मंगलवार, अक्टूबर 6, 2026

पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए पंजाब और हरियाणा में उड़न दस्ते तैनात

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पराली जलाने

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पंजाब और हरियाणा में धान के अवशेष जलाने से रोकने के लिए 34 जिलों में विशेष उड़न दस्ते तैनात किए हैं।

मुख्य बातें

  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा 01 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक की अवधि के लिए उड़न दस्ते तैनात किए गए हैं।
  • पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों को इस निगरानी प्रणाली के तहत कवर किया गया है।
  • इन टीमों में संगरूर, तरनतारन, करनाल, कैथल, हिसार और रोहतक जैसे प्रमुख धान उत्पादक जिले शामिल हैं।
  • उड़न दस्ते जमीनी हालात का जायजा लेकर प्रतिदिन सीएक्यूएम सेल को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ा दी है। इस सिलसिले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजे गए निर्देशों के आधार पर दोनों राज्यों के कुल 34 जिलों में विशेष उड़न दस्ते (फ्लाइंग स्क्वाड) उतारे गए हैं। यह तैनाती 01 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी, ताकि कटाई के इस पूरे मौसम में वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखा जा सके।

पराली जलाने की रोकथाम के लिए पंजाब और हरियाणा में उड़न दस्ते तैनात

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों में धान के अवशेष प्रबंधन के लिए फील्ड-लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत किया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसानों और स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर प्रदूषण के मुख्य कारणों पर समय रहते काबू पाना है।

धान कटाई के इस दौर में फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। तैनात किए गए उड़न दस्ते अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रहे हैं और जमीनी सच्चाइयों की परख कर रहे हैं। ये विशेष दल जिला-स्तरीय अधिकारियों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नुमाइंदों, राज्य सरकार के नोडल अधिकारियों और एसएएस नगर स्थित सीएक्यूएम सेल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि किसी भी नियम उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

कवर किए गए प्रमुख जिले और निगरानी की रूपरेखा

विभिन्न चरणों में बांटी गई इस कार्ययोजना के तहत दोनों राज्यों के सबसे ज्यादा धान उत्पादक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इन जिलों की सूची नीचे दी गई है:

  • पंजाब के जिले: संगरूर, तरनतारन, फ़िरोज़पुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फ़ाज़िल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फ़रीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फ़तेहगढ़ साहिब।
  • हरियाणा के जिले: जिंद, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, सोनीपत, रोहतक, सिरसा, करनाल, पलवल, झज्जर, कुरूक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, फरीदाबाद, पानीपत और हांसी।

इन सभी क्षेत्रों से प्रतिदिन की रिपोर्ट सीधे सीएक्यूएम सेल को भेजी जा रही है, जिससे आयोग को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की वायु गुणवत्ता का आकलन करने में मदद मिलती है।

इसका असर और पृष्ठभूमि

हर साल शरद ऋतु के आगमन के साथ ही उत्तर भारत के कई हिस्सों में पराली जलाने की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है, जिससे दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। इसी पृष्ठभूमि में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग जैसी केंद्रीय एजेंसियों का गठन किया गया था, जो राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर दीर्घकालिक समाधान पर काम करती हैं। उड़न दस्तों की यह मैदानी तैनाती प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने और स्थानीय स्तर पर नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

आयोग ने इस बात पर बार-बार जोर दिया है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए राज्य सरकारों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और जिला प्रशासन के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों का सक्रिय सहयोग भी उतना ही जरूरी है। समय पर मिलने वाली फील्ड रिपोर्टों के आधार पर आयोग भविष्य की रणनीतियों में बदलाव भी कर रहा है ताकि पराली जलाने के मामलों को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? पंजाब और हरियाणा में उड़न दस्ते कब से कब तक तैनात किए गए हैं?

उत्तर। ये फ्लाइंग स्क्वाड 01 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक की अवधि के लिए तैनात किए गए हैं।

प्रश्न? इस निगरानी प्रणाली के तहत कुल कितने जिलों को कवर किया गया है?

उत्तर। इसके तहत पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों समेत कुल 34 जिलों को कवर किया गया है।

प्रश्न? उड़न दस्तों की रिपोर्टिंग प्रणाली क्या है?

उत्तर। ये टीमें जमीनी हालात की रोजाना की जानकारी एसएएस नगर में स्थित सीएक्यूएम सेल को भेजती हैं।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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