मंगलवार, सितम्बर 15, 2026

ऑनलाइन एफआईआर कैसे दर्ज करें? जानिए पूरी कानूनी प्रक्रिया

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ऑनलाइन एफआईआर

घर बैठे पुलिस शिकायत दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, नियम और राज्यों के पोर्टल की जानकारी।

मुख्य बातें

  • ऑनलाइन एफआईआर मुख्य रूप से वाहन चोरी, दस्तावेज खोने और अज्ञात चोरी के मामलों में दर्ज की जा सकती है।
  • ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाती, यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है।
  • गंभीर और हिंसक अपराधों के लिए सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन जाना अनिवार्य है।
  • लॉस्ट रिपोर्ट और ई-एफआईआर में अंतर होता है; बीमा दावे के लिए ई-एफआईआर आवश्यक है।

ऑनलाइन एफआईआर राज्य पुलिस या गृह मंत्रालय के डिजिटल पोर्टल के माध्यम से घर बैठे दर्ज कराई जाने वाली एक आधिकारिक पुलिस शिकायत है। यदि आपका कोई सामान खो गया है या वाहन चोरी हुआ है, तो आप बिना थाने जाए इंटरनेट के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

ऑनलाइन एफआईआर क्या है?

ऑनलाइन एफआईआर डिजिटल पुलिस पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे दर्ज की जाने वाली शिकायत है। इसके तहत वाहन चोरी, दस्तावेज खोने या अज्ञात अपराधों की शिकायत सीधे पुलिस डेटाबेस में दर्ज होती है। इससे नागरिक को तुरंत एक संदर्भ नंबर और डिजिटल कॉपी प्राप्त होती है।

लॉस्ट रिपोर्ट, ई-एफआईआर और ज़ीरो एफआईआर में अंतर

अक्सर लोग गुमशुदगी की रिपोर्ट और एफआईआर को एक ही समझ लेते हैं। कानूनी रूप से इन तीनों प्रक्रियाओं में स्पष्ट अंतर होता है:

प्रकारकिस स्थिति में?पुलिस कार्रवाई
लॉस्ट रिपोर्ट (Lost Report)दस्तावेज़ या सामान खोने परकेवल रिकॉर्ड दर्ज होता है, जांच नहीं होती
ई-एफआईआर (e-FIR)वाहन चोरी या अज्ञात चोरीप्राथमिकी दर्ज कर पुलिस जांच शुरू करती है
ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR)गंभीर अपराध (क्षेत्राधिकार से बाहर)किसी भी थाने में दर्ज होकर संबंधित थाने भेजी जाती है

मान लीजिए आपका पासपोर्ट या आधार कार्ड सफर के दौरान कहीं गिर जाता है। ऐसे मामले में आपको एफआईआर की जगह पुलिस पोर्टल पर ‘लॉस्ट रिपोर्ट’ दर्ज करनी होती है। लेकिन अगर आपका वाहन घर के बाहर से चोरी हो जाता है, तो वहां ऑनलाइन एफआईआर दर्ज की जाएगी।

ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़

ऑनलाइन शिकायत दर्ज करते समय निम्नलिखित जानकारी और दस्तावेज़ अपने पास रखें:

  • पहचान पत्र: आधार कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस।
  • सक्रिय मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी: सूचनाएं और ओटीपी प्राप्त करने के लिए।
  • घटना का विवरण: घटना की सही तारीख, समय और स्थान।
  • चोरी हुए सामान का विवरण: यदि वाहन चोरी हुआ है तो रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर और इंजन नंबर।
  • मोबाइल गुम होने पर: आईएमईआई (IMEI) नंबर और संबंधित सिम कार्ड का विवरण।

ऑनलाइन एफआईआर कैसे दर्ज करें? (चरण-दर-चरण तरीका)

ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया राज्य पुलिस की वेबसाइट या केंद्रीय राष्ट्रीय क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) पोर्टल पर पूरी की जाती है। नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

