना मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सोनबरसा को जोड़ती है तथा भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार और आवागमन को सुगम बनाएगी।
  • इस राजमार्ग की डिज़ाइन गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा है और औसत परिचालन गति 80 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है।
  • परियोजना में बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा पुल, तीन रेलवे ओवरब्रिज और दो फ्लाईओवर शामिल हैं।

बिहार में बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग के एक अहम हिस्से को आधुनिक बनाने का निर्णय लिया है। पीआईबी (प्रेस सूचना ब्यूरो) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने अगस्त 2026 में एनएच 22 चार लेन परियोजना को औपचारिक मंजूरी प्रदान की है। इस योजना के तहत मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी और सोनबरसा तक के 82.57 किलोमीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना पर कुल 3,590.73 करोड़ रुपये की पूंजी लागत आएगी, जिसे हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल के अंतर्गत क्रियान्वित किया जा रहा है। उत्तरी बिहार के इस प्रमुख मार्ग के उन्नत होने से स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और नेपाल आने-जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

एनएच 22 चार लेन परियोजना क्या है और इससे किसे लाभ होगा?

एनएच 22 चार लेन परियोजना बिहार के मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सोनबरसा खंड को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ेगी। इस खंड के चार लेन बनने से यात्रियों और माल की आवाजाही अधिक सुगम होगी, जिससे उत्तरी बिहार के लिए एक एकीकृत परिवहन ढांचा तैयार होगा। यह नया गलियारा मुजफ्फरपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर से जुड़ता है और सोनबरसा की ओर नेपाल सीमा तक पहुंच आसान बनाता है।

भारत-नेपाल सीमा और व्यापारिक केंद्रों तक बेहतर पहुंच

यह उन्नत मार्ग भारत-नेपाल सीमा पर स्थित भित्थामोर लैंड पोर्ट के समीप से गुजरता है, जिससे सीमा पार यात्री और माल ढुलाई अधिक कुशल हो जाती है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत इस सड़क का निर्माण किया जा रहा है, ताकि औद्योगिक केंद्रों और कृषि क्षेत्रों को बेहतर बाजार मिल सकें। इस कॉरिडोर के दायरे में चार औद्योगिक क्षेत्र और एक मेगा फूड पार्क आते हैं, जो विनिर्माण और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को सीधा समर्थन देंगे। मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों तक सुगम पहुंच होने से मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा मिलेगा।

सुरक्षित यात्रा और आधुनिक इंजीनियरिंग विशेषताएं

मौजूदा समय में यह मार्ग मुजफ्फरपुर, मुक्सुदपुर, रुन्नी सैदपुर, थुम्मा, दुमरा, भूताही और सोनबरसा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरता है, जहां अक्सर ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। सड़क चौड़ी होने से इन सभी इलाकों में भीड़भाड़ कम होगी और हादसों का जोखिम घटेगा।

  • राजमार्ग को 100 किमी प्रति घंटे की अधिकतम डिज़ाइन गति और 80 किमी प्रति घंटे की औसत परिचालन गति के साथ तैयार किया जा रहा है।
  • बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा एक नया बारहमासी पुल बनाया जाएगा।
  • यातायात के दबाव को नियंत्रित करने के लिए तीन रेलवे ओवरब्रिज और दो फ्लाईओवर का निर्माण शामिल है।
  • बिना एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग के लंबी दूरी की यात्राएं अधिक सुरक्षित और अनुमानित बन सकेंगी।

कृषि और पर्यटन क्षेत्रों को नई गति

उत्तरी बिहार एक प्रमुख कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां धान, मक्का और अन्य फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। बेहतर सड़क संपर्क स्थापित होने से किसानों को अपनी उपज को नजदीकी मंडियों और प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचाने में आसानी होगी। परिवहन लागत घटने और ईंधन की बचत होने से आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत होगी। इसके अलावा, इस उन्नत मार्ग के बनने से बाबा गरीबनाथ मंदिर, माता जानकी मंदिर, पुनाउरा धाम और बौद्ध सर्किट जैसे प्रसिद्ध धार्मिक तथा सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंचना पर्यटकों के लिए काफी आसान हो जाएगा।

एनएच 22 चार लेन परियोजना से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलू

यह परियोजना केवल एक सड़क का चौड़ीकरण नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास की आधारशिला है। गंगा नदी के किनारे बरौनी के औद्योगिक केंद्रों और अंतर्देशीय जलमार्गों से जुड़ाव बेहतर होने से व्यापारिक अवसरों में वृद्धि होगी। आकांक्षी जिलों के रूप में पहचाने जाने वाले इन क्षेत्रों में आवागमन सुगम होने से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। सरकार और संबंधित विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना को पूरा करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? एनएच 22 चार लेन परियोजना की कुल लंबाई कितनी है? उत्तर। इस परियोजना के तहत मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड के कुल 82.57 किलोमीटर हिस्से को चार लेन का बनाया जाएगा।

प्रश्न? इस परियोजना पर कुल कितना खर्च आएगा? उत्तर। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा इस सड़क परियोजना के लिए 3,590.73 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत स्वीकृत की गई है।

प्रश्न? यह परियोजना किन प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में मदद करेगी? उत्तर। इसके जरिए बाबा गरीबनाथ मंदिर, माता जानकी मंदिर, पुनाउरा धाम और बौद्ध सर्किट जैसे महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंचना आसान होगा।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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