
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जिसमें एक नेक दिल और असाधारण व्यक्तित्व वाले व्यक्ति की पहचान बताई गई है।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषितम् साझा किया।
- सुभाषितम् के अनुसार हृदय की पवित्रता, त्याग और साहस नेक दिल व्यक्ति के गुण हैं।
- सुख-दुख में समभाव, योग्यता, स्नेह और सच्चाई को भी असाधारण व्यक्तित्व का लक्षण बताया गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक खास संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जिसके जरिए उन्होंने इंसान के भीतर मौजूद अच्छे संस्कारों और उच्च विचारों पर रोशनी डाली है। पीआईबी (प्रेस सूचना ब्यूरो) से मिली जानकारी के अनुसार, इस श्लोक में उन तमाम मानवीय गुणों की चर्चा की गई है जो किसी भी आम इंसान को एक असाधारण व्यक्तित्व का स्वामी बनाते हैं। प्रधानमंत्री ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट के जरिए इस संदेश को देशवासियों तक पहुंचाया है, जो जीवन जीने के नैतिक मूल्यों को गहराई से समझाता है।
संस्कृत सुभाषितम् के जरिए पीएम मोदी ने क्या संदेश दिया?
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है- ‘शुचित्वं त्यागिता शौर्यं सामान्यं सुखदुःखयोः। दाक्षिण्यं चानुरक्तिश्च सत्यता च सुहृद्गुणाः॥’ इस श्लोक का अर्थ है कि मन की शुचिता, सब कुछ त्यागने का जज्बा, वीरता, हर परिस्थिति में संयम बरतना और सच का साथ देना किसी भी सच्चे और नेक इंसान की पहचान है। यह प्राचीन ज्ञान हमें आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में भी नैतिक मूल्यों को थामे रखने की प्रेरणा देता है।
शारीरिक या आर्थिक तरक्की के इस दौर में आंतरिक गुणों का होना कितना जरूरी है, इस सुभाषितम् के माध्यम से यही रेखांकित किया गया है। आज के समय में जब लोग व्यक्तिगत स्वार्थों में उलझे रहते हैं, तब इस तरह के विचार समाज को एक नई दिशा देने का काम करते हैं। पत्र सूचना ब्यूरो के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने इस प्राचीन ज्ञान के जरिए मानवता और अच्छे चरित्र की कसौटियों को याद दिलाया है।
नेक दिल इंसान के प्रमुख गुण
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस श्लोक में कुल सात प्रमुख गुणों को रेखांकित किया गया है जो किसी भी श्रेष्ठ व्यक्ति की नींव तय करते हैं। इन गुणों को जीवन में उतारने से व्यक्ति समाज में एक मिसाल बनता है।
- शुचित्वं: यानी हृदय और मन की पूरी पवित्रता।
- त्यागिता: दूसरों के कल्याण के लिए त्याग की भावना।
- शौर्यम्: कठिन समय में भी अडिग रहने का साहस।
- सामान्यं सुखदुःखयोः: जीवन के हर दौर में समभाव रखना।
- दाक्षिण्यम्: कार्यकुशलता और योग्यता का गुण।
- अनुरक्तिश्च: अपनों और समाज के प्रति स्नेह व प्रेम।
- सत्यता च: जीवन के हर आचरण में पूरी सच्चाई।
इसका असर और समाज में संदेश
इस तरह के प्राचीन ग्रंथों और सूक्तियों को जब देश के शीर्ष नेतृत्व द्वारा साझा किया जाता है, तो आम जनमानस पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। युवा पीढ़ी जो अक्सर अपनी संस्कृति से दूर हो रही है, वह इन संदेशों के माध्यम से अपने मूल संस्कारों से जुड़ती है। यह केवल एक धार्मिक या भाषाई श्लोक नहीं है, बल्कि एक बेहतरीन जीवन शैली का दस्तावेज है जो तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धी माहौल में मानसिक शांति और संतुलन सिखाता है।
ऐतिहासिक रूप से भारतीय संस्कृति में सुभाषितों का बहुत बड़ा स्थान रहा है। प्राचीन काल से ही गुरु-शिष्य परंपरा और साहित्यों के जरिए इन उपदेशों को आम जनता तक पहुंचाया जाता रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा इसे सोशल मीडिया पर साझा किए जाने से डिजिटल युग में भी भारतीय दर्शन वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषितम् क्या है? उत्तर। प्रधानमंत्री ने ‘शुचित्वं त्यागिता शौर्यं सामान्यं सुखदुःखयोः। दाक्षिण्यं चानुरक्तिश्च सत्यता च सुहृद्गुणाः॥’ श्लोक साझा किया है।
प्रश्न? इस सुभाषितम् का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर। इसके जरिए एक नेक दिल और असाधारण व्यक्तित्व वाले इंसान के आंतरिक गुणों को परिभाषित किया गया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






