रविवार, अक्टूबर 11, 2026

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने राज्यों को बांटी 2.02 करोड़ की एबीएस निधि

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एबीएस निधि

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों को बीज क्षेत्र से प्राप्त 2.02 करोड़ रुपये की एबीएस निधि वितरित की है।

मुख्य बातें

  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के बीच 2.02 करोड़ रुपये वितरित किए।
  • मध्य प्रदेश को सबसे अधिक 23.81 लाख रुपये मिले, जबकि पश्चिम बंगाल 23.32 लाख रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
  • शीर्ष 10 राज्यों को कुल 1.43 करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ है।
  • NBA द्वारा अब तक वितरित की गई संचयी एबीएस निधि बढ़कर 202.00 करोड़ रुपये हो गई है।
  • यह धनराशि सिंजेंटा, बेयर और ईस्ट-वेस्ट जैसी बीज कंपनियों द्वारा दिए गए योगदान से जुटाई गई है।

एबीएस निधि के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने देश के 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 2.02 करोड़ रुपये जारी किए हैं। पीआईबी (प्रेस सूचना ब्यूरो) की विज्ञप्ति के अनुसार, यह धनराशि बीज क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों द्वारा वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए जैविक संसाधनों के उपयोग के एवज में प्राप्त पहुँच एवं लाभ-साझाकरण (Access and Benefit-Sharing – ABS) योगदान का हिस्सा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर पारंपरिक जैविक संपदा की रक्षा करना, संसाधनों का टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करना और स्थानीय समुदायों को वित्तीय मजबूती प्रदान करना है।

एबीएस निधि क्या है और किसे कितना पैसा मिला?

एबीएस निधि यानी पहुँच एवं लाभ-साझाकरण कोष वह वित्तीय व्यवस्था है जिसके तहत जैविक संसाधनों और उससे जुड़ी पारंपरिक जानकारी का व्यावसायिक लाभ उठाने वाली कंपनियाँ अपनी कमाई का एक हिस्सा उन स्थानीय क्षेत्रों और समुदायों के साथ साझा करती हैं, जहाँ से वे संसाधन प्राप्त किए गए हैं। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2026 में जारी 2.02 करोड़ रुपये में से शीर्ष 10 राज्यों को 1.43 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं, जिसमें मध्य प्रदेश को सर्वाधिक 23.81 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं।

राज्यों को मिले एबीएस निधि आवंटन का विवरण

पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने कृषि सांख्यिकी के आंकड़ों के आधार पर विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जैव विविधता परिषदों के बीच धनराशि का वितरण किया है। जिन मामलों में व्यापारियों या बाजारों के माध्यम से खरीदे गए संसाधनों के मूल स्रोतों का सीधे पता लगाना संभव नहीं था, वहाँ एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के तहत संबंधित फसलों के खेती क्षेत्र (Cultivated Area) के आधार पर राशि का न्यायसंगत आवंटन किया गया।

शीर्ष 10 राज्यों को प्राप्त हुई धनराशि की सूची इस प्रकार है:

  • मध्य प्रदेश: 23,81,072 रुपये
  • पश्चिम बंगाल: 23,32,913 रुपये
  • ओडिशा: 19,75,559 रुपये
  • बिहार: 17,28,852 रुपये
  • गुजरात: 13,29,870 रुपये
  • छत्तीसगढ़: 11,37,521 रुपये
  • उत्तर प्रदेश: 9,80,038 रुपये
  • आंध्र प्रदेश: 9,34,864 रुपये
  • कर्नाटक: 7,87,392 रुपये
  • महाराष्ट्र: 7,16,971 रुपये
  • अन्य राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश: 58,94,948 रुपये

इस ताजा वितरण के साथ ही राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) द्वारा अब तक जमीनी स्तर पर वितरित की गई कुल संचयी एबीएस निधि का आंकड़ा 202.00 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत जैविक संसाधनों के आर्थिक लाभों को समाज के निचले तबके और स्थानीय समुदायों तक पहुँचाने के लिए निरंतर काम कर रहा है।

किन कंपनियों और फसलों से प्राप्त हुआ एबीएस योगदान?

