शुक्रवार, सितम्बर 4, 2026

ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात: 66वें एसआईएएम सम्मेलन में पीयूष गोयल का संबोधन

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ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 66वें एसआईएएम वार्षिक सम्मेलन में ऑटोमोबाइल क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होने, स्थानीयकरण बढ़ाने और निर्यात लक्ष्यों को हासिल करने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

  • भारत ने चालू वर्ष के लिए $1 ट्रिलियन का महत्वाकांक्षी निर्यात लक्ष्य रखा है, जिसमें से पिछले वर्ष $863 बिलियन दर्ज किया गया था।
  • यूके व्यापार समझौते से ऑटो कंपोनेंट्स को 100% शून्य शुल्क पहुंच मिली है, जबकि ईयू समझौता अगले साल मार्च तक लागू होगा।
  • पिछले साढ़े चार वर्षों में $60 ट्रिलियन जीडीपी कवर करने वाले 9 व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया गया है।
  • सड़क बुनियादी ढांचे में सालाना लगभग $130 बिलियन का निवेश हो रहा है और पिछले साल भारत से 10 लाख कारों का निर्यात हुआ।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात को बढ़ावा देने और स्थानीयकरण को प्रगाढ़ करने के लिए उद्योग जगत से वैश्विक स्तर पर सोचने का आह्वान किया है। नई दिल्ली में आयोजित 66वें एसआईएएम (SIAM) वार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत को केवल घरेलू बाजार तक सीमित रहने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि भारतीय विनिर्माण इकाइयों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह बनानी होगी। पीआईबी के अनुसार, सरकार द्वारा हाल के वर्षों में किए गए व्यापार समझौते और ढांचागत निवेश भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए नए रास्ते खोल रहे हैं।

ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात को बढ़ाने के लिए सरकार की क्या रणनीति है?

भारत में ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात को रफ्तार देने के लिए सरकार स्थानीयकरण, नवाचार और मुक्त व्यापार समझौतों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख वैश्विक बाजारों के साथ हुए व्यापार समझौतों से भारतीय वाहन निर्माताओं को शून्य शुल्क और बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी। इसके साथ ही ₹1 लाख करोड़ का अनुसंधान एवं विकास कोष उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुकूल उत्पाद तैयार करने में मदद करेगा।

ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात और $1 ट्रिलियन का राष्ट्रीय लक्ष्य

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात में $863 बिलियन का रिकॉर्ड स्तर हासिल किया था। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने $1 ट्रिलियन का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। मंत्री ने जानकारी दी कि वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में निर्यात में प्रति माह लगभग $9 बिलियन की वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें कई वर्षों के बाद सेवाओं की तुलना में मर्चेंडाइज निर्यात में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

वर्ष के शेष सात महीनों में लक्ष्य को पूरा करने के लिए $29 बिलियन की दूरी तय करनी है। इसके लिए वाणिज्य मंत्री ने उद्योग से मासिक निर्यात गति को बढ़ाकर $12 बिलियन प्रति माह करने की अपील की। ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात इस लक्ष्य की प्राप्ति में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है, क्योंकि भारत में हर दो साल में वाहन निर्यात को दोगुना करने की क्षमता मौजूद है।

व्यापार समझौते और ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात के नए अवसर

पीआईबी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले साढ़े चार वर्षों में नौ प्रमुख व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया गया है। ये समझौते कुल मिलाकर $60 ट्रिलियन की संयुक्त जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं।

ब्रिटेन के साथ हुआ व्यापार समझौता पहले से ही लागू है। इसके तहत भारतीय कंपनियों को अधिकांश ऑटो कंपोनेंट्स के निर्यात के लिए 100 प्रतिशत शून्य शुल्क पहुंच प्राप्त हो रही है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ के साथ बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता आगामी वर्ष में मार्च महीने तक लागू होने की संभावना है। यूरोपीय आयोग द्वारा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहे जाने वाले इस समझौते से ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं बनेंगी। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी द्विपक्षीय व्यापार समझौते में भारतीय किसानों, एमएसएमई और हथकरघा क्षेत्रों के हितों की पूर्ण सुरक्षा की गई है।

स्थानीयकरण, आरएंडडी और मोबिलिटी के 4M की अवधारणा

सम्मेलन के दौरान वाणिज्य मंत्री ने वाहन क्षेत्र में स्थानीयकरण को प्रगाढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयातित पार्ट्स पर केवल 10 से 15 प्रतिशत मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) को वास्तविक स्वदेशीकरण नहीं माना जा सकता। सरकार कंपनी-वार आयात और निर्यात डेटा की नियमित निगरानी कर रही है, ताकि स्वदेशीकरण के वास्तविक स्तर का आकलन हो सके।

भारतीय मोबिलिटी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने ‘चार एम’ (4M) का रोडमैप प्रस्तुत किया:

