शुक्रवार, सितम्बर 11, 2026

जी20 ऊर्जा बैठक 2026: अमेरिका के ह्यूस्टन सम्मेलन में हिस्सा लेंगे मनोहर लाल

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जी20 ऊर्जा बैठक

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल 14 से 16 सितंबर 2026 तक अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित जी20 ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

मुख्य बातें

  • केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल 14 से 16 सितंबर 2026 तक अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित जी20 ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे।
  • शिखर सम्मेलन का आयोजन अमेरिका की जी20 अध्यक्षता के तहत किया जा रहा है।
  • वार्ता तीन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित होगी: ऊर्जा सुरक्षा, नियामक दक्षता और महत्वपूर्ण खनिज।
  • भारत टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों, नीतिगत सुधारों और विविधतापूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अपना रुख रखेगा।

केंद्रीय विद्युत तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल 14 से 16 सितंबर 2026 तक अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में होने वाली जी20 ऊर्जा बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करेंगे। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, अमेरिका की मेजबानी में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय मंत्रिस्तरीय शिखर सम्मेलन में जी20 सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और वैश्विक प्रतिनिधि एक मंच पर जमा होंगे। तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन का मुख्य ध्येय वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करना, ऊर्जा दरों को वहनीय बनाना और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है।

जी20 ऊर्जा बैठक 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

जी20 ऊर्जा बैठक 2026 का मुख्य उद्देश्य विश्व भर में ऊर्जा सुरक्षा, किफायती ऊर्जा दरों और टिकाऊ अवसंरचना विकास को बढ़ावा देना है। अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित यह बैठक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और पारदर्शी नियामक व्यवस्था विकसित करने के लिए जी20 सदस्य देशों के बीच वैश्विक सहयोग स्थापित करती है।

मंत्रिस्तरीय सत्रों के तीन मुख्य स्तम्भ

ह्यूस्टन में आयोजित हो रहे इस मंत्रिस्तरीय सम्मेलन को तीन विशेष विषयगत सत्रों में विभाजित किया गया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल इन तीनों सत्रों में भारत की ओर से विचार व्यक्त करेंगे। पहला सत्र ‘ऊर्जा सुरक्षा और वहनीय बेसलोड’ (Energy Security and Affordable Baseload) पर केंद्रित है। इस सत्र में विश्व स्तर पर ऊर्जा की मांग को पूरा करने के साथ-साथ पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर बात होगी। इसमें इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए किफायती और निर्बाध बिजली आपूर्ति किस प्रकार हासिल की जाए।

दूसरा सत्र ‘अनुमति और नियामक दक्षता’ (Permitting and Regulatory Efficiency) से संबंधित है। इसमें ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली प्रशासनिक देरी को कम करने और नीतिगत बाधाओं को हटाने के उपायों पर चर्चा होगी। नियामक प्रक्रियाओं को सुगम और समयबद्ध बनाकर बड़ी ऊर्जा अवसंरचना परियोजनाओं को गति देने पर जोर दिया जाएगा।

तीसरा सत्र ‘महत्वपूर्ण खनिज और टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला’ (Critical Minerals and Resilient Supply Chains) पर आधारित है। वर्तमान समय में सौर पैनल, पवन टरबाइन और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के लिए लिथियम, कोबाल्ट, निकल तथा दुर्लभ पृथ्वी तत्वों जैसे खनिजों की आवश्यकता तेजी से बढ़ी है। इस सत्र में इन महत्वपूर्ण खनिजों के खनन, प्रसंस्करण और व्यापार के क्षेत्र में किसी एक देश पर निर्भरता घटाने तथा सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला बनाने पर विचार किया जाएगा।

जी20 ऊर्जा बैठक में भारत की प्रस्तुतियां और नीतियां

इस वैश्विक सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल भारत के उस दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेंगे, जिसके तहत देश में एक मजबूत, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा तंत्र का निर्माण किया जा रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था और आबादी तेजी से बढ़ रही है, जिससे देश में बिजली और ऊर्जा की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की जा रही है। भारत सरकार इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एक ओर जहां स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में रिकॉर्ड विस्तार कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिए पारंपरिक ऊर्जा आधार को भी मजबूत कर रही है।

