
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है और दुनिया भर के नेताओं के बीच सकारात्मक चर्चा की उम्मीद जताई है।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 सितंबर 2026 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर बयान दिया।
- पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया।
- सुभाषितम् के जरिए आपसी सद्भावना, संवाद और मैत्रीपूर्ण संबंधों पर जोर दिया गया है।
- आने वाले दिनों में दुनियाभर के नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जुटेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू होने से ठीक पहले एक प्राचीन संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक एवं सार्थक बातचीत के महत्व पर विशेष जोर दिया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस श्लोक के माध्यम से विश्व कल्याण की भावना को आगे बढ़ाने की बात कही है। आने वाले कुछ दिनों में दुनिया भर के तमाम देशों के नेता इस बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर इकट्ठा होने जा रहे हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संबंध में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि यह आयोजन विश्व कल्याण की भावना से प्रेरित होगा। इस सम्मेलन के दौरान वैश्विक महत्व के विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होने की पूरी उम्मीद है। सरकारी सूत्रों और आधिकारिक बयानों के मुताबिक, भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी सहयोग और शांति का पक्षधर रहा है।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए संस्कृत सुभाषितम् का अर्थ है कि मनुष्य को हमेशा गुणी जनों की संगति करनी चाहिए। श्लोक के अनुसार, समझदार और अच्छे लोगों के साथ ही विवाद और मित्रता रखनी चाहिए, क्योंकि इससे समाज और दुनिया में शांति व सहयोग मजबूत होता है। ऐसे प्राचीन मूल्यों का वैश्विक मंच पर स्मरण कराना कूटनीतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से अहम माना जाता है।
सद्भिरेव सहासीत: क्या है इस सुभाषितम् का अर्थ?
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शेयर किया गया श्लोक इस प्रकार है – ‘सद्भिरेव सहासीत सद्भिः कुर्वीत सङ्गतिम्। सद्भिर्विवादं मैत्रीं च नासद्भिः किंचिदाचरेत्॥’ इस सुभाषितम् की गहराई इस बात में है कि जीवन में अच्छे और सज्जन लोगों का साथ इंसान को सही दिशा दिखाता है। कूटनीतिक रूप से भी यह संदेश दिया गया है कि राष्ट्रों के बीच संवाद और मेलजोल आपसी विश्वास को बढ़ाने का सबसे बेहतरीन माध्यम है।
- प्रधानमंत्री ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक।
- दुनियाभर के नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा।
- विश्व कल्याण की कामना के साथ होगी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा।
- सद्भावना और संवाद से शांति को मजबूत करने का संदेश।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का महत्व और पृष्ठभूमि
ब्रिक्स (BRICS) दुनिया की प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल हैं, जिनका वैश्विक जीडीपी और जनसंख्या में एक बड़ा हिस्सा है। इस समूह की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार को बढ़ावा देना और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार लाना है। समय के साथ ब्रिक्स का दायरा और प्रभाव काफी बढ़ा है, और आज यह वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करने वाला एक अहम मंच बन चुका है।
जब भी दुनिया के बड़े नेता इस समूह की बैठकों के लिए जमा होते हैं, तो वैश्विक व्यापार, जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी साझेदारी जैसे विषयों पर गंभीर मंथन होता है। भारत की भूमिका हमेशा से इन वार्ताओं में एक सेतु का काम करने की रही है, जो विकासशील देशों के हितों को प्रमुखता से रखती है।
इसका असर और कूटनीतिक मायने
इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से केवल व्यापारिक समझौते ही नहीं होते, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को भी नई गति मिलती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस सांस्कृतिक और दार्शनिक संदेश को साझा करने से वैश्विक कूटनीति में भारतीय संस्कृति के प्राचीन मूल्यों की छाप दिखाई देती है। आम नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ऐसे आयोजनों से वैश्विक स्तर पर जो फैसले होते हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और शांति को प्रभावित करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालातों में संवाद ही एकमात्र रास्ता है। जब देश आपस में मिलकर बैठते हैं, तो सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे साझा मुद्दों पर ठोस रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री ने कौन सा संदेश दिया?
उत्तर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए विश्व कल्याण की भावना और सकारात्मक चर्चा की उम्मीद जताई है।
प्रश्न? इस साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कौन शामिल होगा?
उत्तर। दुनिया भर के विभिन्न देशों के शीर्ष नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जुटेंगे।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






