
भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस सुदर्शनी लोकायन 2026 के तहत 17,400 समुद्री मील की यात्रा तय कर इटली पहुंचा, इतालवी नौसेना के साथ संयुक्त अभ्यास संपन्न।
मुख्य बातें
- आईएनएस सुदर्शनी 9 सितंबर 2026 को इटली के लिवोर्नो बंदरगाह पर पहुंचा।
- अभियान के दौरान 10 देशों में 17,400 समुद्री मील से अधिक की दूरी तय की गई।
- भूमध्य सागर में इतालवी नौसैनिक पोत आईटीएस पालिनुरो के साथ मार्ग अभ्यास किया गया।
- लिवोर्नो में इतालवी नौसेना अकादमी के कैडेटों के साथ क्रॉस-डेक संवाद आयोजित किया जाएगा।
लोकायन 2026 ट्रांसोसेनिक अभियान के तहत भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शनी 9 सितंबर 2026 को इटली के लिवोर्नो बंदरगाह पर पहुंचा। इस लंबी समुद्री यात्रा के दौरान पोत ने अब तक 10 देशों का दौरा करते हुए 17,400 समुद्री मील से अधिक की विशाल दूरी तय की है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, यह यात्रा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।
लोकायन 2026 अभियान के तहत आईएनएस सुदर्शनी इटली क्यों पहुंचा है?
लोकायन 2026 अभियान के तहत भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शनी 9 सितंबर 2026 को इटली के लिवोर्नो बंदरगाह पर पहुंचा। इस ट्रांसोसेनिक यात्रा का उद्देश्य भारत की समुद्री परंपराओं को बढ़ावा देना और मित्र देशों के साथ द्विपक्षीय नौसैनिक संबंधों को मजबूत करना है। पोत ने अब तक 10 देशों में 17,400 समुद्री मील से अधिक की दूरी तय की है।
लोकायन 2026: भूमध्य सागर में इतालवी नौसेना के साथ मार्ग अभ्यास
लिवोर्नो बंदरगाह पर प्रवेश करने से पहले आईएनएस सुदर्शनी ने भूमध्य सागर में इतालवी नौसेना के नौकायन प्रशिक्षण पोत आईटीएस पालिनुरो (ITS Palinuro) के साथ एक विशेष मार्ग अभ्यास (Passage Exercise) संपन्न किया। इस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास के दौरान दोनों जहाजों के क्रू ने बेहतरीन तालमेल के साथ पाल-संचालन और कठिन समन्वित पैंतरेबाजी का प्रदर्शन किया।
इस अभ्यास ने दोनों देशों की नौसेनाओं के नौकायन विशेषज्ञों और प्रशिक्षुओं को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर दिया। आधुनिक युद्धपोतों के दौर में पारंपरिक पाल वाले जहाजों को नियंत्रित करना अत्यधिक शारीरिक सहनशक्ति और तकनीकी दक्षता की मांग करता है। इस संयुक्त अभ्यास से दोनों देशों के नाविकों के बीच पेशेवर समझ और गहरा तालमेल विकसित हुआ है।
लिवोर्नो में इतालवी कैडेट्स के साथ बातचीत और गतिविधियां
इटली का लिवोर्नो शहर रणनीतिक और ऐतिहासिक रूप से इतालवी नौसेना के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां प्रतिष्ठित इतालवी नौसेना अकादमी (Accademia Navale) स्थित है। आईएनएस सुदर्शनी के लिवोर्नो पहुंचने पर दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर व सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
बंदरगाह पर प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं और इतालवी नौसेना के कैडेटों के बीच क्रॉस-डेक मुलाकातें आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा, आईएनएस सुदर्शनी को स्थानीय आगंतुकों और इतालवी नागरिकों के अवलोकन के लिए भी खोला जाएगा। इस प्रकार के संवाद से दोनों देशों की भावी नौसैनिक कमान के बीच व्यक्तिगत और रणनीतिक संबंध मजबूत होते हैं।
10 देशों में 17 हजार समुद्री मील से अधिक की दूरी तय की
भारतीय नौसेना के लोकायन 2026 अभियान ने वैश्विक स्तर पर भारत के समुद्री प्रभाव और उपस्थिति को दर्शाया है। इस ट्रांसोसेनिक अभियान के दौरान पोत ने कई महाद्वीपों और महासागरों को पार करते हुए 17,400 समुद्री मील की यात्रा पूरी की है।