  1. आधिकारिक पोर्टल खोलें: अपने राज्य की पुलिस वेबसाइट (जैसे यूपी पुलिस, दिल्ली पुलिस, महाराष्ट्र पुलिस) या सीसीटीएनएस पोर्टल पर जाएं।
  2. नागरिक सेवा (Citizen Services) का चयन करें: होमपेज पर मौजूद ‘Citizen Services’ या ‘e-FIR’ विकल्प पर क्लिक करें।
  3. अकाउंट बनाएं या लॉगिन करें: अपना मोबाइल नंबर और नाम दर्ज करके पोर्टल पर अकाउंट बनाएं और प्राप्त ओटीपी से लॉगिन करें।
  4. अपराध की श्रेणी चुनें: दी गई सूची में से सही श्रेणी चुनें, जैसे वाहन चोरी, दस्तावेज़ गुम होना या संपत्ति चोरी।
  5. घटना की पूरी जानकारी भरें: खुले हुए फॉर्म में घटना की सटीक तारीख, समय, स्थान और घटना का विवरण दर्ज करें।
  6. दस्तावेज़ अपलोड करें: पहचान पत्र या खरीदारी के बिल की फोटो/पीडीएफ स्कैन करके अपलोड करें।
  7. फॉर्म सबमिट करके रसीद डाउनलोड करें: सभी विवरणों की जांच करने के बाद फॉर्म जमा करें और स्क्रीन पर आने वाले एफआईआर नंबर की रसीद सुरक्षित रख लें।

किन मामलों में ऑनलाइन एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती?

नागरिकों की सुविधा के लिए डिजिटल पोर्टल बनाया गया है, लेकिन सभी मामलों में ऑनलाइन शिकायत दर्ज नहीं की जा सकती। यदि अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गंभीर प्रकृति का है, तो ऑनलाइन प्रणाली का उपयोग नहीं होता।

मारपीट, हत्या, डकैती, जबरन वसूली, घरेलू हिंसा या शारीरिक चोट जैसे मामलों में पीड़ित को तुरंत नजदीकी पुलिस थाने जाना अनिवार्य है। ऐसे मामलों में पुलिस को तुरंत मौके पर पहुंचकर सबूत जुटाने और बयान दर्ज करने होते हैं।

ऑनलाइन एफआईआर की स्थिति कैसे जांचें?

अपनी शिकायत पर हुई प्रगति की जानकारी हासिल करना बेहद आसान है। इसके लिए राज्य पुलिस पोर्टल पर ‘Track Complaint Status’ या ‘Check FIR Status’ लिंक पर जाएं।

वहां अपना शिकायत संदर्भ नंबर (Complaint Reference Number) या पंजीकृत मोबाइल नंबर दर्ज करें। स्क्रीन पर जांच अधिकारी (Investigating Officer) का नाम, संपर्क नंबर और मामले की वर्तमान स्थिति दिख जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्या ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने के लिए कोई फीस देनी होती है?
उत्तर: नहीं, पुलिस में शिकायत या एफआईआर दर्ज कराना पूरी तरह से मुफ्त सेवा है। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लगता।

प्रश्न: क्या ऑनलाइन दर्ज की गई एफआईआर अदालत में मान्य होती है?
उत्तर: हां, आधिकारिक पोर्टल से दर्ज कराई गई ई-एफआईआर कानूनी रूप से वैध होती है। बीमा दावा (Insurance Claim) करने या नए दस्तावेज बनवाने में यह पूरी तरह मान्य है।

प्रश्न: यदि पुलिस ऑनलाइन शिकायत पर कार्रवाई न करे तो क्या करें?
उत्तर: यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं होती है, तो आप जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस आयुक्त से संपर्क करके अपनी संदर्भ संख्या के साथ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

प्रश्न: क्या किसी भी राज्य से ऑनलाइन एफआईआर दर्ज की जा सकती है?
उत्तर: एफआईआर उसी राज्य के पुलिस पोर्टल पर दर्ज की जानी चाहिए जहां घटना घटी है। यदि घटना का स्थान स्पष्ट नहीं है, तो आप निकटतम थाने में ज़ीरो एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।

यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। पुलिस पोर्टल के नियम और उपलब्ध सेवाएं राज्य के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। किसी भी कानूनी प्रक्रिया या शिकायत दर्ज करने से पहले संबंधित राज्य पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए दिशा-निर्देशों की पुष्टि अवश्य कर लें।

आधिकारिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए: https://digitalpolice.gov.in

यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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