सोमवार, अगस्त 31, 2026

भारत चिली सीईपीए वार्ता: दोनों देशों के बीच व्यापार को मिलेगी रफ्तार

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भारत चिली सीईपीए

सैंटियागो में आयोजित बैठक में भारत के वाणिज्य सचिव और चिली की उप-मंत्री ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को 2026 के भीतर पूरा करने पर सहमति जताई।

मुख्य बातें

  • वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 26 अगस्त 2026 को सैंटियागो में चिली की उप-मंत्री पाउला एस्टेवेज वेन्स्टीन से वार्ता की।
  • दोनों देशों ने वर्ष 2026 के भीतर भारत-चिली सीईपीए को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जताई।
  • स्वास्थ्य सेवा, फार्मा, ऊर्जा, खनिज, कृषि और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
  • ग्लोबल साउथ के साझेदार देशों के रूप में लचकदार आपूर्ति श्रृंखला (रेसिलिएंट सप्लाई चेन) के निर्माण पर बल दिया गया।

भारत चिली सीईपीए (व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता) को लेकर दोनों देशों के बीच जारी बातचीत एक नए और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है। वाणिज्य मंत्रालय और पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत के वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने 26 अगस्त 2026 को चिली की राजधानी सैंटियागो में चिली की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की उप-मंत्री सुश्री पाउला एस्टेवेज वेन्स्टीन से एक उच्चस्तरीय मुलाकात की। इस द्विपक्षीय बैठक का प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते की प्रगति की समीक्षा करना और वार्ता प्रक्रिया में तेजी लाना था। भारत और चिली दोनों ने इसी वर्ष के भीतर इस समझौते को अंतिम रूप देने का दृढ़ संकल्प जताया है।

पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, वार्ता के दौरान भारत ने दोनों देशों के व्यवसायों, उद्यमियों और नागरिकों के लिए नए तथा व्यावहारिक अवसर पैदा करने पर विशेष बल दिया। भारत ने चिली के साथ आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए खुलेपन, निरंतर संवाद और एक संतुलित दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने सहमति व्यक्त की कि एक न्यायसंगत और परस्पर लाभकारी व्यापारिक ढांचा तैयार किया जाना चाहिए जो ठोस और वाणिज्यिक रूप से सार्थक परिणाम दे सके।

भारत चिली सीईपीए का मुख्य उद्देश्य और प्राथमिकताएं

भारत और चिली की पहचान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्लोबल साउथ के प्रमुख और सक्रिय सदस्यों के रूप में होती है। दोनों देशों के बीच साझा रणनीतिक दृष्टिकोण और समान आर्थिक आकांक्षाएं द्विपक्षीय संबंधों को गहरा बनाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं। भारत चिली सीईपीए का मुख्य उद्देश्य न केवल सीमा शुल्क और व्यापारिक बाधाओं को कम करना है, बल्कि सेवाओं, निवेश, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा के आदान-प्रदान के लिए एक पारदर्शी और सुगम व्यवस्था का निर्माण करना भी है।

आधिकारिक बयान में बताया गया है कि यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों के लिए नए रास्ते खोलेगा। भारत चिली सीईपीए के तहत एक ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है जिससे दोनों देशों के छोटे और बड़े उद्यमों को एक-दूसरे के बाजारों तक सीधी पहुंच मिल सके। इससे भारत को लैटिन अमेरिकी बाजार में अपनी पैठ मजबूत करने में मदद मिलेगी, वहीं चिली को भारत जैसे विशाल उपभोक्ता बाजार का सीधा लाभ प्राप्त होगा।

भारत चिली सीईपीए से किन क्षेत्रों को होगा सीधा लाभ?

वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने चिली की उप-मंत्री के साथ चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की जहां दोनों देश मिलकर व्यापारिक और तकनीकी सहयोग बढ़ा सकते हैं। भारत चिली सीईपीए के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में नए रास्ते तलाशने पर जोर दिया गया है:

  • स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स: भारत की सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं तथा चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति चिली के स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बना सकती है।
  • ऊर्जा और खनिज क्षेत्र: चिली के पास लिथियम और तांबे के विशाल भंडार हैं, जो भारत के हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) मिशन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
  • कृषि और खाद्य प्रसंस्करण: कृषि उत्पादों का व्यापार बढ़ाने और प्रसंस्करण तकनीकों के साझा उपयोग से दोनों देशों के किसानों को लाभ होगा।
  • मशीनरी और इंजीनियरिंग: भारतीय इंजीनियरिंग वस्तुओं, भारी मशीनरी और औद्योगिक उपकरणों के लिए चिली एक प्रमुख बाजार बन सकता है।
  • प्रौद्योगिकी और प्रतिभा: आईटी सेवाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल कार्यबल के आदान-प्रदान के जरिए दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी।

भारत चिली सीईपीए के अंतर्गत इन सभी क्षेत्रों में व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्र में सहयोग से चिली को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी, जबकि भारतीय दवा कंपनियों का निर्यात बढ़ेगा।

द्विपक्षीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती

वर्तमान समय में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आने वाली चुनौतियों के मद्देनजर भारत और चिली का एक साथ आना बहुत प्रासंगिक है। भारत चिली सीईपीए के जरिए दोनों देश अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचकदार और सुरक्षित (रेसिलिएंट सप्लाई चेन) बनाना चाहते हैं। चिली के प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, विशेष रूप से हरित ऊर्जा के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिज, भारत के औद्योगिक विकास के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

दूसरी ओर, भारत द्वारा निर्मित मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़ा, और वाहन उद्योग चिली की औद्योगिक जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने माना कि भारत चिली सीईपीए केवल एक साधारण व्यापार समझौता नहीं होगा, बल्कि यह दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का ठोस आधार साबित होगा।

ग्लोबल साउथ सहयोग और आर्थिक भविष्य

विश्व अर्थव्यवस्था में ग्लोबल साउथ के देशों की बढ़ती भूमिका के बीच भारत चिली सीईपीए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है। भारत लंबे समय से विकासशील देशों के हितों और दक्षिण-दक्षिण सहयोग की वकालत करता रहा है। चिली के साथ आर्थिक समझौतों को अंतिम रूप देने से लैटिन अमेरिका महाद्वीप में भारत का आर्थिक प्रभाव और रणनीतिक पहुंच और अधिक मजबूत होगी।

भारत सरकार का लक्ष्य है कि चालू वर्ष के भीतर ही वार्ता प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए ताकि भारत चिली सीईपीए को जल्द से जल्द लागू किया जा सके। इससे दोनों देशों के बीच न केवल द्विपक्षीय व्यापार का आकार बढ़ेगा, बल्कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और रोजगार के नए अवसरों का भी सृजन होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: भारत चिली सीईपीए क्या है और इस पर बैठक कहां हुई?
उत्तर: भारत चिली सीईपीए (व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता) दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने का एक प्रस्तावित समझौता है। इसकी समीक्षा बैठक 26 अगस्त 2026 को चिली की राजधानी सैंटियागो में हुई।

प्रश्न: चिली के साथ इस वार्ता में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?
उत्तर: भारत की ओर से वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने चिली की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की उप-मंत्री सुश्री पाउला एस्टेवेज वेन्स्टीन के साथ चर्चा की।

प्रश्न: इस समझौते से किन प्रमुख क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा?
उत्तर: स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, खनिज (विशेष रूप से लिथियम व कॉपर), कृषि, मशीनरी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को मुख्य रूप से लाभ होगा।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह
अभिषेक सिंह आज पत्रिका के समाचार संपादक हैं और अर्थव्यवस्था, बाज़ार, रोज़गार तथा शिक्षा से जुड़ी खबरें देखते हैं।

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