
भारत और जापान ने नई दिल्ली में संयुक्त ऋण तंत्र के लिए परिचालन नियमावली का शुभारंभ किया है, जिसका उद्देश्य निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना है।
मुख्य बातें
- 30 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में संयुक्त ऋण तंत्र की परिचालन नियमावली जारी की गई।
- भारत में जापान के राजदूत केइची ओनो और तत्कालीन सचिव तन्मय कुमार ने इसका शुभारंभ किया।
- यह तंत्र पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करता है।
- 7 अगस्त 2025 को सहयोग ज्ञापन पर और 8 जून 2026 को कार्यान्वयन के नियमों पर हस्ताक्षर हुए थे।
भारत और जापान ने संयुक्त ऋण तंत्र के लिए परिचालन नियमावली का अधिकारिक रूप से शुभारंभ कर दिया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, यह कार्यक्रम 30 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस संयुक्त पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तकनीकी सहयोग को और अधिक मजबूत करना है।
संयुक्त ऋण तंत्र क्या है और इसके क्या लाभ हैं?
संयुक्त ऋण तंत्र (जेसीएम) के तहत भारत में उन्नत निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे जलवायु वित्त जुटाने में मदद मिलेगी और उच्च-स्तरीय ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी। यह प्रणाली अंतर्राष्ट्रीय कार्बन बाजारों में पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगी।
इस नई परिचालन नियमावली के आने से संस्थागत तैयारी का चरण अब पूरी तरह से कार्यान्वयन के चरण में बदल गया है। यह ढांचा पूरी परियोजना प्रक्रिया के लिए बेहद स्पष्ट और पारदर्शी नियम तय करता है। प्रोजेक्ट आइडिया नोट जमा करने से लेकर जेसीएम क्रेडिट के अंतिम रूप से जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया अब इसी नियमावली के तहत संचालित होगी।
पेरिस समझौते के तहत द्विपक्षीय सहयोग
यह पूरा कदम पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत भारत और जापान के बीच हो रहे द्विपक्षीय सहयोग को एक व्यावहारिक रूप देता है। दोनों मित्र देशों ने इससे पहले लंबी वार्ताओं और बैठकों के बाद इस दिशा में कई मील के पत्थर पार किए हैं।
- 7 अगस्त 2025 को दोनों देशों के बीच सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
- 8 जून 2026 को इसके कार्यान्वयन के नियम (आरओआई) आधिकारिक रूप से अपनाए गए थे।
- 30 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में इसकी परिचालन नियमावली का संयुक्त शुभारंभ हुआ।
- इस अवसर पर जापान के राजदूत और भारतीय अधिकारी उपस्थित रहे।
परियोजना का भविष्य और इसका असर
इस नई व्यवस्था के लागू होने से भारत में पर्यावरण के अनुकूल और सतत विकास परियोजनाओं को गति मिलने की पूरी उम्मीद है। आधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान से भारतीय उद्योगों को कम कार्बन उत्सर्जन वाले उपकरणों को अपनाने में आसानी होगी। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ पहुंचेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिबद्धता भी मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से देश में हरित ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। आने वाले महीनों में इस तंत्र के तहत कई नई परियोजनाओं के प्रस्ताव आने की संभावना है, जिनकी निगरानी दोनों देशों की संयुक्त समितियां करेंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? संयुक्त ऋण तंत्र का शुभारंभ कब और कहां हुआ? उत्तर। इस तंत्र की परिचालन नियमावली का शुभारंभ 30 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में किया गया।
प्रश्न? इस नियमावली को जारी करने में किन देशों की सहभागिता है? उत्तर। यह भारत और जापान के बीच एक द्विपक्षीय संयुक्त पहल है।
प्रश्न? यह किस समझौते के अंतर्गत आता है? उत्तर। यह पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत आता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






