
भारतीय रिज़र्व बैंक ने केवाईसी और क्रेडिट इंफॉर्मेशन रिपोर्टिंग नियमों के उल्लंघन के लिए पुणे के जय भवानी सहकारी बैंक पर 2.03 लाख रुपये की मौद्रिक पेनल्टी लगाई है।
मुख्य बातें
- पुणे स्थित जय भवानी सहकारी बैंक लिमिटेड पर 2.03 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया गया।
- यह पेनल्टी 28 अगस्त 2026 के आदेश द्वारा रिज़र्व बैंक द्वारा जारी की गई।
- बैंक ने उधारकर्ताओं की क्रेडिट जानकारी सभी सीआईसी (CICs) को साझा नहीं की थी।
- केवाईसी के तहत खातों की जोखिम श्रेणी (Risk Categorization) की समीक्षा समय पर नहीं की गई।
- आरबीआई ने स्पष्ट किया कि ग्राहकों के लेनदेन या समझौतों की वैधता पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारतीय रिज़र्व बैंक (पीआईबी के अनुसार) ने बैंकिंग नियमों का पालन न करने के कारण पुणे स्थित ‘जय भवानी सहकारी बैंक लिमिटेड’ पर **आरबीआई जुर्माना** लगाया है। रिज़र्व बैंक ने 28 अगस्त 2026 को जारी अपने एक आधिकारिक आदेश के तहत इस सहकारी बैंक पर 2.03 लाख रुपये (दो लाख तीन हजार रुपये) की मौद्रिक पेनल्टी ठोकी है। यह कार्रवाई क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (CICs) की सदस्यता और नो योर कस्टमर (KYC) से जुड़े दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के कारण की गई है। केंद्रीय बैंक की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि यह वित्तीय जुर्माना बैंकिंग नियमन कानून, 1949 और क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनीज (रेगुलेशन) एक्ट, 2005 के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए लगाया गया है।
आरबीआई जुर्माना और मामले की मुख्य वजह
आरबीआई द्वारा बैंक की 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर वैधानिक निरीक्षण (Statutory Inspection) किया गया था। इस निरीक्षण के दौरान केंद्रीय बैंक के पर्यवेक्षी दल ने बैंक के परिचालन और रिकॉर्ड प्रबंधन में कई गंभीर खामियां पाईं। इसके बाद रिज़र्व बैंक ने बैंक को एक कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया। नोटिस में बैंक से पूछा गया था कि जारी किए गए दिशानिर्देशों का पालन करने में विफल रहने पर उस पर पेनल्टी क्यों न लगाई जाए।
जय भवानी सहकारी बैंक की ओर से नोटिस का लिखित जवाब प्रस्तुत किया गया। इसके अतिरिक्त, बैंक ने कुछ अनुपूरक प्रस्तुतियां दीं और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान अपनी मौखिक दलीलें भी पेश कीं। बैंक के जवाबों और साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद रिज़र्व बैंक इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि बैंक के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने **आरबीआई जुर्माना** लगाने का अंतिम फैसला लिया।
आरबीआई जुर्माना के पीछे के दो मुख्य उल्लंघन
केंद्रीय बैंक की जांच रिपोर्ट में जय भवानी सहकारी बैंक लिमिटेड के खिलाफ दो प्रमुख उल्लंघन पाए गए, जो इस कार्रवाई का आधार बने:
- सीआईसी (CICs) को जानकारी न देना: बैंक अपने सभी उधारकर्ताओं (Borrowers) की क्रेडिट संबंधी जानकारी सभी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को भेजने में विफल रहा। नियमानुसार सभी बैंकों को अपने कर्जदारों का डेटा क्रेडिट ब्यूरो के साथ साझा करना अनिवार्य होता है।
- जोखिम श्रेणी की समीक्षा में लापरवाही: बैंक ने केवाईसी (KYC) दिशानिर्देशों के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर ग्राहकों के खातों की जोखिम वर्गीकरण (Risk Categorization) समीक्षा नहीं की थी।
क्रेडिट इंफॉर्मेशन और केवाईसी नियमों का महत्व
बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (सीआईसी) की सदस्यता और रिपोर्टिंग अत्यंत आवश्यक होती है। जब कोई बैंक अपने कर्जदारों का डेटा सिबिल या अन्य सीआईसी को नहीं भेजता, तो इससे वित्तीय क्षेत्र में सिस्टमैटिक रिस्क बढ़ता है। अन्य वित्तीय संस्थानों को संबंधित उधारकर्ता के कुल कर्ज का सही अंदाजा नहीं लग पाता। इस प्रकार की अनदेखी पर केंद्रीय बैंक कड़ा रुख अपनाता है और इसी वजह से **आरबीआई जुर्माना** जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।
इसी तरह, केवाईसी (KYC) दिशानिर्देशों के अंतर्गत ग्राहकों के खातों का समय-समय पर जोखिम वर्गीकरण करना अनिवार्य होता है। बैंकों को अपने ग्राहकों को कम, मध्यम और उच्च जोखिम श्रेणी में बांटना होता है और निर्धारित अवधि में इसकी समीक्षा करनी होती है। उच्च जोखिम वाले खातों की अधिक गहनता से निगरानी की जाती है ताकि मनी लॉन्ड्रिंग या संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों को रोका जा सके। जब बैंक इस समीक्षा प्रक्रिया में देरी करते हैं, तो बैंकिंग सुरक्षा चक्र कमजोर होता है।
बैंकिंग कानून और रिज़र्व बैंक के अधिकार
भारतीय रिज़र्व बैंक देश का केंद्रीय बैंकिंग प्राधिकरण है और उसे भारत में चालू सभी व्यावसायिक व सहकारी बैंकों का पर्यवेक्षण करने की कानूनी शक्ति प्राप्त है। जय भवानी सहकारी बैंक पर यह **आरबीआई जुर्माना** बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 47ए(1)(सी) के साथ पठित धारा 46(4)(आई) और धारा 56 के प्रावधानों के तहत लगाया गया है। इसके अलावा, क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनीज (रेगुलेशन) एक्ट, 2005 की धारा 25(1)(iii) के साथ पठित धारा 23(4) का भी प्रयोग किया गया है।
यह कानून केंद्रीय बैंक को यह शक्ति देता है कि यदि कोई भी बैंक नियामकीय निर्देशों का अनुपालन करने में असफल रहता है, तो उस पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। सहकारी बैंकों (Co-operative Banks) के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते नेटवर्क को देखते हुए रिज़र्व बैंक पिछले कुछ वर्षों से उनके गवर्नेंस और अनुपालन मानकों पर सख्त निगरानी रख रहा है।
ग्राहकों पर इस पेनल्टी का क्या असर पड़ेगा?
रिजर्व बैंक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बैंक पर लगाया गया यह **आरबीआई जुर्माना** केवल नियामकीय अनुपालन (Regulatory Compliance) में पाई गई कमियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव डालना नहीं है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बैंक के आम जमाकर्ताओं और ग्राहकों के जमा पैसे पूरी तरह सुरक्षित हैं।
बैंक की सामान्य दैनिक गतिविधियां और बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह ही संचालित होती रहेंगी। ग्राहकों के पास जो सावधि जमा (FD), बचत खाते या चालू खाते हैं, उन पर इस पेनल्टी का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। रिज़र्व बैंक की यह कार्रवाई बैंक प्रबंधन को अपनी आंतरिक प्रणाली और अनुपालन तंत्र को दुरुस्त करने की एक कड़ी चेतावनी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? आरबीआई ने जय भवानी सहकारी बैंक पर कितना जुर्माना लगाया है?
उत्तर। भारतीय रिज़र्व बैंक ने नियमों के उल्लंघन के लिए जय भवानी सहकारी बैंक लिमिटेड, पुणे पर 2.03 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है।
प्रश्न? क्या इस पेनल्टी से बैंक ग्राहकों के पैसों पर कोई खतरा है?
उत्तर। नहीं, आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह पेनल्टी केवल नियामकीय कमियों के लिए है और इससे ग्राहकों के लेनदेन या बैंक खातों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
प्रश्न? जय भवानी सहकारी बैंक पर कार्रवाई के मुख्य कारण क्या थे?
उत्तर। मुख्य कारणों में क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को कर्जदारों की जानकारी न देना और केवाईसी के तहत खातों के जोखिम वर्गीकरण की नियमित समीक्षा न करना शामिल है।
यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






