
गाजियाबाद के सफाईकर्मी अजय कुमार ने नमस्ते योजना के तहत सीवर सक्शन मशीन खरीदकर अपनी आय बढ़ाई और परिवार को आर्थिक स्थिरता दी।
मुख्य बातें
- गाजियाबाद के 39 वर्षीय अजय कुमार ने नमस्ते योजना के अंतर्गत सीवर सक्शन मशीन खरीदकर अपना उद्यम शुरू किया।
- 11.34 लाख रुपये की कुल परियोजना लागत में 4,08,500 रुपये की अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी और 7,25,500 रुपये का ऋण मिला।
- मशीनीकृत सफाई से अजय की मासिक आय बढ़कर 30,000 से 35,000 रुपये हो गई है, जिसमें 10,000 से 20,000 रुपये की शुद्ध बचत शामिल है।
- बढ़ी हुई आय से वे अपनी तीन बेटियों की पढ़ाई और मां के नियमित डायलिसिस का खर्च सुचारू रूप से उठा रहे हैं।
केंद्र सरकार की नमस्ते योजना (NAMASTE) के अंतर्गत संचालित स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) ने गाजियाबाद के एक सीवर सफाईकर्मी अजय कुमार को खुद का कारोबार स्थापित करने में मदद दी है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित मोहन नगर क्षेत्र के राजीव कॉलोनी निवासी 39 वर्षीय अजय कुमार ने मशीनीकृत सीवर सफाई उपकरण खरीदकर अपनी मासिक आय 30 से 35 हजार रुपये तक पहुंचा दी है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई पूंजीगत सब्सिडी और वित्तीय सहायता के माध्यम से उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक चुनौतियों पर विजय प्राप्त की है।
स्वच्छता उद्यमी योजना से कैसे बदला जीवन?
केंद्र सरकार की नमस्ते योजना के तहत वाल्मीकि समुदाय के स्वच्छता कर्मियों को मशीनीकृत उपकरण खरीदने के लिए पूंजीगत सब्सिडी और रियायती ऋण प्रदान किया जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य खतरनाक सीवर सफाई प्रथाओं को समाप्त करना और स्वच्छता कर्मियों को मशीनों का मालिक बनाकर उद्यमी बनाना है। इसके माध्यम से अजय कुमार ने 11.34 लाख रुपये की लागत से सीवर सक्शन मशीन खरीदी और अपनी मासिक बचत 10 से 20 हजार रुपये तक बढ़ा ली।
गाजियाबाद के अजय कुमार की स्थिति और शुरुआती संघर्ष
गाजियाबाद नगर निगम के मोहन नगर जोन में काम करने वाले अजय कुमार की कहानी वित्तीय तंगी से निकलकर आत्मनिर्भरता पाने की यात्रा है। कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के कारण अजय केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ाई कर सके थे। कम उम्र में ही पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें मजदूरी और स्वच्छता कार्यों में उतरना पड़ा। वर्षों तक उन्होंने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का हाथ से काम किया।
पारिवारिक परिस्थितियों ने उनकी चुनौतियों को और बढ़ा दिया था। अजय के परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटियां और बीमार मां हैं। उनकी बड़ी बेटी 13 वर्ष की है और चौथी कक्षा में पढ़ती है, दूसरी बेटी 11 वर्ष की है और तीसरी कक्षा में पढ़ती है, जबकि सबसे छोटी बेटी 3 वर्ष की है। उनकी पत्नी गृहिणी हैं। परिवार पर सबसे बड़ा आर्थिक बोझ उनकी मां के इलाज का था, जिन्हें नियमित रूप से डायलिसिस की आवश्यकता होती है। सीमित आय और बढ़ते मेडिकल खर्चों के कारण परिवार लगातार कर्ज और तंगी में बना रहता था।
वित्तीय सहायता और सीवर सक्शन मशीन का ब्योरा
अजय कुमार के जीवन में बदलाव 11 अक्टूबर 2021 को आया, जब सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत नमस्ते योजना के स्वच्छता उद्यमी योजना घटक के माध्यम से उन्हें वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई। इस परियोजना के तहत उन्होंने एक ट्रैक्टर-कम-सीवर सक्शन मशीन खरीदी।
इस परियोजना की कुल वित्तीय संरचना निम्नलिखित है:
- कुल परियोजना लागत: 11,34,000 रुपये
- अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy): 4,08,500 रुपये
- स्वीकृत ऋण राशि: 7,25,500 रुपये
- मासिक किस्त (EMI): 11,460 रुपये
- वर्तमान शेष ऋण राशि: 1,03,000 रुपये
- सफाई से वर्तमान मासिक आय: 30,000 रुपये से 35,000 रुपये
- मासिक शुद्ध बचत: 10,000 रुपये से 20,000 रुपये (किस्त और परिचालन खर्च के बाद)
मशीनीकृत उपकरण मिलने से अजय कुमार गाजियाबाद नगर निगम के मोहन नगर क्षेत्र में अधिक क्षमता और सुरक्षा के साथ काम करने लगे। मशीन के आने से काम की रफ्तार बढ़ी और उन्हें नए अनुबंध भी मिलने लगे। वर्तमान में वे अपनी बैंक किस्त चुकाने के बाद भी हर महीने 10 से 20 हजार रुपये बचा लेते हैं। इससे उनकी बेटियों की पढ़ाई और मां के डायलिसिस का खर्च सुचारू रूप से चल रहा है। अजय कुमार के अनुसार, सरकारी सहायता से मिले मशीनीकृत साधनों ने उन्हें समाज में सम्मानजनक आजीविका और नया आत्मविश्वास दिया है।
यह भी जानें: क्या है नमस्ते योजना और इसका उद्देश्य?
