
थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित विश्व बैंक की विकास समिति की 114वीं पूर्ण बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत का पक्ष रखा।
मुख्य बातें
- बैठक का मुख्य एजेंडा निजी पूंजी जुटाना और रोजगार सृजन था।
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने थाईलैंड के बैंकॉक में विश्व बैंक के गवर्नर के तौर पर हिस्सा लिया।
- भारत ने रोजगार निर्माण के लिए समग्र पारिस्थितिकी तंत्र और निजी क्षेत्र की मुख्य भूमिका पर जोर दिया।
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित विश्व बैंक की विकास समिति की 114वीं पूर्ण बैठक में भाग लिया। इस उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने विश्व बैंक के गवर्नर के तौर पर हिस्सा लिया और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच रोजगार निर्माण तथा पूंजी जुटाने के भारत के दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखा। बैठक का मुख्य एजेंडा निजी पूंजी जुटाना और रोजगार रखा गया था, जिस पर कई देशों के प्रतिनिधियों ने चर्चा की।
निर्मला सीतारमण ने बैंकॉक में विश्व बैंक की बैठक में क्या कहा?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्व बैंक की विकास समिति की 114वीं पूर्ण बैठक में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि ऊर्जा बाजार में तनाव, व्यापार में उथल-पुथल और जलवायु दबाव के इस दौर में बेहतर वेतन वाली नौकरियां ही गरीबी उन्मूलन का सबसे प्रभावी मार्ग हैं। उन्होंने अपने भाषण में छह प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया, जिसमें रोजगार निर्माण के लिए समग्र पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि रोजगार सृजन के लिए केवल एक क्षेत्र में सुधार काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यापक आर्थिक स्थिरता और कुशल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अधिकांश रोजगार निजी उद्यमों के माध्यम से ही निर्मित किए जाने चाहिए और लघु एवं मध्यम उद्यम इसमें बड़ी भूमिका निभाएंगे।
रोजगार और निजी पूंजी पर भारत का विशेष दृष्टिकोण
भारत ने विकास के एजेंडे के केंद्र में निजी क्षेत्र को रखने की वकालत की है। वित्त मंत्री ने कहा कि सफलता का मापन केवल जुटाए गए वित्तपोषण की मात्रा से नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे कितने रोजगार बने और उत्पादकता कितनी बढ़ी, यह देखना आवश्यक है। विकासशील अर्थव्यवस्थाएं इस समय जोखिम पूंजी की कमी से जूझ रही हैं और ऐसे में गारंटी तथा जोखिम न्यूनीकरण उपकरण बेहद मददगार साबित हो सकते हैं।
- रोजगार निर्माण के लिए समग्र पारिस्थितिकी तंत्र और कौशल तक व्यापक पहुंच आवश्यक है।
- लघु एवं मध्यम उद्यम और स्टार्टअप निजी निवेश जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- विश्व बैंक को प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण और स्थानीय मुद्रा वित्तपोषण जैसे साधनों का उपयोग करना चाहिए।
- विकासशील देशों की आवाज और शासन संरचना में उनके प्रतिनिधित्व को मजबूत किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही, भारत ने प्रतिस्पर्धी वित्तपोषण को एक प्रमुख प्राथमिकता बनाए रखने की अपील की है ताकि विकासशील देशों को किफायती और सुलभ ऋण मिल सके। नॉलेज बैंक को बाजार की विफलताओं को दूर करने में मदद करनी चाहिए और एआई से मिलने वाली क्षमताओं का पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए।
विश्व बैंक समूह और वैश्विक शासन संकेतकों पर भारत का रुख
अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (IBRD), अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) और बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (MIGA) के बीच मजबूत सहयोग को प्रोत्साहित किया गया है। भारत ने विश्वव्यापी शासन संकेतकों और समग्र आकलन के संबंध में अपनी पुरानी चिंताओं को फिर से दोहराया है। मौजूदा पद्धतियों की व्यापक समीक्षा और संशोधन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है ताकि वे पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित हों।
अंत में यह रेखांकित किया गया कि सफलता का अंतिम पैमाना यह होना चाहिए कि सुधारों से देशों को गरीबी कम करने और जीवन स्तर सुधारने में मदद मिल रही है या नहीं। भारत ने इन सभी उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए सभी शेयरधारकों और विकास भागीदारों के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? विश्व बैंक की विकास समिति की 114वीं बैठक कहाँ आयोजित की गई थी?
उत्तर। यह बैठक थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित की गई थी।
प्रश्न? इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?
उत्तर। भारत की ओर से केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्व बैंक के गवर्नर के तौर पर भाग लिया।
प्रश्न? बैठक का मुख्य एजेंडा क्या था?
उत्तर। बैठक का मुख्य एजेंडा निजी पूंजी जुटाना और रोजगार सृजन था।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