  • मॉलिक्यूल्स (Molecules): दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (Rare Earths), मैग्नेट्स और क्रिटिकल मिनरल मिशन के जरिए कच्चे माल की आपूर्ति सुरक्षित करना। इसके लिए भारत क्रिटिकल मिनरल्स वाले एफटीए साझेदारों से संबंध बढ़ा रहा है और समुद्री अन्वेषण को प्रोत्साहन दे रहा है।
  • मॉड्यूल्स (Modules): आयात किए जा रहे कंपोनेंट्स की समीक्षा करना तथा तकनीकी सहयोग के माध्यम से उनका निर्माण भारत में ही सुनिश्चित करना।
  • मेगावाट (Megawatts): ऊर्जा सुरक्षा में आत्मनिर्भरता हासिल करना। कच्चे तेल, एलपीजी, एलएनजी और बैटरियों के आयात पर निर्भरता घटाकर स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों को बढ़ाना।
  • मार्केट (Market): वैश्विक व्यापार समझौतों के माध्यम से ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात के लिए दुनिया भर में नए बाजारों के द्वार खोलना।

नवाचार, एआई और बुनियादी ढांचे में निवेश

ऑटो क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विनिर्माण क्षमता, कार्यकुशलता और ग्राहक सेवाओं में सुधार लाएगा। एआई के आगमन से नौकरियों की भूमिकाएं बदल सकती हैं, लेकिन कुल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। देश में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ₹1 लाख करोड़ का R&D इनोवेशन फंड तैयार किया है।

वाहन उद्योग की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए देश में राजमार्गों और सड़क ढांचे पर सालाना लगभग $130 बिलियन का निवेश किया जा रहा है। बेहतर सड़कों के निर्माण से दोपहिया और प्रीमियम वाहनों की मांग में तेज वृद्धि देखी जा रही है। पिछले वर्ष भारत से लगभग 10 लाख कारों का निर्यात किया गया था, जिसमें मारुति, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसे प्रमुख ब्रांड शामिल हैं। जापानी कंपनियों के साथ हुई हालिया बैठकों के दौरान 500 से अधिक कंपनियों ने भारत के साथ काम करने में रुचि दिखाई है, वहीं जापान को सालाना 3,00,000 कुशल मानव बल की आवश्यकता है।

परमानेंट मैग्नेट और स्वदेशी तकनीक की सफलता

वाणिज्य मंत्री ने बताया कि भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों ने परमानेंट मैग्नेट की चुनौती से निपटने में सफलता दिखाई है। भारत के एक स्टार्टअप ने ऐसी दोपहिया मोटर विकसित की है जो बिना परमानेंट मैग्नेट के काम करती है। यह मोटर अधिक सस्ती, हल्की और बेहतर प्रदर्शन देने वाली पाई गई है। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।

सरकार ने उद्योग जगत को आश्वस्त किया है कि बड़ी ऑटोमोटिव और ऑटो-कंपोनेंट परियोजनाओं के लिए प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचा और भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, उद्योग की मांग के आधार पर देश-विशिष्ट औद्योगिक पार्क स्थापित करने का विकल्प भी खुला रखा गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? 66वें एसआईएएम सम्मेलन में ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात को लेकर क्या संदेश दिया गया?
उत्तर: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय ऑटो निर्माताओं से स्थानीयकरण बढ़ाने, वैश्विक मानकों के उत्पाद बनाने और निर्यात को हर दो साल में दोगुना करने का आह्वान किया।

प्रश्न? ऑटोमोटिव उद्योग निर्यात में यूके और ईयू व्यापार समझौतों से क्या लाभ होगा?
उत्तर: यूके समझौते से अधिकांश ऑटो कंपोनेंट्स पर 100 प्रतिशत शून्य शुल्क पहुंच मिल रही है, जबकि मार्च 2027 तक लागू होने वाले ईयू समझौते से यूरोपीय बाजारों में भारतीय निर्यात को बड़ा विस्तार मिलेगा।

प्रश्न? मोबिलिटी के ‘4M’ से सरकार का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: मोबिलिटी के 4M का अर्थ मॉलिक्यूल्स (दुर्लभ खनिज), मॉड्यूल्स (कंपोनेंट्स विनिर्माण), मेगावाट (ऊर्जा आत्मनिर्भरता) और मार्केट (वैश्विक बाजार पहुंच) से है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका में समाचार एवं व्यापार संपादक हैं। वे अर्थव्यवस्था, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), बैंकिंग, शेयर बाजार, सरकारी योजनाओं, रोज़गार और भर्ती से जुड़ी खबरों तथा पाठकों के काम आने वाली व्यावहारिक जानकारी (कैसे करें/स्टेप-बाय-स्टेप गाइड) की रिपोर्टिंग और संपादन करते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि हर आँकड़ा, तिथि और प्रक्रिया आधिकारिक स्रोत से सत्यापित हो और लेख में मूल विज्ञप्ति या पोर्टल का लिंक दिया जाए। किसी गलती की सूचना के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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