
भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) द्वारा आयोजित तीसरे राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन 2026 का नई दिल्ली में समापन हो गया। जानें सम्मेलन की मुख्य सिफारिशें और निष्कर्ष।
मुख्य बातें
- भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) द्वारा नई दिल्ली के होटल द अशोक में दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया।
- सम्मेलन में सरकार, पीएसयू, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के 600 से अधिक वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- पूर्व कैबिनेट सचिव अजीत सेठ ने सीएसआर खर्च में क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने और वंचित जिलों पर ध्यान देने की जरूरत जताई।
- सम्मेलन के दौरान ‘सीएसआर की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का संकलन 2025’ और 2024 की रिपोर्ट जारी की गई।
नई दिल्ली के होटल द अशोक में दो दिवसीय राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन 2026 का सफलतापूर्वक समापन हो गया। भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) द्वारा आयोजित इस तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी (NCCSR 2026) में देश भर के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत के लिए सीएसआर की भावना को नए सिरे से परिभाषित करना, अनुपालन से प्रतिबद्धता तक’ विषय के तहत कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की भूमिका को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाना था। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में पूर्व कैबिनेट सचिव अजीत सेठ, आईआईसीए के महानिदेशक ज्ञानेश्वर कुमार सिंह और विभिन्न मंत्रालयों व कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या था?
राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन 2026 का मुख्य उद्देश्य भारत में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व को केवल कानूनी अनुपालन से आगे बढ़ाकर राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत @2047 के संकल्प से जोड़ना था। सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने, महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में सीएसआर की भूमिका पर गहन चर्चा की गई।
सीएसआर व्यवस्था में बदलाव और नए दृष्टिकोण की जरूरत
पूर्व कैबिनेट सचिव अजीत सेठ ने सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि सीएसआर की सफलता का वास्तविक आकलन केवल खर्च की गई राशि से नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व का असली दायरा लोगों के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास से तय होता है। उन्होंने कंपनियों से आग्रह किया कि वे इसे केवल एक कानूनी औपचारिकता न मानें, बल्कि देश के विकास के लिए एक रणनीतिक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करें।
इसके साथ ही, उन्होंने सीएसआर फंड्स के भौगोलिक असंतुलन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सीएसआर का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा विकसित राज्यों या जिलों तक सीमित रह जाता है। इस असंतुलन को समाप्त करके देश के पिछड़े और वंचित जिलों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की सख्त आवश्यकता है। प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल टूल्स से पारदर्शिता और निगरानी तो बढ़ सकती है, लेकिन वे जमीनी प्रशासनिक अनुभव का स्थान नहीं ले सकते।
राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन में एआई और आधुनिक तकनीक पर चर्चा
राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन के दौरान तकनीक और डिजिटल डेटा प्रणालियों के प्रभावी इस्तेमाल पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी के माध्यम से सीएसआर में बदलाव’ विषय पर हुई चर्चा में विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस उच्चस्तरीय पैनल में एसबीआई फाउंडेशन, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल फाउंडेशन, इंडिगो, गिव और अमृता विश्व विद्यापीठम के प्रतिनिधि शामिल थे।
पैनल ने इस बात पर जोर दिया कि सीएसआर परियोजनाओं की योजना बनाने, उन्हें लागू करने और उनके परिणामों का सटीक मूल्यांकन करने में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। तकनीक का उपयोग इस तरह होना चाहिए कि सामाजिक कार्यों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, सम्मेलन में ‘सीएसआर की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का संकलन 2025’ और 2024 की रिपोर्ट भी जारी की गई, ताकि विभिन्न संस्थान एक-दूसरे के सफल मॉडल से सीख सकें।
