
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान की तीसरी गवर्निंग बॉडी बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने ‘शून्य हताहत’ लक्ष्य और आपदा-रोधी गांव बनाने के निर्देशों पर चर्चा की।
मुख्य बातें
- गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में NIDM के संस्थान निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की।
- पिछले 11 वर्षों में आपदा प्रबंधन क्षेत्र में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
- SDRF में लगभग चार गुना और NDRF के बजट में लगभग तीन गुना की वृद्धि की गई है।
- 16वें वित्त आयोग ने आपदा प्रबंधन के लिए दो लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
- कृषि विभाग को पाकिस्तान की ओर से होने वाले टिड्डी दल के हमलों से निपटने के लिए स्थायी तंत्र बनाने के निर्देश दिए गए।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) के संस्थान निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए आपदा प्रबंधन रणनीति की समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का मुख्य लक्ष्य देश के 5 लाख गांवों को आपदा रोधी बनाना है। इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के महानिदेशक, कृषि सचिव, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक तथा लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) के निदेशक सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
आपदा प्रबंधन में भारत का दृष्टिकोण कैसे बदला?
आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत ने राहत और पुनर्वास की पुरानी नीति को छोड़कर ‘शून्य हताहत’ (Zero Casualty) और जोखिम न्यूनीकरण का मॉडल अपनाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में इस दिशा में 2.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिससे देश का सुरक्षा ढांचा और मजबूत हुआ है।
बैठक में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने के तरीके में बुनियादी बदलाव आया है। पहले आपदाओं को केवल संकट आने के बाद राहत बांटने के नजरिए से देखा जाता था। अब रणनीति के तीन प्रमुख स्तंभ हैं- जोखिम न्यूनीकरण, सटीक पूर्व चेतावनी प्रणाली और शून्य हताहत का लक्ष्य। सरकार अब ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ (Whole of Government) अप्रोच पर काम कर रही है, जिसमें आपदा के समय सभी मंत्रालय और एजेंसियां एक साथ मिलकर कार्रवाई करती हैं।
NIDM की बैठक में अमित शाह के प्रमुख निर्देश
गृह मंत्री ने आपदा प्रबंधन की तैयारी को बेहतर करने के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश जारी किए:
- विभागीय सेल का गठन: सभी हितधारक विभाग अपने यहां एक विशेष सेल गठित करें। विभागाध्यक्ष हर तीन महीने में कम से कम एक बार इसकी समीक्षा बैठक आयोजित करेंगे।
- टिड्डी दल के हमलों से सुरक्षा: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को पाकिस्तान की तरफ से आने वाले टिड्डी दलों (Locust Swarm Attacks) के हमलों से बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर स्थायी तैयारी करने के निर्देश दिए गए।
- संयुक्त जांच टीम: प्रत्येक बड़ी आपदा के बाद NDMA, NIDM, NDRF और SDRF की एक संयुक्त टीम का गठन किया जाएगा। यह टीम नुकसान के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
- दिशानिर्देश जारी करना: NIDM और NDMA मिलकर प्रत्येक संभावित संकट के लिए ‘क्या करें और क्या न करें’ के स्पष्ट मानक दिशानिर्देश जारी करेंगे, जिन्हें NDRF और SDRF धरातल पर लागू करेंगे।
- वार्षिक समीक्षा: NIDM की कम से कम एक शीर्ष स्तरीय बैठक हर वर्ष आयोजित करना अनिवार्य किया गया है ताकि फैसलों का नियमित फॉलो-अप हो सके।
आपदा प्रबंधन के बजट में भारी बढ़ोतरी और कानूनी सुधार
गृह मंत्री ने वित्तीय आंकड़ों का ब्योरा देते हुए बताया कि आपदा कोष के वितरण को पूरी तरह वैज्ञानिक बना दिया गया है। राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के आवंटन में लगभग चार गुना और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) में लगभग तीन गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बीते 11 वर्षों में इस पूरे तंत्र पर लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये व्यय हुए हैं।
इसके साथ ही 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आपदा प्रबंधन अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। शहरी क्षेत्रों की चुनौतियों को देखते हुए शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना की गई है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर एक एकीकृत डिजिटल आपदा डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। संकट की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने वाली संस्था राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) को अब वैधानिक दर्जा प्रदान कर दिया गया है। 16वें वित्त आयोग ने इस कार्य अवधि के लिए दो लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया है।
NIDM का इतिहास और आधुनिक स्वरूप
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के विकास क्रम पर प्रकाश डालते हुए गृह मंत्री ने कहा कि एक समय था जब यह संस्थान कृषि भवन के एक छोटे से कोने में लगभग निष्क्रिय पड़ा हुआ था। वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे पुनर्गठित कर गृह मंत्रालय के अंतर्गत लाने का फैसला किया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे नई दिशा दी।
हाल ही में सरकार ने NIDM के विस्तार के लिए चार एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटित की है। वर्तमान में इसके दो परिसर सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। संस्थान को अनुसंधान, नवाचार, नीति समर्थन और प्रशिक्षण के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर अनुसंधान और अध्ययन के निष्कर्षों को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
आपदा-रोधी गांव और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
अमित शाह ने बल देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाना स्वागत योग्य है, लेकिन देश की प्राथमिकता 5 लाख गांवों को सुरक्षित बनाना है। आपदाओं का स्थायी समाधान पर्यावरण संरक्षण में ही निहित है। भारत द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन लाइफ’ (LiFE), प्रो-प्लैनेट पीपल और इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) जैसे वैश्विक अभियान पर्यावरण संतुलन और आपदा रोकथाम में सीधी भूमिका निभा रहे हैं।
बैठक में यह भी तय किया गया कि आपदा सुरक्षा से जुड़ी मोबाइल एप्लीकेशन का प्रचार प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों के माध्यम से किया जाएगा। इससे युवा पीढ़ी में शुरुआती स्तर से ही जागरूकता पैदा की जा सकेगी।
यह भी जानें: NDMA, NIDM और NDRF का कार्य विभाजन
भारत में संकट प्रबंधन की व्यवस्था तीन मुख्य संस्थाओं के समन्वय पर टिकी हुई है। NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) शीर्ष नीति निर्माता निकाय है जो नीतियां और व्यापक दिशानिर्देश तय करता है। NIDM (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान) का काम प्रशिक्षण देना, आंकड़े जुटाना, नीतिगत शोध करना और क्षमता निर्माण करना है। वहीं NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) जमीन पर उतरकर राहत और बचाव कार्य चलाने वाली मुख्य त्वरित प्रतिक्रिया फोर्स है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? NIDM की बैठक की अध्यक्षता किसने की और इसमें क्या फैसला हुआ?
उत्तर। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की। इसमें 5 लाख गांवों को आपदा-रोधी बनाने, टिड्डी हमलों की स्थायी तैयारी करने और हर आपदा के बाद संयुक्त अध्ययन टीम बनाने का निर्णय लिया गया।
प्रश्न? पिछले 11 सालों में आपदा प्रबंधन पर कितना पैसा खर्च हुआ है?
उत्तर। गृह मंत्रालय के अनुसार पिछले 11 वर्षों में इस क्षेत्र में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें SDRF बजट 4 गुना और NDRF बजट 3 गुना बढ़ा है।
प्रश्न? आपदा प्रबंधन अधिनियम में क्या मुख्य बदलाव हुए हैं?
उत्तर। 20 साल बाद अधिनियम में संशोधन कर शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया है और NCMC को वैधानिक दर्जा दिया गया है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






