
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने घोषणा की है कि चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश की सौज झील को रामसर सूची में शामिल कर लिया गया है।
मुख्य बातें
- भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई है।
- चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि को नई सूची में शामिल किया गया है।
- उत्तर प्रदेश की सौज झील को भी रामसर सूची में जोड़ा गया है।
- केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 अक्टूबर 2026 को यह घोषणा की।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार भारत में रामसर स्थल की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने घोषणा की है कि चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश की सौज झील को इस वैश्विक सूची में शामिल कर लिया गया है। इन दोनों महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्रों के जुड़ने के साथ ही देश में रामसर स्थलों की कुल संख्या अब 103 हो गई है। यह उपलब्धि देश में जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
भारत में रामसर स्थल सूची में जुड़े दो नए नाम
भारत में रामसर स्थल की संख्या बढ़कर 103 हो गई है क्योंकि चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील और उत्तर प्रदेश की सौज झील को इस अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि सूची में आधिकारिक तौर पर स्थान मिल गया है। पर्यावरण मंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से इस बात की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार देश की जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और स्थानीय लोगों की आजीविका को बनाए रखने के लिए आर्द्रभूमियों के संरक्षण पर लगातार विशेष ध्यान दे रही है।
यह फैसला देश के समृद्ध आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्रों को बचाने के लिए चल रहे प्रयासों को और अधिक पुख्ता करता है। इन क्षेत्रों के जुड़ने से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। मंत्री ने उत्तर प्रदेश प्रशासन और चंडीगढ़ प्रशासन को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए अपनी शुभकामनाएं भी प्रेषित की हैं।
पर्यावरण संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में प्रयास
पीआईबी (प्रेस सूचना ब्यूरो) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देश की प्राकृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए निरंतर काम कर रही है। आर्द्रभूमियाँ प्राकृतिक स्पंज के रूप में काम करती हैं जो बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने, भूजल स्तर को रिचार्ज करने और विभिन्न प्रकार के पक्षियों एवं जलीय जीवों को आश्रय देने में मदद करती हैं।
- चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि को नई सूची में जोड़ा गया।
- उत्तर प्रदेश की सौज झील भी रामसर सूची में शामिल।
- देश में अब कुल रामसर स्थलों की संख्या 103 हो गई है।
- घोषणा केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा की गई।
आर्द्रभूमि संरक्षण का स्थानीय जीवन और पर्यावरण पर असर
आम नागरिक के लिए इन स्थलों के रामसर सूची में आने का मतलब है कि उन क्षेत्रों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय तथा प्रशासनिक ध्यान केंद्रित होगा। इससे इन जलस्रोतों के आसपास अतिक्रमण रुकेगा, पानी की गुणवत्ता सुधरेगी और प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित होगा। पर्यावरणविदों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में जल संकट से निपटा जा सके।
ऐतिहासिक रूप से रामसर कन्वेंशन ईरान के रामसर शहर में 1971 में हस्ताक्षरित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों का संरक्षण करना है। भारत ने फरवरी 1982 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे। तब से लेकर अब तक भारत सरकार ने देश के विभिन्न राज्यों में फैले महत्वपूर्ण झीलों, तालाबों और मार्श लैंड को इस सूची में शामिल कराने के लिए कई प्रस्ताव भेजे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में रामसर स्थलों की संख्या में काफी तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश की संरक्षण नीतियों की सफलता को दर्शाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? देश में अब कुल कितने रामसर स्थल हैं?
उत्तर। चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश की सौज झील के जुड़ने के बाद भारत में कुल रामसर स्थलों की संख्या 103 हो गई है।
प्रश्न? यह घोषणा किसने और कब की?
उत्तर। यह घोषणा केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 अक्टूबर 2026 को की।
प्रश्न? नए जोड़े गए स्थल किस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से हैं?
उत्तर। नए जोड़े गए स्थलों में सुखना आर्द्रभूमि चंडीगढ़ से और सौज झील उत्तर प्रदेश से संबंधित है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






