शुक्रवार, अक्टूबर 23, 2026

मौलिक कर्तव्य कौन से हैं और संविधान में उनका क्या स्थान है?

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मौलिक कर्तव्य

भारतीय संविधान में नागरिकों के लिए कुल 11 मौलिक कर्तव्य तय किए गए हैं, जिनका पालन देश के हर नागरिक से अपेक्षित है।

मुख्य बातें

  • मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग 4ए के अनुच्छेद 51ए में शामिल हैं।
  • इन्हें 1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिए जोड़ा गया था।
  • मूल रूप से इनकी संख्या 10 थी, जो अब बढ़कर 11 हो गई है।
  • ये कर्तव्य गैर-न्यायसंगत यानी गैर-वादयोग्य (non-justiciable) हैं।

संविधान के प्रति निष्ठा रखना और देश की एकता को बनाए रखना ही हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य है। भारतीय संविधान में नागरिकों के अधिकारों के साथ-साथ उनके कुछ उत्तरदायित्व भी तय किए गए हैं, जिन्हें नीति निर्माताओं ने राष्ट्रहित में बहुत ज़रूरी माना।

मौलिक कर्तव्य क्या है?

मौलिक कर्तव्य भारतीय संविधान के भाग IVA के अंतर्गत अनुच्छेद 51A में दिए गए नैतिक और नागरिक नियम हैं। ये नियम नागरिकों को यह याद दिलाते हैं कि देश के प्रति उनके कुछ बुनियादी फर्ज भी हैं। इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर साल 1976 में 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया था।

मौलिक कर्तव्य कौन से हैं? संविधान की पूरी सूची

संविधान में कुल 11 मौलिक कर्तव्य सूचीबद्ध किए गए हैं। आइए जानते हैं कि ये सभी मौलिक कर्तव्य कौन से हैं:

  • संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना।
  • स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोना और उनका पालन करना।
  • भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना और उसे बनाए रखना।
  • देश की रक्षा करना और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करना।
  • भारत के सभी लोगों में समरसता और भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करना जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग आधारित सभी भेदभाव से परे हो।
  • हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझना और उसका परीक्षण करना।
  • प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करना और उसका संवर्द्धन करना तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखना।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जक तथा सुधार की भावना का विकास करना।
  • सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना और हिंसा से दूर रहना।
  • व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करना, जिससे राष्ट्र निरंतर उच्च स्तर की उपलब्धि को छू सके।
  • छह से चौदह वर्ष की आयु के अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना (इसे 86वें संशोधन 2002 द्वारा जोड़ा गया)।

मौलिक कर्तव्यों का इतिहास और पृष्ठभूमि

मूल संविधान जब लागू हुआ था, तब उसमें नागरिकों के लिए कोई कर्तव्य नहीं थे, केवल अधिकार थे। आपातकाल के दौरान स्वर्ण सिंह समिति ने नागरिकों के कर्तव्यों को शामिल करने की सिफारिश की। इसके बाद संसद ने 42वां संशोधन अधिनियम पारित किया। शुरुआत में इनकी संख्या 10 तय की गई थी। बाद में साल 2002 में 86वें संशोधन के जरिए बच्चों की शिक्षा से जुड़ा 11वां कर्तव्य इसमें जोड़ा गया।

क्या मौलिक कर्तव्य कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं?

ये कर्तव्य गैर-न्यायसंगत (non-justiciable) प्रकृति के हैं। इसका मतलब है कि यदि कोई नागरिक इनका पालन नहीं करता है, तो सीधे तौर पर अदालत द्वारा उसे सजा नहीं दी जा सकती। हालांकि, संसद के पास यह अधिकार है कि वह किसी विशेष कर्तव्य के उल्लंघन पर कानून बनाकर दंड का प्रावधान कर सकती है, जैसे राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण अधिनियम।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? मौलिक कर्तव्य किस देश के संविधान से लिए गए हैं?

उत्तर। भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्यों को तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित होकर जोड़ा गया था।

प्रश्न? क्या मौलिक कर्तव्यों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है?

उत्तर। नहीं, ये गैर-वादयोग्य हैं और इनके उल्लंघन पर सीधे न्यायालय में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जब तक कि इसके लिए कोई अलग से कानून न बना हो।

प्रश्न? 11वां मौलिक कर्तव्य कब जोड़ा गया?

उत्तर। 11वां मौलिक कर्तव्य वर्ष 2002 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत जोड़ा गया था।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। कानूनी या संवैधानिक मामलों से जुड़े किसी भी विशिष्ट निर्णय के लिए आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों और भारत के संविधान की मूल प्रति का अध्ययन करें।

आधिकारिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए: https://www.india.gov.in/my-government/constitution-india

यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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