
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों में धान की कटाई के मौसम के दौरान पुआल जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया।
मुख्य बातें
- सीएक्यूएम के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एस.डी. अत्री की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय टीम ने पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों का दौरा किया।
- आयोग ने पंजाब के 18 जिलों में 01.10.2026 से 30.11.2026 तक की अवधि के लिए ‘फ्लाइंग स्क्वाड’ तैनात किए हैं।
- अमृतसर और तरनतारन जिलों में धान के पराली के इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए बेलर मशीनें और कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एस.डी. अत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय टीम ने पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों का दौरा किया। धान की कटाई के वर्तमान मौसम में इन दोनों जिलों की पहचान धान की पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट जिलों के रूप में की गई है। इस क्षेत्र भ्रमण के दौरान आगंतुक टीम ने अमृतसर में दोनों जिलों के उपायुक्तों तथा अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
पराली जलाने के मामलों को रोकने के लिए सीएक्यूएम ने की अमृतसर और तरनतारन की समीक्षा
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण का एक मुख्य कारण धान की पुआल जलाना है। इसे कम करने और समाप्त करने के लिए आयोग ने फ्लाइंग स्क्वाड्स की तैनाती के साथ कड़े कदम उठाए हैं। समीक्षा बैठक के दौरान धान की पराली के इन-सीटू (खेत में ही) और एक्स-सीटू (खेत के बाहर) इस्तेमाल को असरदार बनाने के लिए विभागों के आपसी तालमेल पर विशेष बल दिया गया। आयोग ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें समय पर उपलब्ध कराने और जागरूकता गतिविधियां चलाने के निर्देश दिए हैं।
हॉटस्पॉट गांवों का दौरा और ज़मीनी जायज़ा
सीएक्यूएम की टीम ने दिनांक 09.10.2026 और 10.10.2026 को अमृतसर और तरनतारन जिलों के चुने हुए हॉटस्पॉट गांवों और सुविधाओं का क्षेत्र दौरा किया। इसका मुख्य उद्देश्य जमीनी स्थिति का जायजा लेना और पराली जलाने से रोकने के उपायों के क्रियान्वयन की समीक्षा करना था। अमृतसर जिले में फसल की कटाई, खरीद की स्थिति और सीआरएम मशीनरी की उपलब्धता पर चर्चा की गई। प्रशासन ने जिला प्रशासनिक परिसर में एक कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क भी स्थापित किया है ताकि जरूरतमंद किसानों को मशीनरी आसानी से मिल सके।
- पंजाब के 18 जिलों में 1 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए गए हैं।
- अमृतसर और तरनतारन जिलों में धान के अवशेष के प्रबंधन के लिए बेलर मशीनें और बॉयलर उद्योगों के साथ आपूर्ति श्रृंखला बनाई गई है।
- फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की मांग और शिकायतों के लिए जिला स्तर पर हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।
- नोडल और क्लस्टर अधिकारियों के माध्यम से हॉटस्पॉट क्षेत्रों में फील्ड पेट्रोलिंग और लगातार निगरानी की जा रही है।
पंजाब के 18 जिलों में फ्लाइंग स्क्वाड की तैनाती
निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आयोग ने पंजाब के कुल 18 जिलों में 01.10.2026 से 30.11.2026 तक की अवधि के लिए विशेष ‘फ्लाइंग स्क्वाड’ तैनात किए हैं। इन जिलों में संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब शामिल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नियमों को लागू करने में किसी भी प्रकार की ढील नहीं बरती जानी चाहिए।
एक्स-सीटू प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती
तरनतारन जिले में भी कटाई और खरीद की स्थिति के साथ सीआरएम मशीनरी की उपलब्धता की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए बेलर मशीनें बड़े पैमाने पर काम कर रही हैं और किसानों के लिए मशीनों की खरीद के लक्ष्य लगभग प्राप्त कर लिए गए हैं। आयोग ने किसानों, संग्राहकों, उद्योगों और अन्य हितधारकों के बीच घनिष्ठ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया है ताकि पुआल की गांठों का औद्योगिक बॉयलरों में उपयोग सुगम हो सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? सीएक्यूएम ने पंजाब के किन जिलों में फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए हैं?
उत्तर। आयोग ने पंजाब के 18 जिलों में 1 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक की अवधि के लिए फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए हैं।
प्रश्न? पराली जलाने की घटनाओं की जानकारी देने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
उत्तर। जिलों में कंट्रोल रूम, हेल्प डेस्क और जिला-स्तर पर हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं ताकि तुरंत कार्रवाई की जा सके।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






