शुक्रवार, अगस्त 28, 2026

फार्मा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भरता की ओर: अहमदाबाद में अमित शाह बोले

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अहमदाबाद में फार्माइनोवा अवार्ड समारोह 2026 को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को फार्मा क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक निर्यातक बनाने पर जोर दिया।

मुख्य बातें

  • गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद में ट्रोइका फार्मास्युटिकल्स द्वारा आयोजित फार्माइनोवा अवार्ड समारोह-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
  • भारत पिछले 12 वर्षों में दुनिया की 11वीं अर्थव्यवस्था से छलांग लगाकर 4वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।
  • फार्मा पीएलआई और बल्क ड्रग पार्क योजनाओं के तहत ₹42,700 करोड़ का निवेश आया और ₹3.64 लाख करोड़ से अधिक की दवाएं एक्सपोर्ट की गईं।
  • वर्ष 2028 से पहले भारत में वेंटिलेटर समेत सभी प्रकार के मेडिकल उपकरण स्थानीय स्तर पर निर्मित होने लगेंगे।

अहमदाबाद: फार्मा क्षेत्र में भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनना है बल्कि पूरी दुनिया को दवाइयां पहुंचाने वाला शीर्ष देश भी बनना है। गुजरात के अहमदाबाद में ट्रोइका फार्मास्युटिकल्स द्वारा आयोजित फार्माइनोवा अवार्ड समारोह-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यह बात कही। पीआईबी के अनुसार, गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने पिछले 12 वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है और भारत दुनिया की 11वीं अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को हर क्षेत्र में दुनिया में शीर्ष स्थान पर पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि फार्मा क्षेत्र में भारत ने वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान अपनी अद्भुत क्षमता साबित की है। संकट काल में भारत न केवल सबसे पहले टीका बनाने वाले शीर्ष तीन देशों में शामिल हुआ, बल्कि 70 से अधिक देशों में वैक्सीन भेजकर करोड़ों लोगों की जान बचाने का कार्य भी किया।

फार्मा क्षेत्र में भारत: पीएलआई योजना और बल्क ड्रग पार्क का प्रभाव

अमित शाह ने बताया कि केंद्र सरकार ने फार्मा और मेडटेक उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए आत्मनिर्भर भारत के तहत बड़े कदम उठाए हैं। सरकार की ओर से पीएलआई (उत्पादन आधारित प्रोत्साहन) योजना, बल्क ड्रग पार्क तथा मेडिकल डिवाइस पार्क नीतियां लागू की गई हैं। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य चीन के वैश्विक आधिपत्य को तोड़ना और देश में क्रिटिकल एपीआई, की-स्टार्टिंग मटीरियल्स और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का निर्माण सुनिश्चित करना है।

गृह मंत्री द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पीएलआई और बल्क ड्रग पार्क योजनाओं के लागू होने से फार्मा सेक्टर में व्यापक बदलाव आया है:

  • भारी निवेश: फार्मा पीएलआई और बल्क ड्रग पार्क योजनाओं के अंतर्गत अब तक ₹42,700 करोड़ का निवेश आ चुका है।
  • रिकॉर्ड एक्सपोर्ट: भारतीय कंपनियों ने अब तक ₹3,64,000 करोड़ से अधिक मूल्य की दवाओं का सफल निर्यात किया है।
  • मेडिकल डिवाइस निर्माण: वर्ष 2028 से पहले भारत में वेंटिलेटर समेत सभी मेडिकल उपकरणों का उत्पादन घरेलू स्तर पर होने लगेगा।
  • स्वदेशी वैक्सीन: महामारी के दौरान महज 13 महीनों में भारत ने कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों स्वदेशी वैक्सीन तैयार कर ली थीं।
  • मास्क व पीपीई किट एक्सपोर्ट: 140 करोड़ नागरिकों की जरूरत पूरी करने के बाद भारत पीपीई किट और एन-95 मास्क का नेट निर्यातक बना।

अनुसंधान और इनोवेशन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता

समारोह के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि फार्मा क्षेत्र में भारत को वैश्विक लीडर बनाने के लिए रिसर्च और इनोवेशन पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उन्होंने दवा निर्माता कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत से मेधावी छात्रों और शोधकर्ताओं को बढ़ावा देने का आह्वान किया। पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाई है, जिसके तहत पीआरआईपी (PRIP) जैसी बहु-करोड़ रुपये की योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

अमित शाह ने युवाओं की प्रतिभा की सराहना करते हुए बताया कि भारतीय युवाओं ने अमेरिका की तुलना में 22 गुना कम लागत में निजी सैटेलाइट का निर्माण कर अंतरिक्ष में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि हीनभावना त्यागकर युवाओं का उत्साह बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि 2014 में देश के केवल 1.80 करोड़ घरों में शौचालय थे, जो आज बढ़कर 13 करोड़ हो चुके हैं, जबकि 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है। स्वच्छता का सीधा संबंध बीमारियों की रोकथाम से होता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में हॉलिस्टिक अप्रोच और भविष्य की रणनीति

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार देश के गरीब तबके के लिए आयुष्मान भारत योजना लेकर आई है, जिससे 70 करोड़ नागरिकों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। फार्मा क्षेत्र में भारत की स्थिति सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने पेशेंट केयर, हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिसिन, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को मिलाकर हॉलिस्टिक हेल्थकेयर अप्रोच अपनाया है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए ₹1,60,000 करोड़ खर्च किए गए हैं, जिससे अस्पतालों की एक विस्तृत श्रृंखला स्थापित हुई है। इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद अब भारत का पूरा ध्यान दवा निर्माण को विश्व स्तर पर फैलाने और भारत को वैश्विक दवा केंद्र बनाने पर केंद्रित है।

भारतीय फार्मा उद्योग का ऐतिहासिक संदर्भ और महत्त्व

भारत दुनिया भर में किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में अहम योगदान देने के कारण भारत को विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई बल्क ड्रग पार्क और पीएलआई योजनाएं न केवल कच्चे माल के लिए विदेशी निर्भरता को खत्म कर रही हैं, बल्कि देश के भीतर नए रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही हैं। फार्मा क्षेत्र में भारत का यह बढ़ता कदम आने वाले वर्षों में देश को आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मदद करेगा।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका के समाचार संपादक हैं और अर्थव्यवस्था, बाज़ार, रोज़गार तथा शिक्षा से जुड़ी खबरें देखते हैं।

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