
विशेष अभियान 6 के तहत कर्तव्य भवन-2 में आयोजित कार्यशाला में इंडिया-एड्स एनजीओ के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को ई-कचरा प्रबंधन के गुर सिखाए।
मुख्य बातें
- 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में विधायी विभाग द्वारा कार्यशाला का आयोजन किया गया।
- संयुक्त सचिव एवं विधि सलाहकार श्री जी. पनमेई ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
- इंडिया-एड्स एनजीओ की महासचिव श्रीमती रचना और उनकी टीम ने ई-कचरा प्रबंधन पर प्रस्तुति दी।
- राजभाषा विंग और विधि साहित्य प्रकाशन के अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने भाग लिया।
ई-कचरा निपटान को लेकर विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की। यह कार्यक्रम 15 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार के विशेष अभियान 6 के तहत संपन्न हुआ। इस कार्यशाला की अध्यक्षता संयुक्त सचिव और विधि सलाहकार जी. पनमेई ने की। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, इस आयोजन में विधायी विभाग के साथ-साथ उसकी सहयोगी शाखाओं जैसे राजभाषा विंग और विधि साहित्य प्रकाशन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया।
ई-कचरा निपटान पर विधि मंत्रालय की पहल
ई-कचरा निपटान के संबंध में आयोजित यह कार्यशाला सरकारी दफ्तरों में अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षित और नियमबद्ध प्रबंधन का एक प्रयास है। 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में विधायी विभाग द्वारा आयोजित इस सत्र में इंडिया-एड्स एनजीओ के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण और पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक तरीके बताए।
कार्यशाला के मुख्य प्रतिभागी और प्रमुख बिंदु
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने पुराने कंप्यूटर, प्रिंटर, मॉनिटर और केबल जैसे इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पर्यावरण के अनुकूल निस्तारण पर विस्तृत जानकारी साझा की। इंडिया-एड्स एनजीओ की महासचिव श्रीमती रचना और उनकी टीम ने कार्यशाला का संचालन किया और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के बिना सोचे-समझे निष्पादन से होने वाले नुकसान के प्रति सचेत किया। संयुक्त सचिव जी. पनमेई ने एनजीओ टीम का आभार व्यक्त किया और कर्मचारियों से लागू नियमों के तहत ही ई-कचरे का निष्पादन करने को कहा।
इस कार्यशाला से जुड़ी प्रमुख जानकारियां नीचे दी गई हैं:
- आयोजन तिथि और स्थान: 15 अक्टूबर 2026 को कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में आयोजन।
- आयोजक विभाग: विधि और न्याय मंत्रालय का विधायी विभाग।
- अध्यक्षता: संयुक्त सचिव एवं विधि सलाहकार श्री जी. पनमेई।
- विशेषज्ञ संस्था: इंडिया-एड्स एनजीओ की टीम (नेतृत्व: महासचिव श्रीमती रचना)।
- सहभागी कार्यालय: राजभाषा विंग तथा विधि साहित्य प्रकाशन के अधिकारी और कर्मचारी।
ई-कचरा निपटान के नियम और पर्यावरण पर प्रभाव
इलेक्ट्रॉनिक कचरे का अनुचित प्रबंधन पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर संकट पैदा करता है। जब पुराने कंप्यूटर, मोबाइल, सर्वर और अन्य विद्युत उपकरण बिना किसी पूर्व उपचार के कचरे में फेंक दिए जाते हैं, तो उनमें मौजूद सीसा, पारा, कैडमियम और आर्सेनिक जैसे विषैले तत्व मिट्टी और भूजल में घुल जाते हैं। यह स्थिति जल और जमीन को दूषित करती है और आसपास रहने वाली आबादी में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनती है।
ई-कचरा निपटान के लिए भारत सरकार ने ई-वेस्ट (प्रबंधन) नियम तय किए हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी कार्यालय या निजी संस्थान को अपना पुराना इलेक्ट्रॉनिक सामान केवल पंजीकृत रीसाइक्लर्स को ही सौंपना होता है। कबाड़ में सीधे सामान बेचने या खुले में जलाने पर प्रतिबंध है। विधायी विभाग की इस कार्यशाला में कर्मचारियों को यही सिखाया गया कि कैसे अनुपयोगी सामान को आधिकारिक सूची में दर्ज करके सुरक्षित रीसाइक्लिंग चैनल तक पहुंचाया जाए।
