
पीआईबी के अनुसार स्वच्छता उद्यमी योजना और नमस्ते फ्रेमवर्क ने विजयवाड़ा के सफाई कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को सुधारा है।
मुख्य बातें
- विजयवाड़ा के सफाई कर्मचारी तडिकोंडा रामबाबू को स्वच्छता उद्यमी योजना का लाभ मिला।
- 21 अगस्त 2025 को रामबाबू और उनके चार साथियों को गल्फर वाहन के लिए सब्सिडी मिली।
- इस परियोजना की कुल लागत 50 लाख रुपये थी जिसमें 18.75 लाख रुपये कैपिटल सब्सिडी शामिल थी।
- रामबाबू की मासिक आय 19,000 रुपये से बढ़कर लगभग 29,000 रुपये हो गई है।
स्वच्छता उद्यमी योजना के माध्यम से देश के सफाई कर्मचारियों के जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही यह पहल मेहनतकश वर्ग के लिए एक बड़ा संबल साबित हो रही है। इस योजना के जरिए सफाई कार्यों से जुड़े लोगों को आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी प्रदान की जाती है।
स्वच्छता उद्यमी योजना क्या है और कैसे बदल रही है जीवन?
स्वच्छता उद्यमी योजना का उद्देश्य लक्षित वित्तीय सहायता और स्वच्छता से संबंधित उपकरणों के लिए समर्थन के माध्यम से आय सृजन व आत्मनिर्भरता के अवसर पैदा करना है। इस प्रकार, स्थायी आजीविका के अवसर सफाई कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा और गरिमा बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, यह पहल नमस्ते फ्रेमवर्क के अंतर्गत आती है।
विजयवाड़ा नगर निगम में आउटसोर्सिंग के जरिए काम करने वाले 40 वर्षीय तडिकोंडा रामबाबू इसका एक जीवंत उदाहरण हैं। दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद आर्थिक तंगी के कारण वह आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सके थे। उनका परिवार मुख्य रूप से उनकी लगभग 19,000 रुपये की मासिक आय पर निर्भर था, जिससे घर का खर्च चलाना और दो बेटों की पढ़ाई का खर्च उठाना एक बड़ी चुनौती थी।
सब्सिडी और वाहनों की खरीद से बढ़ी अतिरिक्त आय
बीते 21 अगस्त 2025 को श्री रामबाबू और उनके चार अन्य साथियों को भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के तहत सहायता मिली। इस समूह को गल्फर 8 के.एल. डीस्लजिंग वाहन की खरीद हेतु एक परियोजना के लिए अग्रिम पूंजी सब्सिडी दी गई। इससे वे स्वच्छता संबंधी सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हुए और अपने वर्तमान कार्य के अतिरिक्त आय का एक नया स्रोत बना सके।
इस पूरी परियोजना की कुल लागत 50 लाख रुपये थी, जिसमें 31.25 लाख रुपये का ऋण और 18.75 लाख रुपये की कैपिटल सब्सिडी शामिल थी। इस व्यवस्था के माध्यम से श्री रामबाबू अब हर महीने करीब 10,000 रुपये की अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। परिणामस्वरूप उनकी कुल मासिक आय 19,000 रुपये से बढ़कर लगभग 29,000 रुपये तक पहुंच गई है।
- परियोजना की कुल लागत: 50 लाख रुपये
- ऋण राशि: 31.25 लाख रुपये
- कैपिटल सब्सिडी: 18.75 लाख रुपये
- मासिक अतिरिक्त आय: लगभग 10,000 रुपये
पारिवारिक जीवन और बच्चों की शिक्षा पर प्रभाव
अतिरिक्त आय आने से इस परिवार की वित्तीय सुरक्षा काफी मजबूत हुई है और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने का दबाव कम हुआ है। श्री रामबाबू की पत्नी एक गृहिणी हैं, जबकि उनका बड़ा बेटा दसवीं कक्षा और छोटा बेटा इंटरमीडिएट के दूसरे वर्ष में पढ़ाई कर रहा है। बढ़ी हुई आय से उन्हें अपने बच्चों की स्कूली और उच्च शिक्षा के खर्चों को संभालने में बहुत मदद मिल रही है।
सीमित आर्थिक संसाधनों और सामाजिक भेदभाव के अनुभवों के बावजूद इस तरह की सरकारी योजनाएं परिवारों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर देती हैं। स्वच्छता उद्यमी योजना ने न केवल तडिकोंडा रामबाबू की आमदनी बढ़ाई बल्कि उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मार्ग भी दिखाया है।
यह भी जानें: नमस्ते फ्रेमवर्क और स्वच्छता कर्मचारियों का भविष्य
नमस्ते (NAPSA – National Action Plan for Mechanised Sanitation Ecosystem) फ्रेमवर्क भारत सरकार की एक ऐसी पहल है जिसका लक्ष्य देश में अस्वच्छता और खतरनाक सफाई प्रथाओं को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके तहत सफाई कर्मचारियों का पुनर्वास किया जाता है और उन्हें आधुनिक मशीनों व वाहनों की खरीद के लिए सहायता दी जाती है।
पारंपरिक रूप से मैला ढोने या जोखिम भरे हाथों से सफाई के काम में लगे लोगों को सुरक्षा और सम्मान देने के लिए यह योजनाएं अहम मानी जाती हैं। पूंजी सब्सिडी मिलने से श्रमिक केवल नौकरी तक सीमित न रहकर खुद अपने स्वच्छता उद्यम के मालिक बन सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? स्वच्छता उद्यमी योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर। इस योजना का उद्देश्य सफाई कर्मचारियों को वित्तीय सहायता और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
प्रश्न? तडिकोंडा रामबाबू को इस योजना के तहत कितनी सब्सिडी मिली? उत्तर। उन्हें और उनके समूह को गल्फर डीस्लजिंग वाहन की परियोजना के लिए 18.75 लाख रुपये की कैपिटल सब्सिडी दी गई।
प्रश्न? इस योजना से रामबाबू की मासिक आय पर क्या असर पड़ा? उत्तर। उनकी मासिक आय लगभग 19,000 रुपये से बढ़कर करीब 29,000 रुपये हो गई है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






