
असम के तेजपुर में 24 पत्रकारों के लिए आयोजित 3 सप्ताह का रक्षा संवाददाता पाठ्यक्रम संपन्न हो गया है। समापन समारोह की अध्यक्षता गजराज कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला ने की।
मुख्य बातें
- तेजपुर में 24 पत्रकारों के लिए 3 सप्ताह का रक्षा संवाददाता पाठ्यक्रम (DCC) सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
- प्रतिभागियों को थल सेना, नौसेना और वायु सेना की भूमिकाओं और सैन्य रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण दिया गया।
- गजराज कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला ने समापन समारोह की अध्यक्षता की।
- समारोह में रक्षा मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया एवं संचार) विजय कुमार भी मौजूद रहे।
रक्षा संवाददाता पाठ्यक्रम का तीन सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम असम के तेजपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में देश भर के 24 पत्रकारों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों के तीनों अंगों—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—की कार्यप्रणाली और परिचालन क्षमताओं को करीब से समझा। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मीडिया और सैन्य बलों के बीच समन्वय को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टिंग को अधिक सटीक बनाना है।
रक्षा संवाददाता पाठ्यक्रम क्या है?
रक्षा संवाददाता पाठ्यक्रम रक्षा मंत्रालय द्वारा पत्रकारों के लिए आयोजित किया जाने वाला एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसके तहत मीडियाकर्मियों को थल सेना, नौसेना और वायु सेना की परिचालन क्षमताओं, रक्षा नीतियों और सामरिक रिपोर्टिंग की गहन जानकारी दी जाती है। 3 सप्ताह तक चले इस पाठ्यक्रम में 24 पत्रकारों को अग्रिम इलाकों के दौरों और सैन्य अधिकारियों के साथ संवाद के जरिए रक्षा संबंधी समाचारों की जिम्मेदार रिपोर्टिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
तीन सप्ताह तक चले इस व्यापक पाठ्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना की रणनीतिक भूमिकाओं, आधुनिक रक्षा प्रणालियों और परिचालन चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। पत्रकारों ने प्रशिक्षण के अलग-अलग चरणों में हिस्सा लिया और अग्रिम सैन्य ठिकानों तथा परिचालन क्षेत्रों का दौरा भी किया।
सैन्य रिपोर्टिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा का संतुलन
रक्षा रिपोर्टिंग किसी भी सामान्य पत्रकारिता से काफी अलग और संवेदनशील मानी जाती है। इसमें एक ओर जहां जनता तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाना आवश्यक होता है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य अभियानों की गोपनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। इस पाठ्यक्रम के जरिए पत्रकारों को यही संतुलन बनाए रखने का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण सत्रों, फील्ड विजिट्स और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ हुए संवाद के माध्यम से पत्रकारों ने यह समझा कि युद्ध या आपात स्थिति के समय रिपोर्टिंग करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए। रक्षा बलों और मीडिया के बीच इस तरह का सीधा संवाद दोनों संस्थाओं के बीच आपसी समझ को गहरा करता है।
समापन समारोह में गजराज कोर कमांडिंग की मौजूदगी
इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह की अध्यक्षता भारतीय थल सेना की गजराज कोर (4 कोर) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला ने की। उन्होंने प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी 24 पत्रकारों को बधाई दी और रक्षा समाचारों के कवरेज में जिम्मेदारी तथा सटीकता के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया एवं संचार) विजय कुमार और जनसंपर्क निदेशालय (DPR) के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने रेखांकित किया कि मीडिया और रक्षा बल दोनों ही समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और इस तरह के पाठ्यक्रम से जिम्मेदार रक्षा पत्रकारिता को नई दिशा मिलती है।
रक्षा संवाददाता पाठ्यक्रम के मुख्य पहलू
- तीन सेनाओं का प्रशिक्षण: थल सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों अंगों के संचालन और हथियारों की जानकारी दी गई।
- क्षेत्रीय दौरे (Field Visits): पत्रकारों को वास्तविक परिस्थितियों और जमीनी चुनौतियों को समझने के लिए अग्रिम सैन्य क्षेत्रों में ले जाया गया।
- संवेदनशीलता का पाठ: सैन्य अभियानों, रक्षा प्रोटोकॉल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी खबरों में गोपनीयता के नियमों को समझाया गया।
- सीधा संवाद: रक्षा अधिकारियों और पत्रकारों के बीच संवाद से परस्पर विश्वास और पेशेवर तालमेल बढ़ा।
यह भी जानें: तेजपुर और गजराज कोर का सामरिक महत्व
असम का तेजपुर शहर भारतीय सेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक केंद्र है। यहां भारतीय सेना की 4 कोर स्थित है, जिसे ‘गजराज कोर’ के नाम से भी जाना जाता है। गजराज कोर पूर्वोत्तर भारत में भारत-चीन सीमा (वास्तविक नियंत्रण रेखा) की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है।
पूर्वोत्तर के इस संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में रक्षा संवाददाता पाठ्यक्रम का आयोजन पत्रकारों को यह समझाने में मदद करता है कि दुर्गम पहाड़ियों, जंगलों और सीमावर्ती इलाकों में हमारे जवान किस प्रकार की परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। इससे पत्रकारों को जमीनी हकीकत का अनुभव होता है, जो उनकी रिपोर्टिंग में दिखाई देता है।
मीडिया और रक्षा बलों के मजबूत संबंध
आज के डिजिटल दौर में गलत जानकारियों और फेक न्यूज का प्रसार तेजी से होता है। ऐसे में रक्षा मामलों की सटीक और प्रमाणिक रिपोर्टिंग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह पाठ्यक्रम पत्रकारों को सैन्य तकनीकी शब्दावली, रैंक संरचना, और रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को सही ढंग से समझने में सक्षम बनाता है।
जब पत्रकार रक्षा मामलों को बेहतर तरीके से समझते हैं, तो वे आम जनता तक रक्षा नीतियों और सैन्य कार्रवाइयों की सही तस्वीर पहुंचा पाते हैं। इससे न केवल जनता में जागरूकता बढ़ती है, बल्कि सशस्त्र बलों के मनोबल पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? रक्षा संवाददाता पाठ्यक्रम में कितने पत्रकारों ने भाग लिया?
उत्तर। इस पाठ्यक्रम में देश भर के कुल 24 पत्रकारों ने भाग लिया और तीन सप्ताह का प्रशिक्षण पूरा किया।
प्रश्न? तेजपुर में आयोजित समापन समारोह की अध्यक्षता किसने की?
उत्तर। समापन समारोह की अध्यक्षता गजराज कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला ने की।
प्रश्न? इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर। इसका मुख्य उद्देश्य पत्रकारों को थल सेना, नौसेना और वायु सेना की क्षमताओं से अवगत कराना और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदार रक्षा रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण देना है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






