
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड की स्थापना को हरी झंडी दे दी है।
मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एसएमई ग्रोथ फंड के लिए 10,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
- यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 6 अक्टूबर 2026 को लिया गया।
- इस फंड का मुख्य उद्देश्य लघु एवं मध्यम उद्यमों को विकासोन्मुखी पूंजी और इक्विटी सहायता प्रदान करना है।
- फंड की राशि का बड़ा हिस्सा विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमों और टियर-II व टियर-III शहरों के उद्योगों पर केंद्रित होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड (एसजीएफ) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य विनिर्माण, सेवा, प्रौद्योगिकी और नवाचार-संचालित क्षेत्रों में विकासोन्मुखी पूंजी जुटाना है। यह निर्णय केंद्रीय बजट 2026-27 की उन घोषणाओं के अनुरूप है, जिनके तहत एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को इक्विटी और पेशेवर सहायता प्रदान की जानी है।
एसएमई ग्रोथ फंड क्या है और किसे मिलेगा इसका लाभ?
एसएमई ग्रोथ फंड भारत के लघु और मध्यम उद्योगों के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी इक्विटी पूंजी पहल है। यह फंड मुख्य रूप से उन उच्च क्षमता वाले उद्यमों को सहायता देगा जो अपने परिचालन का विस्तार करना चाहते हैं, उन्नत तकनीक अपनाना चाहते हैं या वैश्विक बाजारों में उतरना चाहते हैं। टियर-II और टियर-III शहरों के औद्योगिक समूहों में काम कर रहे एसएमई को भी इस योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाएगा।
देश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भूमिका बेहद अहम रही है। ये क्षेत्र रोजगार सृजन, निर्यात और विनिर्माण में बड़ा योगदान देते हैं। हालांकि, शुरुआती दौर के सूक्ष्म उद्यमों के मुकाबले बड़े लघु और मध्यम उद्यमों के लिए इक्विटी विकास पूंजी में एक संरचनात्मक कमी हमेशा से बनी रही है। इस अंतर को पाटने के लिए ही सरकार ने इस नए कोष की स्थापना की है।
इस फंड से जुड़े मुख्य बिंदु
- सरकार औद्योगिक विकास कोष ढांचे के अंतर्गत स्थापित वैकल्पिक निवेश कोष में कुल 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
- फंड का अधिकांश हिस्सा विनिर्माण केंद्रित उद्यमों को आवंटित किया जाएगा।
- टियर- II और टियर- III शहरों के औद्योगिक समूहों में कार्यरत एसएमई को भी इसका लाभ मिलेगा।
- इस पहल का लक्ष्य देश में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम भारतीय कंपनियों की एक नई पीढ़ी तैयार करना है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर एक कदम
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह ऐतिहासिक पहल वर्ष 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में मदद करेगी। दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध होने से कंपनियां वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बेहतर तरीके से एकीकृत हो सकेंगी। इससे स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी मजबूती मिलेगी और देश भर में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? एसएमई ग्रोथ फंड के लिए कुल कितनी राशि मंजूर की गई है? उत्तर। इस फंड के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
प्रश्न? इस फंड का मुख्य फोकस किस क्षेत्र पर होगा? उत्तर। इस कोष का अधिकांश हिस्सा विनिर्माण केंद्रित लघु एवं मध्यम उद्यमों और टियर-II व टियर-III शहरों के औद्योगिक समूहों पर केंद्रित होगा।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






