
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 22 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के करनाल से 40 दिवसीय ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ करेंगे।
मुख्य बातें
- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 22 अक्टूबर को करनाल (हरियाणा) के तरावड़ी से ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ करेंगे।
- 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चलने वाला यह अभियान 40 दिनों तक देश के ग्रामीण इलाकों में संचालित होगा।
- कृषि विज्ञान केंद्रों और आत्मा (ATMA) की 4,150 से अधिक टीमें लगभग 1 करोड़ किसानों तक पहुंचेंगी।
- 12,000 से अधिक कृषि वैज्ञानिक सीधे ग्राम पंचायत स्तर पर किसान चौपाल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे।
- कृषि मंत्री ने किसानों को सॉइल टेस्ट, पराली प्रबंधन, फसल विविधीकरण और सरकारी योजनाओं के पूर्ण लाभ का संकल्प दिलाया।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 22 अक्टूबर 2026 से राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान की शुरुआत की जा रही है। देश में टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने, मिट्टी की उर्वरता में सुधार करने और किसानों की कृषि लागत में कमी लाने के उद्देश्य से इस 40 दिवसीय अभियान का आयोजन 30 नवंबर 2026 तक किया जाएगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान हरियाणा के करनाल जिले में स्थित तरावड़ी से इस राष्ट्रव्यापी अभियान का विधिवत उद्घाटन करेंगे।
खेत बचाओ अभियान क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
खेत बचाओ अभियान टिकाऊ कृषि और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए शुरू किया गया 40 दिवसीय राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है। 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों की उत्पादन लागत घटाना और देश के लगभग एक करोड़ किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना है। इसके तहत कृषि वैज्ञानिक सीधे पंचायतों में जाकर किसानों को परामर्श देंगे।
तरावड़ी में किसान चौपाल से खेत बचाओ अभियान का आगाज
22 अक्टूबर को हरियाणा प्रवास के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सीधे खेतों के बीच पहुंचकर किसानों के साथ चौपाल चर्चा करेंगे। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान वे पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए पौधारोपण भी करेंगे। इस राज्यस्तरीय समारोह में हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के अलावा केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कृषि विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने अभियान की पूर्व संध्या पर देश के किसानों के नाम एक विशेष संदेश जारी किया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि धरती माता, जल संसाधन और किसानों का परिश्रम ही देश की वास्तविक शक्ति हैं। जब खेत की मिट्टी उपजाऊ और स्वस्थ रहेगी, तभी किसान समृद्ध और खुशहाल बन सकेगा। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले खरीफ सीजन में 93 लाख से अधिक किसानों ने ऐसे प्रयासों में भाग लेकर इसे एक जन-आंदोलन का रूप दिया था। इस बार कृषि वैज्ञानिक स्वयं किसानों के खेतों तक पहुंचकर वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराएंगे।
किसानों के लिए कृषि मंत्री के चार प्रमुख संकल्प
केंद्रीय मंत्री ने खेत बचाओ अभियान को सफल बनाने के लिए देश के अन्नदाताओं से चार महत्वपूर्ण संकल्प अपनाने का आह्वान किया है:
- सॉइल टेस्ट के आधार पर उर्वरक का प्रयोग: किसान अपनी जमीन की मृदा जांच (Soil Test) जरूर करवाएं और जांच रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुसार ही संतुलित मात्रा में रासायनिक व जैविक खाद का उपयोग करें।
- पराली प्रबंधन: धान की फसल के बाद पराली को खेतों में जलाने के बजाय उसे मिट्टी में मिलाकर प्राकृतिक खाद बनाने की दिशा में काम करें।
- फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाना: केवल धान और गेहूं के पारंपरिक चक्र पर निर्भर रहने के बजाय फसल चक्र में दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों को भी शामिल करें।
- सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ: प्राकृतिक खेती को अपनाने के साथ-साथ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ उठाएं।
12 हजार कृषि वैज्ञानिक पहुंचेंगे 1 करोड़ किसानों के द्वार
खेत बचाओ अभियान के तहत देश भर में लगभग एक करोड़ किसानों तक सीधे संपर्क स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसके कार्यान्वयन के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA – आत्मा) की 4,150 से अधिक संयुक्त टीमों को तैनात किया गया है।
इन टीमों में 12,000 से अधिक कृषि वैज्ञानिक और कृषि अधिकारी शामिल हैं जो सीधे ग्राम पंचायत स्तर पर जाएंगे। ये अधिकारी और वैज्ञानिक गांव-गांव में किसान चौपाल, तकनीकी प्रशिक्षण सत्र और खेत प्रदर्शनों का आयोजन करेंगे। इस पूरी पहल का मुख्य ध्येय ‘खेत बचेगा, तभी किसान समृद्ध होगा’ की सोच को जमीनी स्तर पर लागू करना है।
यह भी जानें: किसानों पर इस अभियान का असर और इसकी जरूरत
भारत में अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग और असंतुलित सिंचाई के कारण कई क्षेत्रों में मिट्टी की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हुई है। इसके साथ ही, खरीफ और रबी सीजन के दौरान पराली जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है बल्कि मिट्टी के सूक्ष्म पोषक तत्व और मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं।
खेत बचाओ अभियान के जरिए जब वैज्ञानिक सीधे किसानों के खेतों पर पहुंचकर मिट्टी की जांच करेंगे, तो किसानों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनकी जमीन में किस पोषक तत्व की कमी है। संतुलित मात्रा में उर्वरक डालने से खाद का अनावश्यक खर्च बचेगा, जिससे कृषि लागत में सीधी कमी आएगी। इसके अलावा, दलहन और तिलहन फसलों को जोड़ने से मिट्टी में नाइट्रोजन का प्राकृतिक स्थिरीकरण होगा और जल स्तर में भी सुधार आएगा।
योजना के अंतर्गत पीएम-किसान और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी वित्तीय योजनाओं के साथ एकीकरण से छोटे और सीमांत किसानों को समय पर सस्ता ऋण और कृषि निवेश उपलब्ध हो सकेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: खेत बचाओ अभियान कब से कब तक आयोजित किया जाएगा?
उत्तर: यह राष्ट्रव्यापी अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक पूरे 40 दिनों के लिए आयोजित किया जा रहा है।
प्रश्न: खेत बचाओ अभियान का शुभारंभ कहां से हो रहा है?
उत्तर: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 22 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के करनाल जिले के तरावड़ी से इस अभियान का शुभारंभ करेंगे।
प्रश्न: इस अभियान के तहत कितने किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है?
उत्तर: इस अभियान के जरिए देश के लगभग 1 करोड़ किसानों तक पहुंचने और 4,150 से अधिक संयुक्त टीमों के माध्यम से वैज्ञानिक मार्गदर्शन देने का लक्ष्य रखा गया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






