
नीति आयोग के 5वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए पीएसीटी और ज़ेडईटी मार्केटप्लेस का शुभारंभ किया गया।
मुख्य बातें
- नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने 5वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन 2026 में पीएसीटी और ज़ेडईटी मार्केटप्लेस लॉन्च किया।
- देश में इलेक्ट्रिक माल ढुलाई वाहनों की संख्या वित्त वर्ष 2025 में 201 से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 826 हो गई।
- वर्तमान में भारत भर में 3,000 से अधिक इलेक्ट्रिक मध्यम और भारी-शुल्क वाले ट्रक (e-MHD) परिचालन में हैं।
- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर और उद्योग जगत के लगभग 250 प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लिया।
नीति आयोग द्वारा संचालित ई-फास्ट इंडिया मंच के 5वें शिखर सम्मेलन 2026 में देश के माल ढुलाई क्षेत्र को शून्य-उत्सर्जन की ओर ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों की घोषणा की गई। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने इस शिखर सम्मेलन में पीएसीटी (PACT) और ज़ेडईटी (ZET) मार्केटप्लेस का औपचारिक शुभारंभ किया। पीआईबी के अनुसार, इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मध्यम और भारी-शुल्क वाले इलेक्ट्रिक ट्रकों के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देना और देश के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को अधिक मजबूत बनाना है। इस कार्यक्रम में सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत के लगभग 250 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
ई-फास्ट इंडिया पहल के तहत पीएसीटी का उद्देश्य क्या है?
नीति आयोग की ई-फास्ट इंडिया पहल के तहत शुरू किया गया पीएसीटी मंच माल ढुलाई क्षेत्र में शून्य-उत्सर्जन ट्रकों के व्यावसायिक उपयोग को मजबूत करता है। यह मंच शिपर्स, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं, वाहन निर्माताओं और फाइनेंसरों को एक साथ लाकर चिन्हित कॉरिडोर में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना को बेहतर बनाता है।
पीएसीटी की मदद से देश भर में माल ढुलाई इकोसिस्टम के विभिन्न हितधारकों के बीच निरंतर संपर्क स्थापित किया जाएगा। इससे इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने में आने वाली शुरुआती बाधाओं को दूर करने और निवेश के लिए स्पष्ट वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।
ई-फास्ट इंडिया और देश में ई-ट्रक बाजार का तेजी से विस्तार
भारत में इलेक्ट्रिक माल ढुलाई बाजार हाल के वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। पीआईबी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ई-फ्रेट वाहनों के उपयोग में चार गुना से अधिक की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025 में जहां केवल 201 ई-फ्रेट वाहन पंजीकृत थे, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 826 तक पहुंच गई। वर्तमान में देश भर की सड़कों पर 3,000 से अधिक इलेक्ट्रिक मध्यम और भारी-शुल्क वाले ट्रक सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।
इस गति को बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे और वित्तपोषण के नए तरीकों की आवश्यकता है। ई-फास्ट इंडिया के माध्यम से नीति आयोग का लक्ष्य मांग को एकजुट करना, चार्जिंग कॉरिडोर विकसित करना और बेड़ा संचालकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। शिखर सम्मेलन के दौरान नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि भारत ने घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण क्षमता में बड़ी प्रगति की है। उन्होंने जोर दिया कि विकास का अगला चरण सभी हितधारकों के बीच आपसी सहयोग पर निर्भर करेगा।
ज़ेडईटी मार्केटप्लेस और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में साझेदारियां
5वें ई-फास्ट इंडिया सम्मेलन में ज़ेडईटी (ZET) मार्केटप्लेस की शुरुआत की गई, जो मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs), लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं, चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटरों और वित्तीय कंपनियों को जोड़ने वाले एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा। इस मार्केटप्लेस की मदद से उद्योग जगत के प्रतिनिधि अपनी तकनीकों का प्रदर्शन कर सकते हैं और माल ढुलाई परियोजनाओं को योजना के स्तर से वास्तविक कार्यान्वयन तक ले जा सकते हैं।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने सम्मेलन में बताया कि इलेक्ट्रिक माल ढुलाई को गति देने के लिए लॉजिस्टिक्स संचालन और बैटरी प्रबंधन में नवाचार बहुत जरूरी हैं। उन्नत बैटरी निगरानी प्रणाली और बेहतर परिचालन मॉडल के जरिए वाहनों का पुनर्विक्रय मूल्य बेहतर होगा, जिससे वित्तीय जोखिम कम होंगे और इस क्षेत्र में अधिक निजी निवेश आकर्षित होगा।
भारत में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई का महत्व
भारत की अर्थव्यवस्था में माल ढुलाई का बड़ा योगदान है, लेकिन भारी डीजल ट्रक वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन का एक बड़ा कारण भी बनते हैं। ऐसे में ई-फास्ट इंडिया जैसी राष्ट्रीय पहल देश के परिवहन क्षेत्र को स्वच्छ और टिकाऊ बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाती है। माल ढुलाई के विद्युतीकरण से देश की आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में भी गिरावट आएगी।
स्वच्छ परिवहन भविष्य को साकार करने के लिए अब केवल प्रायोगिक या पायलट परियोजनाओं तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। ई-फास्ट इंडिया मंच का उद्देश्य अब व्यापक स्तर पर व्यावहारिक और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य कार्यान्वयन को सक्षम बनाना है। गलियारा-आधारित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करके लंबे मार्गों पर भी इलेक्ट्रिक ट्रकों का सुगम संचालन संभव बनाया जा रहा है।
ई-फास्ट इंडिया और नीति आयोग की रणनीति
नीति आयोग भारत सरकार का शीर्ष सार्वजनिक नीति विचार मंच है, जो देश के आर्थिक विकास और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने का काम करता है। नीति आयोग के नेतृत्व में संचालित ई-फास्ट इंडिया मंच सार्वजनिक और निजी हितधारकों को एक मंच पर लाता है। इसके तहत निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है:
- मांग का एकत्रीकरण: देश के प्रमुख फ्रेट कॉरिडोर में इलेक्ट्रिक ट्रकों की स्पष्ट मांग पैदा करना।
- वित्तीय जोखिमों में कमी: बैंकों और वित्तीय संस्थानों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करना।
- चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार: राष्ट्रीय राजमार्गों पर उच्च क्षमता वाले चार्जिंग प्वाइंट विकसित करना।
- नीतिगत प्रोत्साहन: केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों के बीच सामंजस्य बिठाकर उद्योग को स्पष्टता देना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? ई-फास्ट इंडिया क्या है?
उत्तर। ई-फास्ट इंडिया नीति आयोग द्वारा संचालित एक राष्ट्रीय मंच है, जो भारत में मध्यम और भारी-शुल्क वाले वाहनों में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए सरकार और उद्योग के हितधारकों को एक साथ लाता है।
प्रश्न? पीएसीटी (PACT) पहल का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर। पीएसीटी पहल लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के हितधारकों के साथ संपर्क बनाकर इलेक्ट्रिक ट्रकों की मांग स्पष्ट करती है और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना में सहायता प्रदान करती है।
प्रश्न? भारत में वर्तमान में कितने इलेक्ट्रिक मध्यम और भारी ट्रक चल रहे हैं?
उत्तर। पीआईबी के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देश भर में 3,000 से अधिक इलेक्ट्रिक मध्यम और भारी-शुल्क ट्रक (e-MHD) परिचालन में हैं।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