- कुल तय की गई दूरी: 17,400 समुद्री मील (Nautical Miles) से अधिक।
- दौरा किए गए देश: यूरोप और एशिया के 10 से अधिक मित्र देश।
- प्रमुख अभ्यास: भूमध्य सागर में इतालवी पोत आईटीएस पालिनुरो के साथ मार्ग अभ्यास।
- मेजबान शहर: लिवोर्नो, इटली (इतालवी नौसेना अकादमी का केंद्र)।
- मुख्य उद्देश्य: अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग और युवा कैडेटों का कठोर प्रशिक्षण।
महासागर (MAHASAGAR) विजन और लोकायन 2026 का वैश्विक संदेश
नौसेना का यह अभियान भारत सरकार के ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विजन के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है। महासागर का पूर्ण रूप ‘क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति’ (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth across the Regions) है। यह विजन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में शांति, सुरक्षा, समावेशी विकास और खुले समुद्री मार्गों का समर्थन करता है।
लोकायन 2026 के माध्यम से भारतीय नौसेना केवल सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि ‘सॉफ्ट पावर’ और समुद्री कूटनीति का भी प्रदर्शन कर रही है। मित्र देशों के बंदरगाहों पर भारतीय पोत की मौजूदगी भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के दर्शन को वैश्विक महासागरों तक पहुंचाती है।
आईएनएस सुदर्शनी और नौकायन प्रशिक्षण की ऐतिहासिक भूमिका
आईएनएस सुदर्शनी (INS Sudarshini) भारतीय नौसेना का एक तीन मस्तूलों वाला पारंपरिक नौकायन प्रशिक्षण जहाज (3-masted sail training ship) है। इसे गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित किया गया था और 2012 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह जहाज आईएनएस तरंगिणी की तर्ज पर बनाया गया दूसरा पोत है।
तकनीकी रूप से उन्नत आधुनिक युद्धपोतों के युग में भी पाल वाले जहाजों पर प्रशिक्षण देना नौसेना की परंपरा का अहम हिस्सा है। हवा के रुख को समझकर केवल पाल के सहारे विशाल समुद्र को पार करना प्रशिक्षुओं में अनुशासन, धैर्य, टीम वर्क और समुद्र विज्ञान का जमीनी ज्ञान भरता है। जब नए कैडेट्स इन चुनौतियों का सामना करते हैं, तो उनकी निर्णय क्षमता और नौसंचालन कौशल में निखार आता है।
समुद्री कूटनीति में लोकायन अभियानों का महत्व
भारतीय नौसेना समय-समय पर ‘लोकायन’ अभियानों का आयोजन करती रही है। इन अभियानों का प्राथमिक लक्ष्य युवा अधिकारियों को विश्व भ्रमण का अनुभव देना और विदेशी नौसेनाओं के साथ दोस्ताना संबंध स्थापित करना है।
भूमध्य सागर जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलक्षेत्र में भारतीय पोत का पहुंचना भारत की विस्तारित समुद्री पहुंच को रेखांकित करता है। यह यात्रा न केवल भारतीय कैडेटों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक समुदाय में भारत की विश्वसनीयता और सम्मान को भी सुदृढ़ करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? आईएनएस सुदर्शनी इटली के किस बंदरगाह पर पहुंचा है?
उत्तर: आईएनएस सुदर्शनी 9 सितंबर 2026 को इटली के लिवोर्नो बंदरगाह पर पहुंचा है, जो इतालवी नौसेना अकादमी का प्रमुख केंद्र है।
प्रश्न? लोकायन 2026 अभियान के तहत पोत ने कितनी दूरी तय की है?
उत्तर: इस अभियान के तहत पोत ने 10 देशों की यात्रा करते हुए 17,400 समुद्री मील से अधिक की दूरी तय की है।
प्रश्न? महासागर (MAHASAGAR) विजन का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: महासागर विजन का पूरा नाम ‘क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति’ है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