यह भी जानें: विशेष अभियान 6 का उद्देश्य
केंद्र सरकार हर साल मंत्रालयों और विभागों में लंबित मामलों को निपटाने तथा स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष अभियान चलाती है। विशेष अभियान 6 का एक मुख्य ध्येय दफ्तरों से पुराने रिकॉर्ड, स्क्रैप और अप्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक सामान का निपटारा करना है। इससे दफ्तरों में जगह खाली होती है और काम करने का माहौल सुधरता है।
सरकारी दफ्तरों में डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण समय के साथ बड़ी मात्रा में हार्डवेयर पुराना हो जाता है। जब पुराने उपकरण इस्तेमाल के लायक नहीं रहते, तो उन्हें समय पर हटाना आवश्यक हो जाता है। विशेष अभियान 6 के अंतर्गत सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां मौजूद ई-कचरे को चिन्हित करें और नियमानुसार उसका निस्तारण करें। इससे रीसाइक्लिंग के जरिए बहुमूल्य धातुओं को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।
सरकारी दफ्तरों में ई-कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया
सरकारी विभागों में ई-कचरे के निस्तारण के लिए एक निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाती है। सबसे पहले आईटी और प्रशासनिक शाखा दफ्तर में मौजूद उन उपकरणों का सर्वे करती है जो मरम्मत के अयोग्य या तकनीक के लिहाज से पुराने पड़ चुके हैं। इसके बाद इन उपकरणों को अनुपयोगी घोषित किया जाता है।
अनुयोगी घोषित होने के बाद, इन सामानों की श्रेणीबद्ध सूची तैयार की जाती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा पंजीकृत रीसाइक्लिंग एजेंसियों को इन सामानों के निस्तारण का जिम्मा दिया जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के दौरान जहरीली गैसें या हानिकारक तत्व पर्यावरण में न फैलें। विधायी विभाग में आयोजित इस कार्यशाला में कर्मचारियों को इसी प्रक्रिया का ईमानदारी से पालन करने का निर्देश दिया गया।
आम नागरिकों के लिए इसका असर और जिम्मेदारी
ई-कचरे की समस्या केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर घर की समस्या बनती जा रही है। देश में स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और अन्य घरेलू उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जब ये उपकरण खराब होते हैं, तो अक्सर लोग इन्हें कबाड़ी को दे देते हैं या फिर घर के किसी कोने में जमा करके रखते हैं।
असंगठित कबाड़ी इन उपकरणों को खुले में तोड़ते हैं या जलाते हैं, जिससे निकलने वाला जहरीला धुआं हवा को दूषित करता है। आम नागरिकों को चाहिए कि वे अपने पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अधिकृत ई-कचरा संग्रह केंद्रों या ब्रांड्स के रीसाइक्लिंग प्रोग्राम के तहत ही जमा करें। शहरी निकायों और स्थानीय प्रशासन ने भी अब ई-कचरे के लिए अलग से कलेक्शन सेंटर बनाना शुरू किया है। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नागरिकों की यह सतर्कता बेहद जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: विधि मंत्रालय ने ई-कचरा निपटान पर कार्यशाला का आयोजन कहां और कब किया?
उत्तर: विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने यह कार्यशाला 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित की।
प्रश्न: ई-कचरा निपटान कार्यशाला की अध्यक्षता किसने की?
उत्तर: इस कार्यशाला की अध्यक्षता विधायी विभाग के संयुक्त सचिव एवं विधि सलाहकार श्री जी. पनमेई ने की।
प्रश्न: सरकारी विभागों में ई-कचरे के प्रबंधन का मुख्य नियम क्या है?
उत्तर: नियमानुसार सरकारी विभागों को पुराना इलेक्ट्रॉनिक कचरा केवल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पंजीकृत रीसाइक्लर्स के माध्यम से ही निस्तारित करना अनिवार्य है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






