
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 5 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन में स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति महामहिम श्री गी पारमेलां का स्वागत किया और रात्रिभोज दिया।
मुख्य बातें
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 5 अक्टूबर 2026 को स्विस राष्ट्रपति श्री गी पारमेलां की राष्ट्रपति भवन में मेजबानी की।
- भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लोकतंत्र और कानून के शासन जैसे साझा मूल्य हैं।
- स्विस कंपनियों ने भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र, सड़कों, रेलवे और सुरंगों के निर्माण में उल्लेखनीय निवेश किया है।
- यात्रा के दौरान प्रवासन, आवागमन, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर महत्वपूर्ण समझौते हुए।
भारत स्विट्जरलैंड संबंध और मजबूत हो रहे हैं क्योंकि भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 5 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन में स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति महामहिम श्री गी पारमेलां का स्वागत किया। इस उच्चस्तरीय मुलाकात के दौरान दोनों राष्ट्रप्रमुखों ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और उनके सम्मान में एक भव्य रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया।
भारत स्विट्जरलैंड संबंध क्या हैं और यह बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत स्विट्जरलैंड संबंध लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर टिके हुए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्विस राष्ट्रपति पारमेलां का स्वागत करते हुए व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और संस्कृति के क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की सराहना की। नियमित उच्चस्तरीय वार्ताओं और आदान-प्रदान से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को निरंतर गति मिलती रही है, जिससे आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर नए रास्ते खुलते हैं।
प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के मोर्चे पर ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने के बाद सहयोग के नए द्वार खुले हैं। इस आर्थिक साझेदारी के माध्यम से दोनों देशों के बीच व्यापार विस्तार और निवेश के अवसरों में भारी वृद्धि की उम्मीद की जा रही है, जो भविष्य के आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
बुनियादी ढांचे और तकनीक में स्विस कंपनियों की भूमिका
स्विस कंपनियों ने भारत के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया है। देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में स्विस फर्मों की मौजूदगी बेहद मजबूत है, जिसमें मुख्य रूप से सड़क निर्माण, रेलवे पुल और जटिल सुरंगों का निर्माण शामिल है। राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में यह भी रेखांकित किया कि स्विस कंपनियां अब स्वच्छ एवं हरित प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे आधुनिक और उभरते हुए क्षेत्रों में भी नए अवसरों की तलाश कर सकती हैं।
- भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लोकतंत्र और कानून के शासन के साझा मूल्य हैं।
- स्विस कंपनियों ने भारत के सड़क, रेलवे पुल और सुरंग निर्माण में उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई है।
- प्रवासन और आवागमन, अनुसंधान तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर नए समझौते हुए हैं।
- यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ समझौते से व्यापारिक विस्तार के नए अवसर बने हैं।
भारत स्विट्जरलैंड संबंध और नए समझौतों का असर
इस आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने वाले कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें मुख्य रूप से प्रवासन और आवागमन, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र शामिल हैं। इन समझौतों से दोनों देशों के नागरिकों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के बीच संपर्क और अधिक सुगम हो जाएगा, जिससे तकनीकी और बौद्धिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
दोनों ही देशों के नेताओं ने इस बात पर पूर्ण सहमति व्यक्त की कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच का यह प्रगाढ़ सहयोग दोनों राष्ट्रों की आम जनता के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। इस यात्रा से न केवल मौजूदा कूटनीतिक बंधन मजबूत होंगे, बल्कि भविष्य में आपसी विश्वास और साझेदारी के नए आयाम स्थापित होंगे जो वैश्विक मंच पर भी सकारात्मक संदेश देंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? भारत की राष्ट्रपति ने स्विस राष्ट्रपति की मेजबानी कब की? उत्तर। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 5 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन में स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति का स्वागत किया।
प्रश्न? भारत और स्विट्जरलैंड के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है? उत्तर। व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






