शनिवार, सितम्बर 5, 2026

महात्मा गांधी के प्रमुख आंदोलन और उनका इतिहास

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गांधी के आंदोलन

महात्मा गांधी के प्रमुख आंदोलनों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा तय की और अहिंसा के बल पर ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी।

मुख्य बातें

  • चंपारण सत्याग्रह (1917) गांधी का भारत में पहला सफल सविनय अवज्ञा आंदोलन था।
  • असहयोग आंदोलन (1920-22) ने जनता को ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थाओं का खुलकर बहिष्कार करना सिखाया।
  • नमक सत्याग्रह (1930) ने दांडी यात्रा के जरिए पूरे देश को एकजुट किया।
  • भारत छोड़ो आंदोलन (1942) ने अंग्रेजों के भारत छोड़ने की अंतिम चेतावनी दी।

गांधी के आंदोलन क्या हैं?

गांधी के आंदोलन वे ऐतिहासिक अहिंसक संघर्ष और सत्याग्रह थे, जिन्हें महात्मा गांधी के नेतृत्व में ब्रिटिश औपपनिवेशिक शासन के खिलाफ चलाया गया था। इन आंदोलनों ने सत्य, अहिंसा और जन-भागीदारी को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का मुख्य हथियार बनाया और देश को आजाद कराने में निर्णायक भूमिका निभाई।

सत्याग्रह और अहिंसा का मूल सिद्धांत

महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए सभी आंदोलनों की रीढ़ सत्याग्रह और अहिंसा थी। सत्याग्रह का अर्थ है सत्य के लिए आग्रह या बिना हिंसा किए अन्याय का विरोध करना। गांधीजी का मानना था कि विरोधी को हराने के बजाय उसका हृदय परिवर्तन किया जाना चाहिए। इन आंदोलनों में समाज के हर वर्ग, जैसे किसान, मजदूर, महिलाएं और युवा, ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

चंपारण सत्याग्रह (1917)

चंपारण सत्याग्रह गांधी के आंदोलन की श्रृंखला में सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम था। बिहार के चंपारण जिले में यूरोपीय बागान मालिक किसानों को अपनी जमीन के एक बड़े हिस्से पर नील की खेती करने के लिए मजबूर करते थे। इसे तिनकठिया पद्धति कहा जाता था। गांधीजी ने यहाँ पहुंचकर स्थानीय किसानों की समस्याओं को सुना और बिना हिंसा के पहला सफल सत्याग्रह किया। ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और किसानों की जीत हुई।

खेड़ा सत्याग्रह और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918)

गुजरात के खेड़ा जिले में फसल खराब होने के बावजूद किसानों से पूरा लगान वसूला जा रहा था। गांधीजी ने किसानों को लगान न चुकाने का आह्वान किया। इसी साल अहमदाबाद में मिल मजदूरों और मालिकों के बीच बोनस को लेकर विवाद था, जिसमें गांधीजी ने मजदूरों के हक में पहली बार भूख हड़ताल का सफल प्रयोग किया। इन दोनों संघर्षों ने स्थानीय स्तर पर जनता का आत्मविश्वास बढ़ाया।

असहयोग आंदोलन (1920-1922)

असहयोग आंदोलन देशव्यापी स्तर पर चलाया गया पहला बड़ा जन-आंदोलन था। 1920 में नागपुर अधिवेशन के बाद इस आंदोलन की विधिवत शुरुआत हुई। इसके तहत सरकारी नौकरियों, उपाधियों, अदालतों, स्कूलों और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया गया। हालांकि, फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की घटना में हिंसा भड़कने के बाद गांधीजी ने इस आंदोलन को अचानक वापस ले लिया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन और नमक मार्च (1930)

सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत ऐतिहासिक दांडी मार्च के साथ हुई थी। ब्रिटिश सरकार ने नमक पर कर लगा रखा था और उसके उत्पादन पर एकाधिकार कर लिया था। गांधीजी ने अपने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक 240 मील की पैदल यात्रा की। 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़कर उन्होंने पूरे देश में सविनय अवज्ञा की लहर दौड़ा दी।

भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

अगस्त 1942 में मुंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पास हुआ। गांधीजी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया। यह ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतिम और सबसे आक्रामक जन-आंदोलन था। हालांकि बड़े नेताओं को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन देश के कोने-कोने में जनता ने स्वतःस्फूर्त तरीके से इस आंदोलन को आगे बढ़ाया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? गांधी का पहला आंदोलन कौन सा था?
उत्तर। चंपारण सत्याग्रह (1917) भारत में गांधी का पहला सफल सत्याग्रह था।

प्रश्न? असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया गया?
उत्तर। उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में हुई हिंसक घटना के कारण गांधीजी ने इसे रोक दिया।

प्रश्न? दांडी यात्रा कब शुरू हुई थी?
उत्तर। दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुई थी।

प्रश्न? ‘करो या मरो’ का नारा किस आंदोलन से जुड़ा है?
उत्तर। यह नारा 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान दिया गया था।

यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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