
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में एसआईडीएम के आठवें वार्षिक सत्र में 15 चैंपियन पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के रक्षा निर्यात में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज किए जाने की जानकारी दी।
मुख्य बातें
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 9 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में एसआईडीएम के आठवें वार्षिक सत्र में 15 चैंपियन पुरस्कार प्रदान किए।
- वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष से 60 प्रतिशत अधिक है।
- सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा निर्यात में 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
- रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी को लगभग 24 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का आह्वान किया गया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 9 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के आठवें वार्षिक सत्र में विभिन्न संगठनों को एसआईडीएम चैंपियन पुरस्कार 2026 प्रदान किए। पीआईबी के अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान स्वदेशी तकनीक, डिजाइन, नवाचार और निर्यात के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संगठनों को कुल 15 चैंपियन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, महानिदेशक (अधिग्रहण) श्री ए. अनबारासु, एसआईडीएम के संस्थापक अध्यक्ष श्री बाबा कल्याणी और एसआईडीएम के अध्यक्ष श्री अरुण रामचंद्रनी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
रक्षा निर्यात 2025-26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हुआ
भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि दर्शाता है। सरकार ने आने वाले समय के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है। रक्षा मंत्री ने वर्ष 2029 तक देश के रक्षा निर्यात में 50,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा छूने की प्रतिबद्धता दोहराई है। एक समय भारत बड़े पैमाने पर रक्षा उपकरणों का आयात करने वाला देश था, लेकिन अब यह आधुनिक सैन्य उपकरणों के एक विश्वसनीय निर्यातक के रूप में उभर रहा है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
रक्षा मंत्री ने घरेलू रक्षा औद्योगिक तंत्र को मजबूत करने के लिए उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के बीच संवाद की सराहना की। उन्होंने रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी को वर्तमान के लगभग 24 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का अपना आह्वान दोहराया। पिछले 12 वर्षों में निजी क्षेत्र का योगदान काफी बढ़ा है। श्री सिंह ने उद्योगपतियों से अपील की कि वे इस साझा राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए और अधिक प्रगतिशील और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह नियमन और गुणवत्ता के मानकों को बनाए रखते हुए उद्योगों के विकास में हरसंभव सहायता जारी रखेगी।
रणनीतिक स्वायत्तता और अनुसंधान का महत्व
सत्र की मुख्य विषयवस्तु ‘संप्रभु क्षमताएं, विवादित सीमाएं: उथल-पुथल के दौर में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ावा देने’ पर विशेष रूप से बल दिया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब इस बात पर निर्भर करती है कि देश अपनी सेनाओं के लिए आवश्यक उपकरणों को खुद डिजाइन, विकसित और निर्मित करने की कितनी क्षमता रखता है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल, वायु रक्षा प्रणालियों और सॉफ्टवेयर तकनीकों की भूमिका बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसलिए अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पर किए जाने वाले खर्च को एक जरूरी निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।
एसआईडीएम और सरकारी नीतियां
वर्ष 2017 में स्थापित सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) एक ऐसा एकीकृत मंच है जो बड़ी कंपनियों, एमएसएमई, स्टार्टअप, शोध संस्थानों और विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करता है। सरकार द्वारा निजी रक्षा उद्योग की क्षमताओं का विस्तार करने के लिए कई नीतिगत सुधार किए गए हैं। इनमें रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, रक्षा खरीद नियमावली, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां, सृजन पोर्टल और रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (आईडेक्स) जैसी महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। सरकार का मानना है कि देश का युवा कार्यबल और औद्योगिक क्षमताएं भारत को दुनिया के शीर्ष रक्षा विनिर्माण देशों में शामिल करेंगी।
यह भी जानें: ऑपरेशन सिंदूर और उत्पादन क्षमता
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के दौरान ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश को जरूरत पड़ने पर अपनी घरेलू रक्षा उत्पादन इकाइयों की क्षमता को बहुत तेजी से बढ़ाने की आवश्यकता होती है। बदलती हुई सामरिक और सैन्य आवश्यकताओं के मद्देनजर रक्षा निर्माताओं को त्वरित तथा प्रभावी समाधान विकसित करने होंगे। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने से न केवल देश की विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति भी मजबूत होगी।
- वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात: 38,424 करोड़ रुपये
- निर्यात में वार्षिक वृद्धि दर: 60 प्रतिशत से अधिक
- वर्ष 2029 तक का रक्षा निर्यात लक्ष्य: 50,000 करोड़ रुपये
- निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य: 24 प्रतिशत से 50 प्रतिशत
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? एसआईडीएम चैंपियन पुरस्कार 2026 कितने प्रदान किए गए? उत्तर। एसआईडीएम के आठवें वार्षिक सत्र में कुल 15 चैंपियन पुरस्कार प्रदान किए गए।
प्रश्न? वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात कितना रहा? उत्तर। इस वित्त वर्ष के दौरान भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






