मंगलवार, अक्टूबर 13, 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक ने जारी किए फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व पर नए नियम, जानिए क्या बदला

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फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व

भारतीय रिज़र्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार को व्यवस्थित रखने के लिए फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व से जुड़े नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मुख्य बातें

  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने 10 अक्टूबर 2026 को नया सर्कुलर जारी किया।
  • अधिकृत डीलरों को फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) mantener करना होगा।
  • यह नियम दो मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के व्युत्पन्न अनुबंधों पर लागू होगा।
  • रिजर्व की राशि अनुबंध के नोटेशनल मूल्य के 20 प्रतिशत के बराबर होगी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिर और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को लेकर एक नया और अहम कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक की तरफ से जारी ताजा सर्कुलर के अनुसार, अब अधिकृत डीलरों को कुछ खास विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए एक विशेष रिजर्व रखना होगा। इस नए नियम का उद्देश्य बाजार की गतिविधियों पर नजर रखना और किसी भी प्रकार के जोखिम को कम करना है।

फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व के नए नियम क्या हैं

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व के इन नए दिशा-निर्देशों के तहत, अधिकृत डीलरों (Authorised Dealers) को भारतीय रुपया (INR) से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए रिजर्व mantener करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह व्यवस्था उन सभी मामलों में लागू होगी जहां उपयोगकर्ता चालू खाता लेनदेन (current account transactions) के तहत हेजिंग के लिए विदेशी मुद्रा खरीद रहे हैं। नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार निगरानी रख रहा है।

यह नया नियम दो मिलियन अमेरिकी डॉलर (USD) के समतुल्य मूल्य से अधिक वाले सभी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों पर लागू किया जाएगा। अधिकृत डीलरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे इन नियमों का पूरी तरह से पालन करें, ताकि बाजार में किसी भी तरह की अनियंत्रित स्थिति से बचा जा सके।

रिजर्व की गणना और जमा करने की प्रक्रिया

जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक, यह फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) प्रत्येक डेरिवेटिव अनुबंध के नोटेशनल (notional) मूल्य के भारतीय रुपये के समतुल्य का 20 प्रतिशत के बराबर होना चाहिए। इस पूरी राशि को भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक के पास दैनिक आधार पर नकद रूप में जमा और बनाए रखना होगा। यह रिजर्व तब तक बना रहना चाहिए जब तक कि संबंधित अनुबंध समाप्त नहीं हो जाता।

  • यह रिजर्व दो मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के अनुबंधों पर लागू है।
  • रिजर्व की राशि अनुबंध के मूल्य का 20 प्रतिशत होगी।
  • इसे प्रतिदिन नकद के रूप में भारतीय रिज़र्व बैंक के पास जमा करना होगा।
  • अनुबंध की समाप्ति तक यह रिजर्व बरकरार रखना अनिवार्य है।

नियमों के उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई

भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई उपयोगकर्ता एक या एक से अधिक अधिकृत डीलरों के साथ कई लेनदेन करके इन नियमों को दरकिनार करने की कोशिश करता है, तो इसे निर्देशों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में केंद्रीय बैंक द्वारा सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, अधिकृत डीलरों को केंद्रीय बैंक की सेंट्रलाइज्ड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (CIMS) के माध्यम से रोजाना इस रिजर्व के रखरखाव का पूरा विवरण देना होगा।

यह भी जानें: आरबीआई के इन नियमों का आम बाजार और इकोनॉमी पर असर

भारतीय रिज़र्व बैंक के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व से जुड़े ये नए निर्देश विदेशी मुद्रा बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता लाने के लिए बनाए गए हैं। जब बड़ी कंपनियां या संस्थान भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध करते हैं, तो विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ जाता है। इस 20 प्रतिशत नकद रिजर्व की अनिवार्यता से इस तरह के जोखिम को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

इन दिशा-निर्देशों को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 की धारा 10(4) और 11(1) तथा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45W के तहत प्रद शक्तियों के आधार पर जारी किया गया है। ये नए नियम सर्कुलर जारी होने के बाद किए जाने वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों पर तुरंत प्रभाव से लागू हो चुके हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व के नए नियम कब से लागू हुए हैं? उत्तर। ये निर्देश 10 अक्टूबर 2026 को जारी होने के बाद के डेरिवेटिव अनुबंधों पर लागू हैं।

प्रश्न? यह रिजर्व कितना जमा करना होगा? उत्तर। यह प्रत्येक अनुबंध के नोटेशनल मूल्य के 20 प्रतिशत के बराबर होगा जिसे आरबीआई के पास नकद रखना होगा।

प्रश्न? इस रिजर्व की रिपोर्टिंग कैसे होगी? उत्तर। अधिकृत डीलरों को इसकी दैनिक रिपोर्टिंग आरबीआई के सेंट्रलाइज्ड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (CIMS) के जरिए करनी होगी।

यह रिपोर्ट RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका में समाचार एवं व्यापार संपादक हैं। वे अर्थव्यवस्था, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), बैंकिंग, शेयर बाजार, सरकारी योजनाओं, रोज़गार और भर्ती से जुड़ी खबरों तथा पाठकों के काम आने वाली व्यावहारिक जानकारी (कैसे करें/स्टेप-बाय-स्टेप गाइड) की रिपोर्टिंग और संपादन करते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि हर आँकड़ा, तिथि और प्रक्रिया आधिकारिक स्रोत से सत्यापित हो और लेख में मूल विज्ञप्ति या पोर्टल का लिंक दिया जाए। किसी गलती की सूचना के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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