
ग्रामीण विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय कार्यशाला में खुलासा, स्वयं सहायता समूहों को मिला 14 लाख करोड़ का बैंकिंग लोन।
मुख्य बातें
- 92 लाख स्वयं सहायता समूहों की 10 करोड़ महिलाओं को 14 लाख करोड़ रुपये का औपचारिक ऋण दिया गया।
- सरकार का लक्ष्य 6 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने और 87 लाख ग्रामीण उद्यमों को मजबूत करने का है।
- लोकओएस (LokOS) डिजिटल प्लेटफॉर्म को सीधे बैंकिंग पोर्टलों से जोड़ा जाएगा।
- मिशन में तीन बड़े बदलाव: समावेश से समृद्धि, क्रेडिट पहुंच से गुणवत्तापूर्ण क्रेडिट और आत्मनिर्भरता।
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में ग्रामीण आजीविका मिशन की प्रगति और डिजिटल प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण पर विस्तार से समीक्षा की गई। हरियाणा के गुरुग्राम में 12 और 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग ने देश भर के स्वयं सहायता समूहों के आंकड़े प्रस्तुत किए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की लगभग 10 करोड़ महिलाएं 92 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं। इन महिलाओं को औपचारिक बैंकिंग तंत्र के माध्यम से करीब 14 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया जा चुका है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का डिजिटल ढांचा कैसे काम करता है?
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों का पारदर्शी डेटा तैयार करने के लिए लोकओएस (LokOS) प्लेटफॉर्म संचालित किया जा रहा है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म बैंकिंग पोर्टलों से सीधे जुड़कर महिलाओं के बचत, वित्तीय लेनदेन और ऋण भुगतान का रिकॉर्ड तैयार करता है। इसके माध्यम से बैंक बिना किसी प्रक्रियागत बाधा के ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल क्रेडिट स्वीकृत करते हैं।
लोकओएस प्लेटफॉर्म और डेटा प्रबंधन पर जोर
कार्यशाला में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने कहा कि जिस चीज का मापन होता है, वही काम पूरा होता है और उसमें सुधार लाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकओएस को केवल एक निगरानी डैशबोर्ड तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे निर्णय लेने में सहायता करने वाली प्रणाली के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
रोहित कंसल ने जानकारी दी कि आने वाले चरण में लगभग 87 लाख ग्रामीण उद्यमों को मजबूत बनाने पर काम होगा। इसके साथ ही सरकार 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि समूहों का डेटा पूरी तरह सटीक, अद्यतन और सत्यापित होना चाहिए ताकि वित्तीय संस्थाओं का भरोसा बना रहे।
ग्रामीण आजीविका मिशन में तीन बड़े रणनीतिक बदलाव
ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव विपिन कुमार ने कार्यशाला में ग्रामीण आजीविका मिशन के भावी दिशा-निर्देशों पर चर्चा की। उन्होंने तीन प्रमुख रणनीतिक बदलावों की घोषणा की:
- समावेश से समृद्धि की ओर: केवल महिलाओं को समूहों से जोड़ने के बजाय अब उनकी आय बढ़ाकर उन्हें समृद्ध बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- ऋण तक पहुंच से गुणवत्तापूर्ण ऋण: महिलाओं को केवल लोन दिलाना ही काफी नहीं है, बल्कि उस धन का सही उद्यम में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
- समर्थित से आत्मनिर्भर संस्थान: स्वयं सहायता समूहों और उनके परिसंघों को वित्तीय व प्रशासनिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
विपिन कुमार ने बताया कि लोकओएस हर महिला की बचत और कर्ज चुकाने के व्यवहार के आधार पर उसकी क्रेडिट विश्वसनीयता का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह डेटा ग्रामीण महिलाओं की संपत्ति है और इसका उपयोग केवल उनके आर्थिक हितों की रक्षा के लिए किया जाएगा।
इसका असर: सामान्य महिलाओं को कैसे मिलेगा फायदा?
इस पूरी डिजिटल व्यवस्था और नए रणनीतिक बदलावों से ग्रामीण क्षेत्रों की आम महिलाओं को सीधे वित्तीय मदद मिलेगी। पहले जहां बैंक कागजी जटिलताओं के कारण ग्रामीण महिलाओं को ऋण देने में संकोच करते थे, अब लोकओएस प्लेटफॉर्म पर मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर ऋण प्रक्रिया तुरंत पूरी हो जाएगी।
ग्रामीण महिलाओं को अपने छोटे व्यापार, कृषि कार्य या पशुपालन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए बैंक शाखाओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। डिजिटल डेटा सीधे बैंकों को उपलब्ध होने से कम ब्याज दर पर समय पर कर्ज मिलना आसान हो जाएगा। इससे लखपति दीदी अभियान के तहत महिलाओं की सालाना पारिवारिक आय 1 लाख रुपये से अधिक करने के लक्ष्य को गति मिलेगी।
कार्यशाला में शामिल प्रमुख संगठन और अधिकारी
हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM), नीति आयोग, विश्व बैंक, जीआईजेड (GIZ), जे-पीएएल (J-PAL), बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, 3ie, बीआरएसी (BRAC), नाबार्ड (NABARD) और एनपीसीआई (NPCI) के अधिकारी शामिल हुए।
कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमित शुक्ला, उप सचिव डॉ. मोनिका, संयुक्त निदेशक रंगोली पाठक, हरियाणा एसआरएलएम के सीईओ सूरज भान, बिहार एसआरएलएम के सीईओ हिमांशु शर्मा और गुरुग्राम जिला परिषद के सीईओ सुमित कुमार भी उपस्थित रहे। कार्यशाला में स्वयं सहायता समूहों (SHG), ग्राम संगठनों (VO) और संकुल स्तरीय संघों (CLF) के वित्तीय लेन-देन के डिजिटलीकरण की समीक्षा की गई।
दीनदयाल अंत्योदय योजना की पृष्ठभूमि
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबी को समाप्त करना है। यह योजना ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करके उन्हें टिकाऊ आजीविका के साधन उपलब्ध कराती है।
मिशन का मुख्य ध्यान महिलाओं के सशक्तीकरण, वित्तीय समावेशन, संस्थागत निर्माण और विविध आजीविका अवसरों के सृजन पर रहता है। समय के साथ इस मिशन ने डिजिटल तकनीकों को अपनाकर अपनी पहुंच और दक्षता में भारी वृद्धि की है, जिससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर सुधरा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब तक कितना ऋण वितरित किया गया है?
उत्तर: इस मिशन के तहत 92 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 10 करोड़ महिलाओं को बैंकों द्वारा 14 लाख करोड़ रुपये का औपचारिक ऋण प्रदान किया जा चुका है।
प्रश्न: लखपति दीदी योजना का वर्तमान लक्ष्य क्या है?
उत्तर: सरकार ने देश भर में 6 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत उनकी वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये सुनिश्चित की जा रही है।
प्रश्न: लोकओएस (LokOS) ऐप का क्या उपयोग है?
उत्तर: लोकओएस एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों का लेनदेन, बचत और ऋण इतिहास दर्ज करता है, जिससे बैंकों के जरिए डिजिटल क्रेडिट देना आसान हो जाता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






