
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का लेख साझा किया, जिसमें अध्यापन को मानवता को दिशा देने वाला पवित्र कार्य बताया गया है।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का लेख एक्स (X) पर साझा किया।
- लेख में शिक्षण कार्य को मानवता को आकार देने वाला और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने वाला पवित्र कार्य बताया गया।
- राष्ट्रपति ने शिक्षकों से विद्यार्थियों में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’, अंत्योदय और पर्यावरण संरक्षण के मूल्य भरने का आह्वान किया।
- विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान जगाने पर बल दिया गया।
शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का एक विशेष लेख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया है। इस लेख में राष्ट्रपति ने अध्यापन को केवल एक व्यवसाय न मानकर मानव समाज को गढ़ने वाला एक पवित्र कार्य करार दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति ने लिखा कि शिक्षक बच्चों के भीतर ज्ञान, कौशल, नैतिक मूल्य और प्रेरणा भरकर उनके भविष्य की मजबूत नीव तैयार करते हैं।
शिक्षक दिवस 2026 पर राष्ट्रपति का संदेश
शिक्षक दिवस 2026 पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के लेख को साझा करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने शिक्षकों के योगदान को रेखांकित किया। राष्ट्रपति के अनुसार शिक्षक विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच और जिज्ञासा को बढ़ाते हैं। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को राष्ट्र सर्वोपरि की भावना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने लेख में स्पष्ट किया है कि एक शिक्षक का कार्य केवल पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन कराना नहीं है। उनका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर छिपा ज्ञान उजागर करना है। जब कोई शिक्षक अपनी कक्षा में पढ़ाता है, तो वह केवल सूचनाएं नहीं देता, बल्कि समाज का बौद्धिक ढांचा निर्मित करता है।
शिक्षक दिवस 2026: मानवता और स्वतंत्र सोच का निर्माण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किए गए राष्ट्रपति के विचारों में इस बात पर जोर दिया गया है कि शिक्षण कार्य में स्वतंत्रता और जिज्ञासा का पोषण सबसे ऊपर होना चाहिए। राष्ट्रपति मुर्मु का मानना है कि जब तक बच्चों को प्रश्न पूछने और अपने विचार व्यक्त करने की आजादी नहीं मिलेगी, तब तक उनका सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कुछ मुख्य आदर्शों और सिद्धांतों को रेखांकित किया है, जिन्हें हर विद्यार्थी के जीवन में उतारा जाना चाहिए:
- सांस्कृतिक विरासत का सम्मान: विद्यार्थियों को देश की समृद्ध संस्कृति और इतिहास से जुड़कर उस पर गर्व करना सिखाया जाए।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: तार्किक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहन देना अध्यापन का मुख्य उद्देश्य हो।
- अंत्योदय का आदर्श: समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण की भावना बच्चों के मन में बैठाना आवश्यक है।
- पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना जागृत करना वर्तमान समय की प्राथमिक आवश्यकता है।
- राष्ट्र सर्वोपरि का भाव: देशहित को प्राथमिकता देकर काम करने की प्रेरणा देना शिक्षकों का मूल दायित्व है।
शिक्षकों का दायित्व और चरित्र निर्माण की राह
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश के सभी शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे विद्यार्थियों को अच्छे इंसान बनाने की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि ज्ञान और कौशल से लैस होना आवश्यक है, लेकिन यदि व्यक्ति के भीतर मानवीय संवेदनाएं नहीं हैं, तो शिक्षा अधूरी रह जाती है। शिक्षक ही वह धुरी हैं जो विद्यार्थियों में सही और गलत का अंतर करने की समझ विकसित करते हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने राष्ट्रपति के संदेश को साझा करते हुए कहा कि शिक्षक ही देश के आने वाले कल को दिशा देते हैं। शिक्षक दिवस 2026 के इस खास मौके पर राष्ट्रपति का यह लेख देश भर के शैक्षणिक समुदाय के लिए एक प्रेरणादायक मार्गदर्शक के रूप में सामने आया है।
शिक्षक दिवस 2026 का ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व
भारत में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के रूप में समर्पित है। डॉ. राधाकृष्णन का मानना था कि देश के सबसे उत्कृष्ट दिमागों को ही शिक्षक बनना चाहिए। जब वे राष्ट्रपति बने, तो उनके कुछ छात्रों और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने का अनुरोध किया। तब उन्होंने सुझाव दिया कि उनके जन्मदिन को अलग से मनाने के बजाय शिक्षकों के सम्मान में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए।
वर्ष 1962 से भारत में लगातार 5 सितंबर को यह दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन देशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह संदेश इस उत्सव के महत्व को और गहरा करता है।
भारतीय शिक्षा परंपरा और शिक्षकों की बदलती भूमिका
भारतीय परंपरा में शिक्षक को गुरु का दर्जा दिया गया है। प्राचीन काल से ही आश्रम व्यवस्था में गुरु अपने शिष्यों को केवल शास्त्र विद्या नहीं देते थे, बल्कि उन्हें जीवन जीने की कला सिखाते थे। आधुनिक युग में शिक्षा के तौर-तरीके बदले हैं, लेकिन शिक्षक की केंद्रीय भूमिका वैसी ही बनी हुई है।
अध्यापक केवल ज्ञान का स्रोत नहीं है, बल्कि वह मार्गदर्शन करने वाला प्रकाशपुंज है। नई तकनीकों के आने के बाद भी कक्षा में एक शिक्षक की उपस्थिति और उसके व्यक्तिगत जुड़ाव का स्थान कोई मशीन नहीं ले सकती। शिक्षक दिवस 2026 पर साझा किया गया यह लेख यही याद दिलाता है कि तकनीक केवल एक साधन है, जबकि मानवीय मूल्य गढ़ने का काम शिक्षक ही कर सकता है।
देश में लागू नई शिक्षा नीति भी विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच और कौशलों के विकास पर जोर देती है। इसमें शिक्षकों की भूमिका को केंद्र में रखा गया है। राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने लेख में जिन अंत्योदय और राष्ट्र सर्वोपरि के आदर्शों की बात की है, वे इसी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल आधार भी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: शिक्षक दिवस 2026 पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के लेख में मुख्य रूप से किस बात पर बल दिया गया है?
उत्तर: राष्ट्रपति के लेख में शिक्षण को मानवता गढ़ने वाला कार्य बताया गया है। इसमें शिक्षकों से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य, स्वतंत्र सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्र सर्वोपरि का भाव भरने का आह्वान किया गया है।
प्रश्न: भारत में शिक्षक दिवस किस तिथि को और किसकी स्मृति में मनाया जाता है?
उत्तर: भारत में शिक्षक दिवस प्रतिवर्ष 5 सितंबर को पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।
प्रश्न: प्रधानमंत्री कार्यालय ने राष्ट्रपति के इस संदेश को किस माध्यम से साझा किया?
उत्तर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के इस लेख के मुख्य अंशों को साझा किया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