राष्ट्रीय यांत्रिक स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्य योजना यानी नमस्ते योजना (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की संयुक्त पहल है। इस योजना की शुरुआत भारत भर में सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक मैनुअल सफाई को पूरी तरह से बंद करने के उद्देश्य से की गई थी।
नमस्ते योजना के अंतर्गत निम्नलिखित प्राथमिकताएं तय की गई हैं:
पहला, सीवर सफाई के दौरान किसी भी कर्मचारी की मौत न हो और सभी सफाई कार्य मशीनों से किए जाएं। दूसरा, सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कर्मचारियों की पहचान कर उन्हें वैकल्पिक आजीविका और मशीनीकृत उपकरणों के लिए वित्तीय सहायता दी जाए। तीसरा, स्वच्छता कर्मियों को स्वयं सहायता समूहों या व्यक्तिगत उद्यमियों के रूप में संगठित कर उन्हें रियायती ब्याज दर पर ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाए।
योजना के तहत पात्र स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षा पीपीई किट, स्वास्थ्य बीमा, आयुष्मान भारत कार्ड और तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाता है। स्वदेशी तकनीक और आधुनिक सक्शन मशीनों के उपयोग से नगर निकायों में स्वच्छता सेवा की गुणवत्ता में सुधार आया है।
इसका असर: स्वच्छता कर्मियों के जीवन में सामाजिक और आर्थिक सुधार
गाजियाबाद जैसे औद्योगिक शहरों में सीवर नेटवर्क का रख-रखाव हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। पारंपरिक रूप से हाथ से सीवर सफाई करने वाले कर्मियों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों, सामाजिक उपेक्षा और बेहद कम मजदूरी का सामना करना पड़ता था। नमस्ते योजना के स्वच्छता उद्यमी घटक से मशीनीकरण को बढ़ावा मिलने के बाद स्थिति में सुधार हुआ है।
जब एक सफाईकर्मी मजदूर से मशीन का मालिक बनता है, तो उसकी सामाजिक स्थिति बदलती है। अजय कुमार जैसे उदाहरण यह स्पष्ट करते हैं कि पूंजीगत सब्सिडी और आसान ऋण सुविधाओं से वंचित वर्गों के लोग भी सफल उद्यमी बन सकते हैं। इससे न केवल उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिलती है, बल्कि उनकी आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य के रास्ते भी खुलते हैं। नगर निगमों को भी कुशल और यांत्रिक स्वच्छता सेवाएं मिलती हैं, जिससे शहरी सीवर हादसों में कमी आती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? नमस्ते योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर। नमस्ते योजना का उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंकों की असुरक्षित सफाई को समाप्त करना और सफाई कर्मियों को आधुनिक मशीनों के माध्यम से सुरक्षित तथा सम्मानजनक आजीविका प्रदान करना है।
प्रश्न? स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत अजय कुमार को कितनी सब्सिडी मिली?
उत्तर। गाजियाबाद के अजय कुमार को 11.34 लाख रुपये की कुल परियोजना लागत पर 4,08,500 रुपये की अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी और 7,25,500 रुपये का ऋण प्रदान किया गया।
प्रश्न? नमस्ते योजना किस केंद्रीय मंत्रालय द्वारा संचालित की जाती है?
उत्तर। यह योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से संचालित की जाती है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






