
केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की राजस्थान इकाई ने महात्मा गांधी की जयंती और राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस पर अफीम उत्पादक क्षेत्रों तथा शैक्षणिक संस्थानों में विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किए।
मुख्य बातें
- केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) राजस्थान इकाई द्वारा 2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया गया।
- कोटा विश्वविद्यालय में ‘ऑपरेशन युवा रक्षा’ के तहत एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।
- कोटा के उप-नारकोटिक्स आयुक्त नरेश बुंदेल ने छात्रों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में बताया।
- कोटा संभाग, झालावाड़, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ के अफीम खेती वाले गांवों में जागरूकता और स्वच्छता अभियान चलाए गए।
राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की राजस्थान इकाई ने अफीम की खेती वाले प्रमुख जिलों में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों और स्वच्छता अभियानों का आयोजन किया। यह पहल राष्ट्रपिता श्री महात्मा गांधी की जयंती के दिन, 2 अक्टूबर 2026 को क्रियान्वित की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदायों और युवाओं को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से दूर रखना था।
राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस पर केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की विशेष पहल
राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस के तहत केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, कोटा द्वारा ‘ऑपरेशन युवा रक्षा’ कार्यक्रम चलाया गया। कोटा विश्वविद्यालय में आयोजित इस मुख्य सत्र में छात्रों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया। कोटा के उप-नारकोटिक्स आयुक्त श्री नरेश बुंदेल ने युवा पीढ़ी को नशे के जाल से बचाने के लिए ‘फास्ट माइंड’ और ‘स्लो माइंड’ की कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पहली बार का छोटा सा सेवन आदत और गंभीर निर्भरता में बदल सकता है।
अफीम उत्पादक क्षेत्रों में जागरूकता अभियान
केवल शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित न रहते हुए, सीबीएन के विभिन्न जिला नारकोटिक्स कार्यालयों (डीओओ) ने अफीम उत्पादक ग्रामीण इलाकों में भी कई कार्यक्रम आयोजित किए। इन आयोजनों का उद्देश्य किसानों को अवैध मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना और उन्हें नशामुक्त समाज के निर्माण में भागीदार बनाना था।
- झालावाड़ के डीओओ ने झालरापाटन तहसील के बाबरीखड़ा गांव में समुदाय की भागीदारी पर जोर दिया।
- भीलवाड़ा के डीओओ ने सवाईपुर-बडाला बाईपास हाईवे पर सैकड़ों किसानों और स्थानीय निवासियों के साथ सभा की।
- चित्तौड़गढ़-I द्वारा उदयपुर की वल्लभनगर तहसील के मेणार गांव में स्वच्छता और नशा मुक्ति अभियान चलाया गया।
- चित्तौड़गढ़-III ने मंगरोल गांव में ग्राम सभा की कार्यवाही के दौरान नशीले पदार्थों के शारीरिक और मानसिक दुष्परिणामों पर चर्चा की।
- प्रतापगढ़-II ने छोटी सादड़ी के गोमाना गांव में स्वच्छता संदेश के साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
सामुदायिक भागीदारी और शपथ ग्रहण समारोह
आयोजित सभी कार्यक्रमों में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि जब तक स्थानीय किसान और ग्रामीण खुद आगे नहीं आएंगे, तब तक पूरी तरह से नशा मुक्त समाज का लक्ष्य पाना कठिन है। सत्रों के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने नशीले पदार्थों से दूर रहने की शपथ ली। अधिकारियों ने बताया कि महात्मा गांधी के आत्म-अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व के विचार आज भी मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ा मार्गदर्शन हैं।
इसका असर और आगामी रूपरेखा
अफीम की व्यावसायिक खेती वाले क्षेत्रों में इस प्रकार के सरकारी अभियानों से किसानों में कानूनी नियमों और स्वास्थ्य दोनों को लेकर जागरूकता बढ़ती है। नारकोटिक्स विभाग का यह प्रयास न केवल अवैध तस्करी को रोकने में सहायक बनता है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को सही दिशा भी दिखाता है। आने वाले महीनों में भी ऐसे नुक्कड़ नाटक, ग्राम सभा बैठकें और स्कूल-कॉलेज सत्र जारी रहने की संभावना है ताकि जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर। यह दिवस हर साल 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।
प्रश्न? इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर। अफीम खेती वाले क्षेत्रों के किसानों और युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और नशा मुक्त भारत का संदेश फैलाना।
प्रश्न? यह कार्यक्रम राजस्थान में किसके द्वारा आयोजित किया गया?
उत्तर। यह कार्यक्रम केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की राजस्थान इकाई और उसके विभिन्न जिला नारकोटिक्स कार्यालयों द्वारा आयोजित किया गया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






