
भारतीय रिज़र्व बैंक ने नासिक जिला महिला विकास सहकारी बैंक पर लागू पाबंदियों की अवधि 9 दिसंबर 2026 तक बढ़ाने का फैसला किया है।
मुख्य बातें
- भारतीय रिज़र्व बैंक ने नासिक महिला बैंक पर लगी पाबंदियों को 3 महीने के लिए बढ़ाया।
- बैंक पर लागू प्रतिबंध अब 9 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 9 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे।
- यह कार्रवाई बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 35ए और धारा 56 के तहत की गई है।
- आरबीआई ने स्पष्ट किया कि पाबंदी बढ़ाने का मतलब बैंक की वित्तीय स्थिति को मंजूरी देना नहीं है।
- प्रेस विज्ञप्ति मुख्य महाप्रबंधक बृज राज की ओर से 7 सितंबर 2026 को जारी की गई।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने नासिक महिला बैंक यानी नासिक जिला महिला विकास सहकारी बैंक लिमिटेड पर लागू बैंकिंग पाबंदियों की अवधि तीन महीने के लिए और बढ़ा दी है। केंद्रीय बैंक की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ये प्रतिबंध अब 9 दिसंबर 2026 को कारोबार की समाप्ति तक लागू रहेंगे। रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
नासिक महिला बैंक पर आरबीआई ने क्या नया फैसला लिया है?
भारतीय रिज़र्व बैंक ने नासिक महिला बैंक पर लगाए गए प्रतिबंधों की अवधि को बढ़ाकर 9 दिसंबर 2026 तक कर दिया है। यह फैसला बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 35ए के तहत जनहित में लिया गया है। इससे पहले ये प्रतिबंध 9 सितंबर 2026 तक लागू थे, जिन्हें समीक्षा के बाद अगले तीन महीनों के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।
नासिक महिला बैंक पर लगे प्रतिबंधों की पूरी समयरेखा
नासिक महिला बैंक के खिलाफ रिज़र्व बैंक ने सबसे पहले 8 दिसंबर 2025 को निर्देश जारी किया था। उस समय बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 35ए और धारा 56 का प्रयोग करते हुए छह महीने के लिए प्रतिबंध लगाए गए थे। ये शुरुआती निर्देश 9 जून 2026 को कारोबार बंद होने तक लागू रहने थे।
इसके बाद स्थिति की समीक्षा करते हुए रिज़र्व बैंक ने 2 जून 2026 को नया आदेश जारी किया। इस आदेश के जरिए पाबंदियों की समय-सीमा 9 सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई थी। अब 7 सितंबर 2026 को जारी ताज़ा प्रेस विज्ञप्ति में मुख्य महाप्रबंधक बृज राज ने जानकारी दी कि जनहित में इन निर्देशों की अवधि को 9 सितंबर 2026 से आगे बढ़ाकर 9 दिसंबर 2026 तक करने का निर्णय लिया गया है।
बैंकिंग विनियमन अधिनियम की धारा 35ए क्या प्रावधान करती है?
भारतीय रिज़र्व बैंक किसी भी सहकारी या वाणिज्यिक बैंक के कामकाज पर नियंत्रण रखने के लिए बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 35ए का इस्तेमाल करता है। जब किसी बैंक का वित्तीय प्रबंधन खराब होता है या जमाकर्ताओं के पैसों पर जोखिम उत्पन्न होता है, तब इस धारा के तहत विशेष दिशा-निर्देश लागू किए जाते हैं।
धारा 56 के साथ पढ़ने पर ये शक्तियां प्राथमिक और शहरी सहकारी बैंकों पर भी लागू होती हैं। इन प्रतिबंधों के लागू होने के बाद संबंधित बैंक नए ऋण जारी करने, निवेश करने, नई देनदारियां स्वीकार करने या अपनी किसी संपत्ति को बेचने अथवा हस्तांतरित करने से पहले रिज़र्व बैंक की लिखित अनुमति लेने के लिए बाध्य होता है। इसके अलावा जमाकर्ताओं के लिए खाता निकासी की सीमा तय की जाती है ताकि बैंक में मौजूद नकदी का दुरुपयोग न हो।
नासिक महिला बैंक के ग्राहकों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
आरबीआई के इस फैसले से नासिक महिला बैंक के मौजूदा निर्देशों की बाकी शर्तें और नियम पूरी तरह अपरिवर्तित रहेंगे। इसका मतलब है कि बैंक के परिचालन पर पहले से लागू पाबंदियां जारी रहेंगी। जमाकर्ताओं और ग्राहकों को बैंकिंग गतिविधियों में दी गई सीमा का पालन करना होगा।
केंद्रीय बैंक ने विज्ञप्ति में स्पष्ट तौर पर कहा है कि पाबंदियों की अवधि बढ़ाने या संशोधित करने का यह अर्थ बिल्कुल न निकाला जाए कि रिज़र्व बैंक संस्थान की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है। यह केवल बैंक के वित्तीय पुनर्गठन और जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए उठाया गया एक प्रशासनिक कदम है। आने वाले समय में स्थिति की फिर से समीक्षा की जाएगी।
सहकारी बैंकों में आरबीआई की निगरानी और जमा बीमा सुरक्षा
भारत में शहरी सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए रिज़र्व बैंक लगातार कड़े कदम उठाता रहा है। सहकारी बैंकों में वित्तीय अनियमितताओं या पूंजी पर्याप्तता अनुपात घटने पर इस तरह के दंडात्मक व निरोधात्मक निर्देश दिए जाते हैं।
यदि किसी सहकारी बैंक की स्थिति बिगड़ती है, तो जमाकर्ताओं को जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम (DICGC) के तहत सुरक्षा मिलती है। नियमानुसार, प्रत्येक जमाकर्ता की 5 लाख रुपये तक की जमा राशि (मूलधन और ब्याज मिलाकर) बीमा के तहत सुरक्षित होती है। नासिक महिला बैंक के मामले में भी रिज़र्व बैंक की प्राथमिकता जमाकर्ताओं के पैसों को सुरक्षित रखना ही है।
नासिक महिला बैंक से जुड़े मुख्य बिंदु
- बैंक का नाम: नासिक जिला महिला विकास सहकारी बैंक लिमिटेड, नासिक
- विज्ञप्ति तिथि: 7 सितंबर 2026 (जारीकर्ता: मुख्य महाप्रबंधक बृज राज)
- कानूनी प्रावधान: बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए और धारा 56
- नई समय-सीमा: 9 दिसंबर 2026 (कारोबार की समाप्ति तक)
- पूर्व विस्तार तिथि: 9 सितंबर 2026 तक (2 जून 2026 के आदेश द्वारा)
- मूल आदेश तिथि: 8 दिसंबर 2025 (6 महीने की शुरुआती अवधि)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: नासिक महिला बैंक पर आरबीआई के प्रतिबंध कब तक लागू रहेंगे?
उत्तर: भारतीय रिज़र्व बैंक के नवीनतम निर्देश के अनुसार नासिक महिला बैंक पर प्रतिबंध 9 दिसंबर 2026 को कारोबार बंद होने तक लागू रहेंगे।
प्रश्न 2: क्या आरबीआई ने नासिक महिला बैंक की वित्तीय स्थिति को ठीक माना है?
उत्तर: नहीं, रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधों की अवधि बढ़ाने का मतलब यह नहीं है कि आरबीआई बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है। यह निर्णय केवल जनहित और जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए लिया गया है।
प्रश्न 3: किस कानून के तहत यह कार्रवाई की गई है?
उत्तर: यह कार्रवाई बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए और धारा 56 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






