शुक्रवार, अक्टूबर 9, 2026

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को मिले 9.68 करोड़ रुपए, जानिए पूरी डिटेल

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जैव विविधता

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में विभिन्न जैविक संसाधनों के उपयोग से 9.68 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है।

मुख्य बातें

  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) को 01.04.2026 से 30.09.2026 के बीच 9.68 करोड़ रुपए मिले।
  • कृषि बीज क्षेत्र से सबसे अधिक 7.16 करोड़ रुपए की आय हुई है।
  • मैसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया लिमिटेड ने सबसे अधिक लगभग 2.01 करोड़ रुपए का अंशदान दिया।
  • वर्ष 2008 से अब तक एनबीए ने एबीएस के माध्यम से लगभग 278 करोड़ रुपए जुटाए हैं।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) को 01 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 की अवधि के दौरान भारत के जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं से कुल 9.68 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, यह राशि जैविक विविधता अधिनियम, 2002 और 2023 में संशोधित तथा पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) विनियमों के प्रावधानों के अनुसार हासिल हुई है। कुल प्राप्तियों में से 9.56 करोड़ रुपए जैविक संसाधनों तक पहुंच के लिए विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों से आए हैं।

जैव विविधता प्राधिकरण को किस क्षेत्र से कितनी आय हुई?

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कृषि बीज क्षेत्र से सबसे अधिक 7.16 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। इसके बाद खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र का स्थान रहा, जिससे 1.59 करोड़ रुपए की कमाई हुई। पशुपालन क्षेत्र से 62.01 लाख रुपए का योगदान मिला। इसके अलावा बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) से जुड़े आवेदनों के तहत वर्गीकृत राशि 11.24 लाख रुपए दर्ज की गई। आयुष, लाल चंदन और सौंदर्य प्रसाधन जैसे अन्य क्षेत्रों से भी इस अवधि में महत्वपूर्ण अंशदान प्राप्त हुआ है।

प्रमुख अंशदाताओं और कंपनियों की सूची

इस अवधि के दौरान देश-विदेश की कई प्रमुख कंपनियों और संस्थानों ने एबीएस ढांचे के तहत अपना योगदान दिया है। नीचे उन प्रमुख अंशदाताओं के नाम और आंकड़े दिए गए हैं:

  • मैसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया लिमिटेड: लगभग 2.01 करोड़ रुपए (कई भुगतानों में)
  • मैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड: 1.17 करोड़ रुपए (सबसे बड़ा एकल भुगतान)
  • मैसर्स ननहेम्स इंडिया लिमिटेड: लगभग 1.64 करोड़ रुपए (अग्रिम भुगतान)
  • मैसर्स टाटा केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड: 52.06 लाख रुपए
  • मैसर्स इंडेना इंडिया प्राइवेट लिमिटेड: 45.89 लाख रुपए
  • मैसर्स ग्रो इंडिगो लिमिटेड: 45.79 लाख रुपए
  • मैसर्स नोवोजाइम्स साउथ एशिया: 44.11 लाख रुपए

इन घरेलू कंपनियों के अलावा श्रीलंका, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण कोरिया गणतंत्र और भूटान सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी अंशदान मिला है।

जैविक संसाधनों की विविधता और दायरे का विस्तार

प्राप्तियों के इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि देश में कृषि, खाद्य, औषधियां और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विभिन्न जैविक संसाधनों का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। इनमें चना, लाल मसूर, हरी मूंग, कुलथी, अलसी, ग्वार गोंद, साबूदाना, कुट्टू, ब्राऊन राइस, फूलगोभी, भिंडी, लाल मिर्च, बैंगन और तोरी जैसी कृषि फसलें शामिल हैं। औषधीय पौधों के तहत अश्वगंधा, शतावरी, कालमेघ, वासाका, मुलेठी, अर्जुन, ब्राह्मी, गोटूकोला और मोरिंगा का उपयोग किया गया है। इसके अलावा मृदा सूक्ष्मजीव और जर्सी गाय, मुर्रा भैंस व मिथुन जैसे पशुधन के आनुवंशिक संसाधन भी इसमें शामिल हैं।

यह भी जानें: जैव विविधता संरक्षण और लाभ साझाकरण का महत्व

वर्ष 2008 से लेकर अब तक राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने एबीएस तंत्र के माध्यम से लगभग 278 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसमें से 200 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का वितरण देश भर के समुदायों, किसानों और संस्थानों के बीच किया जा चुका है। यह प्रणाली केवल धन इकट्ठा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग को उनके संरक्षण और सतत विकास से जोड़ना है। राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेशों की परिषदों के मार्फत मिलने वाली इस राशि का उपयोग जन जैव विविधता रजिस्टर तैयार करने, जैव विविधता प्रबंधन समितियों को मजबूत करने और स्थानीय समुदायों को लाभान्वित करने में किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को यह राशि किस कानून के तहत मिली है? उत्तर। यह राशि जैविक विविधता अधिनियम, 2002 (2023 में संशोधित) और एबीएस विनियमों के नियमों के तहत प्राप्त हुई है।

प्रश्न? इस अवधि में सबसे बड़ा एकल भुगतान किस कंपनी ने किया? उत्तर। सबसे बड़ा एकल एबीएस भुगतान मैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड द्वारा 1.17 करोड़ रुपए का किया गया।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका में समाचार एवं व्यापार संपादक हैं। वे अर्थव्यवस्था, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), बैंकिंग, शेयर बाजार, सरकारी योजनाओं, रोज़गार और भर्ती से जुड़ी खबरों तथा पाठकों के काम आने वाली व्यावहारिक जानकारी (कैसे करें/स्टेप-बाय-स्टेप गाइड) की रिपोर्टिंग और संपादन करते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि हर आँकड़ा, तिथि और प्रक्रिया आधिकारिक स्रोत से सत्यापित हो और लेख में मूल विज्ञप्ति या पोर्टल का लिंक दिया जाए। किसी गलती की सूचना के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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