
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के महानिदेशक ने मुलाकात की है, जिसमें आगरा के क्षेत्रीय केंद्र और उन्नत कृषि तकनीकों पर चर्चा हुई।
मुख्य बातें
- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से 07 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में CIP के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक ने मुलाकात की।
- उत्तर प्रदेश के आगरा में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (सीसार्क) स्थापित किया जा रहा है।
- बैठक में ICAR और CIP के बीच कार्यों के विभाजन और संसाधनों के सही उपयोग पर जोर दिया गया।
- आयरन, जिंक और विटामिन-ए से भरपूर ‘ऑरेंज-फ्लेश्ड’ शकरकंद को आधुनिक सुपरफूड के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा।
आलू अनुसंधान के क्षेत्र में भारत तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर कदम बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश कृषि अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा और पोषण के मामलों में लगातार आगे आ रहा है। इसी सिलसिले में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की। यह बैठक 07 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित की गई थी। इस उच्चस्तरीय बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
आलू अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा, आगरा में बनेगा केंद्र
आलू अनुसंधान को नई ऊंचाइयां देने के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (सीसार्क) की स्थापना की जा रही है। बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट और सीसार्क के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। चर्चा का मुख्य केंद्र आगरा स्थित इस नए संस्थान की प्रगति, आधुनिक ब्रीडिंग तकनीकों और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े रणनीतिक मुद्दे रहे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत का विजन केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि देश वैश्विक आबादी के हित में काम करना चाहता है।
आलू अनुसंधान में संसाधनों की बर्बादी रोकने पर जोर
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि ICAR और CIP के कार्यों में किसी भी तरह का दोहराव नहीं होना चाहिए। आलू अनुसंधान कार्यों को बेहतर बनाने के लिए दोनों संस्थाओं के बीच काम का स्पष्ट विभाजन होना आवश्यक है ताकि संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि आगरा केंद्र के माध्यम से देश में वैश्विक स्तर का उन्नत जर्मप्लाज्म लाया जाना चाहिए। इससे स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुकूल नई किस्में विकसित होंगी और देश के किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा।
CIP के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक ने कृषि मंत्री को आश्वस्त किया कि आगरा में बन रहा सीसार्क केंद्र भारत के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश और भूटान जैसे दक्षिण एशिया के देशों के लिए मुख्य वैज्ञानिक मंच बनेगा। यह केंद्र हाइब्रिड आलू तकनीक, बायोफोर्टिफाइड फसलों और जलवायु-सहिष्णु किस्मों को भारतीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ेगा। इससे बीज उत्पादन प्रणाली में तेजी आएगी और निजी निवेशकों का रुझान भी बढ़ेगा।
शकरकंद के पोषण और आर्थिक महत्व पर मंथन
बैठक में केवल आलू ही नहीं बल्कि शकरकंद (स्वीट पोटैटो) के पोषण और आर्थिक पहलुओं पर भी गंभीर चर्चा की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आयरन, जिंक और विटामिन-ए से भरपूर ‘ऑरेंज-फ्लेश्ड’ बायोफोर्टिफाइड शकरकंद की उन्नत किस्मों को भारतीय किसानों तक पहुंचाया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि शकरकंद को पारंपरिक सोच से निकालकर एक आधुनिक ‘सुपरफूड’ के रूप में ब्रांडेड करने की जरूरत है। इससे शहरी और ग्रामीण बाजारों में इसकी मांग बढ़ेगी और छोटे किसानों की आमदनी में इजाफा होगा।
- आगरा में स्थापित हो रहा है दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र सीसार्क।
- ICAR और CIP मिलकर करेंगे हाइब्रिड आलू तकनीक पर काम।
- विटामिन-ए और आयरन से भरपूर शकरकंद को मिलेगा बढ़ावा।
- बैठक में कृषि मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कई अधिकारी रहे मौजूद।
कृषि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ समन्वय का बहुत बड़ा महत्व है। जब वैश्विक तकनीक स्थानीय कृषि प्रणाली से जुड़ती है, तो किसानों को ऐसी किस्में मिलती हैं जो कीट-प्रकोप और जलवायु परिवर्तन का सामना कर सकें। आलू और शकरकंद जैसी फसलें भारत के छोटे और सीमांत किसानों के लिए पोषण और आय दोनों का बड़ा जरिया हैं। आने वाले समय में आगरा केंद्र इन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। सरकार का यह कदम देश को कृषि तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करने में भी मदद करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के महानिदेशक से मिलने वाले केंद्रीय मंत्री कौन हैं? उत्तर। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान।
प्रश्न? दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (सीसार्क) की स्थापना कहाँ की जा रही है? उत्तर। उत्तर प्रदेश के आगरा में।
प्रश्न? बैठक में किस शकरकंद की किस्मों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है? उत्तर। आयरन, जिंक और विटामिन-ए से भरपूर ‘ऑरेंज-फ्लेश्ड’ बायोफोर्टिफाइड शकरकंद।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






