
केन्द्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण 9 से 11 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर के दौरे पर रहेंगी, जहां वे व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगी।
मुख्य बातें
- यात्रा की अवधि: 9 से 11 अक्टूबर 2026
- मुलाकात: सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन शनमुगरत्नम और प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से होगी भेंट
- मुख्य फोकस: व्यापार, डिजिटल वित्तीय कनेक्टिविटी, सेमीकंडक्टर और कौशल विकास
- निवेश का स्रोत: अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच सिंगापुर से 194.68 अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई आया
केन्द्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण 9 से 11 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। पत्र सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, इस तीन दिवसीय दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और सिंगापुर के बीच आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करना तथा वैश्विक निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना है। इस यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगी।
निर्मला सीतारमण सिंगापुर दौरे पर किन बड़े नेताओं से मिलेंगी?
निर्मला सीतारमण सिंगापुर के शीर्ष नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय चर्चा करेंगी। अपनी इस यात्रा के दौरान, वित्त मंत्री सिंगापुर के राष्ट्रपति महामहिम श्री थरमन शनमुगरत्नम, प्रधानमंत्री महामहिम श्री लॉरेंस वोंग, उप-प्रधानमंत्री श्री गन किम योंग और विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालकृष्णन से मुलाकात करेंगी। इन नेताओं के साथ होने वाली बैठकों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर जोर दिया जाएगा।
भारत और सिंगापुर के बीच के संबंध लंबे समय से बेहद मजबूत रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने तकनीक, वित्तीय सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र में आपसी साझेदारी को तेजी से बढ़ाया है। इस बार की बैठकों में भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष चर्चा होगी। इसके अलावा, भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय राउंडटेबल सम्मेलन (आईएसएमआर) के निष्कर्षों को भी आगे बढ़ाया जाएगा ताकि जमीन पर ठोस परिणाम सामने आ सकें।
व्यापार, सेमीकंडक्टर और डिजिटल वित्त पर विशेष फोकस
दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ताओं में कई ऐसे क्षेत्र शामिल हैं जो भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनमें निम्नलिखित सेक्टर मुख्य रूप से शामिल हैं:
- व्यापार एवं निवेश के नए अवसर खोजना।
- डिजिटल वित्तीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना।
- पूंजी बाजार और कराधान के मुद्दों पर चर्चा।
- सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) में सहयोग।
- कौशल विकास और विमानन (एविएशन) क्षेत्र को मजबूत करना।
सिंगापुर वर्तमान में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच सिंगापुर से भारत में लगभग 194.68 अरब अमेरिकी डॉलर का कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। जीआईसी और टेमासेक जैसे बड़े सिंगापुर संस्थान पहले से ही भारतीय अर्थव्यवस्था के कई सेक्टरों में भारी निवेश कर रहे हैं।
वैश्विक निवेशकों और सीईओ के साथ वन-टू-वन बैठकें
अपनी यात्रा के दौरान वित्त मंत्री सिंगापुर के निवेशक समुदाय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों और उद्योग जगत के दिग्गजों से संवाद करेंगी। वे हेज फंड और पोर्टफोलियो फंड प्रबंधकों के साथ राउंडटेबल बैठकों के साथ-साथ सरकार-से-बिजनेस (जी2बी) वार्ताओं में भी भाग लेंगी। इन चर्चाओं का मकसद भारत की मौजूदा विकास यात्रा और बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य से निवेशकों को अवगत कराना है।
श्रीमती सीतारमण कई प्रतिष्ठित ग्लोबल कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ व्यक्तिगत (वन-टू-वन) बैठकें भी करेंगी। इनमें गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (जीआईसी), टेमासेक होल्डिंग्स, डीबीएस बैंक लिमिटेड, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (बीआईआई), आईएचएच हेल्थकेयर बरहाद, मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप और एचपीएस इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
यह भी जानें: भारत-सिंगापुर आर्थिक साझेदारी का महत्व
भारत और सिंगापुर के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है। सिंगापुर दक्षिण पूर्व एशिया में भारत का एक प्रमुख रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। भारत के वित्तीय सुधारों और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में सिंगापुर की गहरी दिलचस्पी रही है। राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (NIIF) और गिफ्ट सिटी जैसे प्लेटफॉर्म सिंगापुर की पूंजी को भारतीय बाजारों तक लाने में एक पुल की तरह काम कर रहे हैं। वित्त मंत्रालय और संबंधित विभाग सिंगापुर के इच्छुक निवेशकों को भारतीय कंपनियों और राज्य सरकारों के साथ जोड़ने में लगातार सहायता प्रदान कर रहे हैं ताकि निवेश की प्रक्रिया को और सुगम बनाया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? निर्मला सीतारमण की सिंगापुर यात्रा कब से कब तक है? उत्तर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 9 से 11 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी।
प्रश्न? सिंगापुर भारत में निवेश के मामले में क्या स्थान रखता है? उत्तर। सिंगापुर अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के दौरान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा स्रोत रहा है।
प्रश्न? इस यात्रा के दौरान किन मुख्य मुद्दों पर चर्चा होगी? उत्तर। इस यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, डिजिटल वित्तीय कनेक्टिविटी, सेमीकंडक्टर और कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






