बुधवार, अक्टूबर 21, 2026

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने बांटे 200 करोड़ रुपये

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने जैव संसाधनों तक पहुंच और लाभ-साझाकरण (एबीएस) ढांचे के तहत कुल 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित कर दी है।

मुख्य बातें

  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने एबीएस के तहत कुल संचयी वितरण में 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया।
  • नवीनतम चरण में 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और 5 केन्द्र शासित प्रदेश परिषदों को 8.23 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
  • यह राशि करेला, भिंडी, मिर्च और प्याज जैसे जैव संसाधनों के उपयोग के एवज में बीज कंपनियों से प्राप्त हुई है।
  • मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र चारों फसलों के लिए सबसे अधिक राशि प्राप्त करने वाले शीर्ष दो राज्य बने हैं।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने भारत के जैव संसाधनों के संरक्षण और उनके लाभ-साझाकरण के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर छू लिया है। पीआईबी के अनुसार, संस्था ने एबीएस ढांचे के अंतर्गत संचयी रूप से वितरित की जाने वाली कुल राशि में 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए प्राधिकरण ने 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और 5 केन्द्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के लिए 8.23 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के ताजा वितरण की मुख्य बातें

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह धनराशि करेला, भिंडी, मिर्च और प्याज जैसे कृषि संबंधी जैव संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से जुटाई गई है। इन संसाधनों का उपयोग करने वाली प्रमुख बीज कंपनियों में मैसर्स ननहेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स बायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। कंपनियों ने अनुसंधान और कमर्शियल कार्यों के लिए इन संसाधनों तक पहुंच बनाई थी।

चूंकि ये जैव संसाधन खुले बाजारों या व्यापारियों के माध्यम से एकत्र किए गए थे, इसलिए इन्हें किसी एक विशिष्ट किसान या स्रोत समुदाय से सीधे तौर पर जोड़ पाना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और प्राधिकरण के अनुमोदन के बाद, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर खेती के क्षेत्रफल के अनुपात में राज्यों को यह हिस्सा वितरित किया जा रहा है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा राज्यों को फंड आवंटन

संबंधित फसलों की खेती के क्षेत्रफल और योगदान के आधार पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। मध्य प्रदेश को करेला, मिर्च और प्याज की खेती के चलते सबसे अधिक राशि मिली है, जबकि महाराष्ट्र को प्याज की खेती के कुल क्षेत्रफल में 49 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के कारण बड़ा हिस्सा मिला है। शीर्ष दस राज्यों की सूची इस प्रकार है:

  • मध्य प्रदेश: 1,17,39,914 रुपये
  • महाराष्ट्र: 1,01,30,649 रुपये
  • आंध्र प्रदेश: 75,55,077 रुपये
  • कर्नाटक: 65,22,893 रुपये
  • गुजरात: 64,05,708 रुपये

प्राप्त होने वाली इन निधियों का उपयोग जैव विविधता कानून, 2002 की धारा 32(2) के अंतर्गत निर्धारित विभिन्न विकास कार्यों में किया जाना अनिवार्य है। इसमें लोक जैव विविधता रजिस्टरों का दस्तावेजीकरण, पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन, जैव विविधता विरासत स्थलों को मजबूत करना और सामुदायिक आजीविका में सुधार जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं और भविष्य की रूपरेखा

भारत सरकार जैव विविधता पर कन्वेंशन और नागोया प्रोटोकॉल के साथ-साथ कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क के लक्ष्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जैव संसाधनों के वाणिज्यिक दोहन से होने वाले फायदों का निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारा हो सके। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के ये प्रयास देश के ग्रामीण समुदायों और प्राकृतिक धरोहरों को संबल प्रदान करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा वितरित राशि का मुख्य स्रोत क्या है?

उत्तर। यह राशि करेला, भिंडी, मिर्च और प्याज जैसे जैव संसाधनों के अनुसंधान और वाणिज्यिक उपयोग के लिए बीज कंपनियों द्वारा दिए गए भुगतान से प्राप्त हुई है।

प्रश्न? जिन संसाधनों का कोई एक विशिष्ट मालिक न हो, उनके लाभ का वितरण कैसे तय होता है?

उत्तर। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार संबंधित फसलों के खेती के क्षेत्रफल के आधार पर यह राशि विभिन्न राज्यों के जैव विविधता बोर्डों को बांटी जाती है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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