केंद्रीय मंत्री बैठक के दौरान भारत द्वारा किए गए संस्थागत और नीतिगत सुधारों का अनुभव साझा करेंगे। भारत ने सिंगल विंडो क्लीयरेंस, ऑनलाइन पोर्टल और नियामक सुधारों के जरिए ऊर्जा परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को काफी तेज किया है। इसके अलावा, भारत महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में पुनर्चक्रण (रिसाइकलिंग), चक्रिय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) और संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में विविधता लाने पर विशेष बल दे रहा है। भारत का यह प्रयास है कि खनिजों का दोहन पर्यावरण के अनुकूल हो और उनकी उपलब्धता सभी विकासशील देशों के लिए सुलभ बनी रहे।

यह भी जानें: वैश्विक ऊर्जा कूटनीति और भारत का रुख

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संक्रमण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच जी20 मंच की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गई है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, भारत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में व्यावहारिक, समावेशी और प्रौद्योगिकी-तटस्थ (प्रौद्योगिकी-तटस्थ) दृष्टिकोण का समर्थन करता रहा है। प्रौद्योगिकी-तटस्थता का अर्थ है कि किसी एक विशेष तकनीक को थोपने के बजाय प्रत्येक देश को उसकी अपनी भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार सबसे उपयुक्त ऊर्जा विकल्प चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

भारत का मानना है कि विकसित और विकासशील देशों की ऊर्जा जरूरतें और वित्तीय क्षमताएं अलग-अलग हैं। इसलिए, वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया में न्यायसंगत और समावेशी रुख अपनाया जाना आवश्यक है। भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस जैसे वैश्विक पहलों का नेतृत्व कर रहा है, जिससे कम लागत वाली ऊर्जा तकनीकें दुनिया भर में पहुंचे। ह्यूस्टन सम्मेलन में भारत का यह प्रयास रहेगा कि विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए सस्ती तकनीक और रियायती वित्त पोषण की सुविधा मिले।

इसका असर: आम नागरिकों और उद्योग जगत पर प्रभाव

वैश्विक ऊर्जा बैठकों में लिए गए निर्णयों का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष असर आम उपभोक्ताओं तथा उद्योगों पर पड़ता है। जब जी20 देश महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत और पारदर्शी बनाते हैं, तो इससे इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा प्रणालियों और घरेलू बैटरी स्टोरेज की विनिर्माण लागत में कमी आती है। इसका सीधा फायदा आम जनता को सस्ती दरों पर स्वच्छ ऊर्जा उत्पाद मिलने के रूप में होता है।

इसके अतिरिक्त, नियामक प्रक्रियाओं में दक्षता आने से देश में बिजली परियोजनाओं का निर्माण निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा होता है। इससे न केवल बिजली कटौती में कमी आती है, बल्कि बिजली वितरण कंपनियों का वित्तीय घाटा भी कम होता है। मजबूत बेसलोड बिजली तंत्र से भारतीय उद्योगों को निर्बाध और सस्ती बिजली मिलती है, जिससे देश में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलता है और नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? जी20 ऊर्जा बैठक 2026 कब और कहां आयोजित हो रही है?
उत्तर। यह बैठक 14 से 16 सितंबर 2026 तक अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में आयोजित हो रही है, जिसकी अध्यक्षता अमेरिका कर रहा है।

प्रश्न? जी20 ऊर्जा बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कौन कर रहा है?
उत्तर। भारत की ओर से केंद्रीय विद्युत तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।

प्रश्न? इस सम्मेलन में किन प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा?
उत्तर। सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, किफायती बेसलोड बिजली, प्रशासनिक व नियामक दक्षता तथा महत्वपूर्ण खनिजों की सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला पर विस्तृत चर्चा होगी।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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