सीएसआर एक्सचेंज और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का जुड़ाव
सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण सीएसआर एक्सचेंज पोर्टल और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) पर आयोजित संवाद सत्र रहा। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव बालामुरुगन डी. ने कंपनियों का आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि उद्योगों की सक्रिय भागीदारी से युवाओं को व्यावहारिक कार्य अनुभव मिलेगा और उनके कौशल तथा बाजार की जरूरतों के बीच का अंतर समाप्त होगा।
पूर्व सचिव अनिल स्वरूप की अध्यक्षता में आयोजित ‘सीएसआर एक्सचेंज’ सत्र में कॉरपोरेट जगत और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया। सीएसआर एक्सचेंज पोर्टल के माध्यम से विश्वसनीय संस्थाओं का चयन, डेटा का एकीकरण और पारदर्शी प्रक्रियाएं स्थापित करने की सिफारिश की गई।
महिला सशक्तीकरण और क्षेत्रीय विकास पर इसका असर
‘देखभाल में निवेश: महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए सीएसआर की नई भूमिका’ सत्र में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर विस्तृत मंथन किया गया। विशेषज्ञ वक्ताओं ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े बुनियादी ढांचे का निर्माण करके और देखभाल कार्यकर्ताओं को कौशल प्रदान करके महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनाए जा सकते हैं। इस चर्चा में सेवा भारत, ग्रांट थॉर्नटन और यूएन वीमेन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इसके अलावा, क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए लोक उद्यम विभाग, एनएसई फाउंडेशन, टाटा स्टील फाउंडेशन और ओएनजीसी फाउंडेशन जैसी संस्थाओं ने सीएसआर विकेंद्रीकरण पर सुझाव दिए।
सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियां और सिफारिशें
राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन 2026 में कई महत्वपूर्ण निर्णय और सिफारिशें सामने आईं:
- विकेंद्रीकरण पर जोर: सीएसआर फंड को केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखकर वंचित और दूरदराज के जिलों में खर्च करने की सिफारिश की गई।
- सीएसआर एक्सचेंज पोर्टल: कंपनियों और सामाजिक संगठनों के बीच पारदर्शी समन्वय के लिए डेटा आधारित एकीकृत मंच बनाने का निर्णय लिया गया।
- पीएम इंटर्नशिप योजना से जुड़ाव: युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाने के लिए सीएसआर और पीएम इंटर्नशिप योजना के बीच तालमेल बैठाने का आह्वान किया गया।
- सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का प्रकाशन: आईआईसीए द्वारा एनसीसीएसआर 2025 की सफल सीएसआर परियोजनाओं का संकलन जारी किया गया।
- आकलन के साझा संकेतक: विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं के प्रभाव को मापने के लिए एक समान और मानक संकेतक विकसित करने पर सहमति बनी।
भारत में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का ढांचा
भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत सीएसआर को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया था। इसके अनुसार, निश्चित लाभ या टर्नओवर वाली कंपनियों को अपने पिछले तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक कल्याणकारी कार्यों में खर्च करना अनिवार्य है।
भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में कार्य करता है। यह संस्थान सीएसआर नीतियों के निर्माण, शोध, क्षमता निर्माण और कंपनियों को सही मार्गदर्शन प्रदान करने का काम करता है। इस सम्मेलन के माध्यम से सरकार और आईआईसीए का लक्ष्य है कि सीएसआर केवल कानूनी अनुपालन का माध्यम न बने, बल्कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में योगदान दे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन 2026 का आयोजन किसके द्वारा किया गया?
उत्तर: इस सम्मेलन का आयोजन कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट द्वारा नई दिल्ली में किया गया।
प्रश्न: सीएसआर सम्मेलन 2026 की मुख्य थीम क्या थी?
उत्तर: इस सम्मेलन की मुख्य थीम ‘विकसित भारत के लिए सीएसआर की भावना को नए सिरे से परिभाषित करना, अनुपालन से प्रतिबद्धता तक’ रखी गई थी।
प्रश्न: सीएसआर का पीएम इंटर्नशिप योजना से क्या संबंध है?
उत्तर: सम्मेलन में कंपनियों से आग्रह किया गया कि वे सीएसआर और पीएम इंटर्नशिप योजना के माध्यम से देश के युवाओं को कार्यस्थल पर व्यावहारिक अनुभव और कौशल प्रदान करें ताकि उनकी रोजगार क्षमता बढ़ सके।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