बीज उद्योग में कृषि जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से यह राशि प्राप्त हुई है। इसमें कई प्रमुख भारतीय और वैश्विक बीज कंपनियों ने अपना वैधानिक योगदान दिया है। पीआईबी के अनुसार, योगदान देने वाली कंपनियों में ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सिंजेंटा इंडिया लिमिटेड, देवजेन सीड्स एंड क्रॉप टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, लिमाग्रेन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बेयर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड, ननहेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एन्ज़ा ज़ाडेन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

इन कंपनियों ने विभिन्न व्यावसायिक फसलों की उन्नत और संकर (हाइब्रिड) किस्मों के विकास के लिए जैविक संसाधनों का उपयोग किया था। जिन प्रमुख फसलों से यह एबीएस योगदान प्राप्त हुआ है, उनमें चावल, बैंगन, फूलगोभी, खीरा, तीखी मिर्च, लौकी, करेला, टमाटर और भिंडी शामिल हैं। इन फसलों की आनुवंशिक विविधता का उपयोग करके कंपनियों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई और अब उसका लाभांश राज्यों के जैविक संरक्षण कार्यों में लगाया जा रहा है।

यह भी जानें: स्थानीय समुदायों और किसानों पर इसका क्या असर होगा?

राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBB) और केंद्र शासित प्रदेशों की जैव विविधता परिषदों (UTBC) को यह एबीएस निधि मिलने से जमीनी स्तर पर व्यापक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। यह धनराशि सीधे जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMC) को मजबूत करने में खर्च की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, इस कोष का उपयोग निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाएगा:

  • जन जैव विविधता रजिस्टर (PBR) का अद्यतन: गांवों और कस्बों में उपलब्ध पारंपरिक ज्ञान और जैविक संपदा का आधिकारिक दस्तावेज तैयार करना।
  • पारंपरिक फसल किस्मों का संरक्षण: स्थानीय बीजों और दुर्लभ औषधीय पौधों की प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाना।
  • प्राकृतिक आवासों का पुनरुद्धार: क्षतिग्रस्त हो चुके स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र और वनों का पुनरुद्धार करना।
  • सामुदायिक आजीविका में सुधार: प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर स्थानीय और जनजातीय समुदायों को स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना।

यह एबीएस निधि केंद्र सरकार की अन्य प्रमुख जनजातीय और ग्रामीण विकास योजनाओं के साथ अभिसरण (convergence) के रूप में कार्य करेगी। उदाहरण के लिए, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN), प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन और प्रधानमंत्री वन धन योजना के साथ मिलकर यह निधि स्थानीय कारीगरों और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी।

वैश्विक मंच पर भारत का जैव विविधता मॉडल

भारत का यह पहुँच एवं लाभ-साझाकरण ढाँचा देश के जैविक विविधता अधिनियम, 2002 और राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्य योजना (NBSAP) 2024–2030 के उद्देश्यों को पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा के लक्ष्य 13 (न्यायसंगत लाभ साझाकरण) और लक्ष्य 19 (वित्तीय संसाधन जुटाना) के क्रियान्वयन में अहम योगदान देता है।

19 अक्टूबर 2026 से आर्मेनिया की राजधानी येरेवन में जैविक विविधता पर कन्वेंशन के पक्षकारों का 17वाँ सम्मेलन (COP 17) आयोजित होने जा रहा है। इस वैश्विक सम्मेलन में भाग लेने से ठीक पहले भारत द्वारा 202 करोड़ रुपये के संचयी एबीएस कोष का वितरण दुनिया के सामने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) – जैसे शून्य भुखमरी (SDG 2), जिम्मेदार उपभोग (SDG 12) और भूमि पर जीवन (SDG 15) के प्रति देश की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: एबीएस निधि किसके द्वारा वितरित की जाती है?
उत्तर: एबीएस निधि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) द्वारा राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेशों की जैव विविधता परिषदों के माध्यम से जारी की जाती है।

प्रश्न: वर्ष 2026 में किस राज्य को सबसे अधिक एबीएस निधि मिली है?
उत्तर: ताजा वितरण में मध्य प्रदेश को सबसे अधिक 23,81,072 रुपये की एबीएस निधि प्राप्त हुई है, जबकि पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर रहा है।

प्रश्न: एबीएस राशि का निर्धारण किस आधार पर किया जाता है?
उत्तर: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित कृषि सांख्यिकी के आधार पर संबंधित फसलों के खेती क्षेत्र और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के अनुसार राशि तय की जाती है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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