रविवार, अक्टूबर 4, 2026

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन: भारत में बने 40 सुपर कंप्यूटर

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राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन

पीआईबी के अनुसार, राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत सितंबर 2026 तक देश भर में 40 सुपर कंप्यूटर तैनात किए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 68 पेटाफ्लॉप्स है।

मुख्य बातें

  • सितंबर 2026 तक देश में 40 सुपर कंप्यूटर तैनात, जिनकी संयुक्त क्षमता 68 पेटाफ्लॉप्स है।
  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन की शुरुआत अप्रैल 2015 में लगभग 4,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ हुई थी।
  • इस मिशन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय संयुक्त रूप से संचालित करते हैं।
  • सी-डैक द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन रुद्र सर्वर और परम रुद्र सुपर कंप्यूटर का निर्माण किया गया है।

भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा 1990 के दशक की शुरुआत में परम 8000 के विकास से शुरू होकर अब राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत एक मजबूत राष्ट्रीय परितंत्र में बदल चुकी है। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के अनुसार, सितंबर 2026 तक देश में कुल 40 सुपर कंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी संयुक्त कंप्यूटिंग क्षमता 68 पेटाफ्लॉप्स (पीएफ) है। यह प्रगति देश को उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन क्या है?

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन देश की वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अप्रैल 2015 में लगभग 4,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम को संयुक्त रूप से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मीइटी) द्वारा संचालित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में ही सुपरकंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे का डिजाइन, विनिर्माण और विकास करना है ताकि आयातित तकनीकों पर निर्भरता को कम किया जा सके।

सुपर कंप्यूटरों का आम नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों पर असर

इसका असर और राष्ट्रीय अनुप्रयोग

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत तैनात किए गए ये शक्तिशाली सिस्टम केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित करने वाले क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। फसल पैदावार की सटीक भविष्यवाणी करने, बीमारी के प्रकोप पर नजर रखने और नदी की बाढ़ के कारण प्रभावित होने वाले क्षेत्रों का समय रहते अनुमान लगाने में ये सिस्टम मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, महानदी नदी बेसिन में बाढ़ की भविष्यवाणी के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है जो दो दिन पहले ही खतरे की सूचना दे सकती है। इसके अलावा, सिक्किम हिमालय जैसे क्षेत्रों में जंगल की आग फैलने के मॉडल को ट्रैक करने के लिए भी उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग का उपयोग किया जा रहा है।

स्वदेशी तकनीक और रुद्र सर्वर का विकास

इस मिशन के तहत सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक), पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु अहम भूमिका निभा रहे हैं। स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग को आगे बढ़ाते हुए सी-डैक द्वारा ‘रुद्र’ श्रृंखला के सर्वर डिजाइन और विकसित किए गए हैं। इन स्वदेशी सर्वरों का उपयोग करके परम रुद्र सुपर कंप्यूटर बनाए गए हैं, जिनका उपयोग खगोल विज्ञान, परमाणु भौतिकी और पृथ्वी विज्ञान जैसे क्षेत्रों में उन्नत अनुसंधान के लिए किया जाता है। सितंबर 2026 तक परम रुद्र प्रणालियों के लिए 6,000 रुद्र सर्वर तैनात किए जा चुके हैं।

शिक्षा और कार्यबल का विकास

हार्डवेयर के साथ-साथ यह मिशन देश में कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी पूरा जोर दे रहा है। सितंबर 2026 तक इस बुनियादी ढांचे ने 400 से अधिक संस्थानों के 16,000 से अधिक शोधकर्ताओं की सहायता की है, जिसमें 2,900 से अधिक पीएचडी छात्र शामिल हैं। इन प्रणालियों पर डेढ़ करोड़ से अधिक जटिल कंप्यूट जॉब्स निष्पादित किए गए हैं और 1,990 से अधिक शोध प्रकाशन सामने आए हैं। छात्रों और शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए कार्यशालाएं, हैकथॉन और एनपीटीईएल के माध्यम से विशेष पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन की शुरुआत कब हुई थी? उत्तर। इस मिशन की शुरुआत अप्रैल 2015 में केंद्र सरकार द्वारा लगभग 4,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ की गई थी।

प्रश्न? सितंबर 2026 तक कितने सुपर कंप्यूटर तैनात किए गए हैं? उत्तर। पीआईबी के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 तक भारत में 68 पेटाफ्लॉप्स की संयुक्त क्षमता वाले कुल 40 सुपर कंप्यूटर तैनात किए जा चुके हैं।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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