
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक योजनाओं के तहत जारी आंकड़े और डिजिटल सुरक्षा सुधार प्रस्तुत किए।
मुख्य बातें
- वित्त वर्ष 2025-26 में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत ₹6,186.95 करोड़ जारी हुए, जिससे 47.53 लाख छात्रों को लाभ मिला।
- प्री-मैट्रिक योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में ₹562.36 करोड़ जारी कर 26.79 लाख स्कूली छात्रों को कवर किया गया।
- वर्ष 2021-22 से सभी भुगतान पूरी तरह डीबीटी से जोड़े गए हैं, जिससे पैसा सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में ट्रांसफर होता है।
- फर्जी लाभार्थियों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, ई-केवाईसी और यूडीआईएसई-एआईएसएचई डेटाबेस एकीकरण लागू किया गया है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए जारी छात्रवृत्ति योजना के नए आंकड़े और डिजिटल सुधारों का विवरण साझा किया है। मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने बताया कि अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (EBC) और विमुक्त, घुमंतू तथा अर्ध-घुमंतू जनजातियों (DNT) को शिक्षा का समान अवसर देने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है। सरकार का मुख्य ध्यान छात्रवृत्ति के सीधे हस्तांतरण, पारदर्शिता और उच्च शिक्षा में ड्रॉपआउट दर को कम करने पर है।
छात्रवृत्ति योजना 2026: छात्रों को कैसे मिल रहा है सीधा लाभ?
केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति और अन्य वंचित वर्गों के पात्र छात्रों को प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्तर पर सीधा वित्तीय लाभ दिया जाता है। वर्ष 2021-22 से इस प्रक्रिया को पूरी तरह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) से जोड़ दिया गया है, जिससे राशि सीधे आधार से लिंक बैंक खातों में जमा होती है।
सचिव सुधांश पंत ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय केवल वित्तीय सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि सहायता राशि सही और असली लाभार्थी तक पहुंचे। इसके लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण और शैक्षणिक डेटाबेस का एकीकरण किया गया है।
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना: बजट और लाभार्थियों का आंकड़ा
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य स्कूली स्तर पर ही बच्चों को पढ़ाई छोड़ने से रोकना और साक्षरता दर में वृद्धि करना है। यह योजना विशेष रूप से अनुसूचित जाति के बच्चों और उन परिवारों के बच्चों को कवर करती है जिनके माता-पिता या अभिभावक जोखिम भरे और अस्वच्छ व्यवसायों में लगे हुए हैं।
पीआईबी के अनुसार, इस योजना के वित्तीय आंकड़े इस प्रकार हैं:
- वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्री-मैट्रिक योजना के तहत कुल ₹4,893.03 करोड़ की केंद्रीय सहायता राशि जारी की गई।
- इस अवधि में प्रति वर्ष औसतन लगभग 299.66 लाख वार्षिक लाभार्थियों को इस योजना का लाभ प्राप्त हुआ।
- केवल वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने ₹562.36 करोड़ की राशि जारी की, जिससे देश भर के 26.79 लाख छात्र लाभान्वित हुए।
यह योजना प्रारंभिक और माध्यमिक स्तर की शिक्षा में आर्थिक तंगी के कारण आने वाली रुकावटों को खत्म करती है। इससे गरीब परिवारों के बच्चे अपनी स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़ने के बजाय आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना: उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर बढ़ाना
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनुसूचित जाति के युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना प्रमुख केंद्र प्रायोजित पहल है। 10वीं कक्षा के बाद की पढ़ाई जैसे स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए यह आर्थिक मदद दी जाती है।
सचिव सुधांश पंत ने बताया कि 10वीं के बाद आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को इस योजना से सीधा सहारा मिलता है। इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति के छात्रों का सकल नामांकन अनुपात (GER) बढ़ाने में मदद मिली है।
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से जुड़े प्रमुख आंकड़े:
- वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 की अवधि में इस योजना के अंतर्गत ₹46,581.54 करोड़ की केंद्रीय सहायता जारी की गई है।
- इस पूरी अवधि के दौरान कुल 612.98 लाख वार्षिक लाभार्थी दर्ज किए गए।
- केवल वित्त वर्ष 2025-26 में ₹6,186.95 करोड़ की राशि जारी की गई, जिससे 47.53 लाख छात्रों को उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद मिली।
डिजिटल सुधार और छात्रवृत्ति योजना में फर्जीवाड़े पर रोक
पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी या डुप्लिकेट आवेदनों को खत्म करने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने डिजिटल ढांचे में कई बदलाव किए हैं। वित्त वर्ष 2021-22 से पोस्ट-मैट्रिक योजना को पूरी तरह से डीबीटी (DBT) मॉडल पर स्थानांतरित कर दिया गया था।
नई व्यवस्था के तहत छात्रवृत्ति का पैसा किसी मध्यस्थ या संस्थान के खाते में जाने के बजाय सीधे छात्र के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर होता है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और भुगतान में होने वाली देरी तथा लीकेज को रोका जा सका है।
मंत्रालय ने फर्जी लाभार्थियों को हटाने के लिए डी-डुप्लिकेशन प्रणाली लागू की है। इसके अतिरिक्त, छात्रों और अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी आधारित सत्यापन अनिवार्य किया गया है। डिजिलॉकर और एपीआई सेतु के एकीकरण से प्रमाण पत्रों की कागजी जांच के बजाय तुरंत डिजिटल सत्यापन हो जाता है।
यह भी जानें: डेटाबेस एकीकरण और वन-टाइम रजिस्ट्रेशन प्रणाली
छात्रों को हर साल नए सिरे से जटिल दस्तावेज जमा करने की परेशानी से बचाने के लिए मंत्रालय ने वन-टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) व्यवस्था लागू की है। इसके जरिए लाभार्थी छात्र की निगरानी अलग-अलग शैक्षणिक वर्षों और विभिन्न योजनाओं के दौरान आसानी से की जा सकती है।
संस्थानों और छात्रों के रिकॉर्ड की प्रामाणिकता जांचने के लिए इस प्रणाली को देश के प्रमुख शिक्षा डेटाबेस से जोड़ा गया है:
- उच्च शिक्षा के लिए अखिल भारतीय सर्वेक्षण (AISHE)
- स्कूल शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (UDISE)
- राष्ट्रीय और राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (NCVT और SCVT)
इसके अलावा, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) का आपस में एकीकरण किया गया है। इससे फंड का प्रवाह सुचारू हुआ है और फर्जी दावों को पूरी तरह खारिज करना संभव हो पाया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना किन छात्रों के लिए है?
उत्तर: यह योजना मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), ईबीसी और घुमंतू जनजातियों के विद्यार्थियों के लिए है। प्री-मैट्रिक 10वीं तक की पढ़ाई के लिए और पोस्ट-मैट्रिक 10वीं के बाद की उच्च शिक्षा के लिए दी जाती है।
प्रश्न: छात्रवृत्ति योजना का पैसा सीधे बैंक खाते में कैसे पहुंचता है?
उत्तर: वर्ष 2021-22 से लागू डीबीटी (DBT) और पीएफएमएस (PFMS) प्रणाली के माध्यम से छात्रवृत्ति राशि छात्र के आधार से जुड़े बैंक खाते में बिना किसी बिचौलिए के सीधे ट्रांसफर की जाती है।
प्रश्न: वित्त वर्ष 2025-26 में पोस्ट-मैट्रिक योजना के तहत कितना बजट जारी किया गया?
उत्तर: पीआईबी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत ₹6,186.95 करोड़ जारी किए गए, जिससे 47.53 लाख छात्र लाभान्वित हुए।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






