
बिजली क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति 370 रेक से बढ़कर 444 रेक प्रतिदिन हो गई है, जिससे बिजली संयंत्रों की स्थिति में सुधार आया है।
मुख्य बातें
- 3 से 6 सितंबर 2026 के दौरान दैनिक रेक लोडिंग 370 से बढ़कर 444 रेक हुई।
- चार दिनों में प्रतिदिन 74 रेक (लगभग 20 प्रतिशत) की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई।
- महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) ने 111 रेक/दिन के साथ सबसे तेज वृद्धि दर्ज की।
- कोल इंडिया की कुल साइडिंग लोडिंग बढ़कर 305 रेक प्रति दिन तक पहुंची।
- 25 प्रतिशत से कम स्टॉक वाले क्रिटिकल पावर प्लांट की कड़ी निगरानी जारी है।
बिजली क्षेत्र में कोयला आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के अनुसार पिछले चार दिनों में देश के बिजली क्षेत्र को होने वाली कोयला आपूर्ति में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। 3 सितंबर 2026 को रेक लोडिंग 370 रेक प्रति दिन थी जो 6 सितंबर 2026 को बढ़कर 444 रेक प्रति दिन के स्तर पर पहुंच गई है। इस दौरान प्रतिदिन 74 रेक यानी लगभग 20 प्रतिशत की कुल वृद्धि दर्ज की गई है। केवल 6 सितंबर को ही लोडिंग में 31 रेक का इजाफा दर्ज किया गया।
कोयला आपूर्ति का दैनिक आंकड़ा क्या है?
भारत में बिजली क्षेत्र को कोयला आपूर्ति बढ़ाने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों द्वारा लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। 6 सितंबर 2026 तक दैनिक आपूर्ति बढ़कर 444 रेक प्रति दिन हो चुकी है। इसमें कैप्टिव माइन ऑपरेटरों और एससीसीएल का भी प्रमुख योगदान रहा है, जिससे बिजली संयंत्रों तक ईंधन की उपलब्धता में सुधार हुआ है।
बिजली क्षेत्र के लिए कोयला आपूर्ति का 4 दिवसीय रुझान
पीआईबी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले चार दिनों में कोयले की रेक लोडिंग का क्रम इस प्रकार रहा है:
- 3 सितंबर 2026: 370 रेक प्रति दिन
- 4 सितंबर 2026: 387 रेक प्रति दिन (17 रेक की वृद्धि)
- 5 सितंबर 2026: 413 रेक प्रति दिन (26 रेक की वृद्धि)
- 6 सितंबर 2026: 444 रेक प्रति दिन (31 रेक की वृद्धि)
कोल इंडिया की ओर से मिली जानकारी के अनुसार यह लगातार सुधार उत्पादन और परिवहन व्यवस्था में किए गए बदलावों के कारण संभव हुआ है। इस अवधि में कुल 20 प्रतिशत की संचयी वृद्धि दर्ज की गई है।
विभिन्न कंपनियों से कोयला आपूर्ति में हुआ सुधार
6 सितंबर 2026 को लगभग सभी प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनियों ने अपनी डिलीवरी में सुधार दर्ज किया है। महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) ने सबसे तेज सुधार दिखाया और अपनी लोडिंग में 12 रेक का इजाफा करके 111 रेक प्रति दिन का स्तर हासिल कर लिया। इसके साथ ही कैप्टिव ब्लॉक लोडिंग में 6 रेक की वृद्धि हुई जिससे यह 72 रेक प्रति दिन हो गई।
भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की लोडिंग 8 रेक बढ़कर 25 रेक प्रति दिन हो गई। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) में 3 रेक की वृद्धि के साथ लोडिंग 35 रेक प्रति दिन पहुंची। प्राइवेट वाशरी और गुडशेड्स से होने वाली कोयला आपूर्ति में 3 रेक की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 42 रेक प्रति दिन हो गई। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने क्रमशः 2 और 1 रेक की वृद्धि दर्ज की, जिससे उनकी लोडिंग बढ़कर 36 और 46 रेक प्रति दिन हो गई। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) ने क्रमशः 23 और 29 रेक प्रति दिन का अपना पुराना स्तर बनाए रखा। परिणामस्वरूप कोल इंडिया लिमिटेड की कुल साइडिंग लोडिंग बढ़कर 305 रेक प्रति दिन हो गई, जो पिछले दिन की तुलना में 26 रेक अधिक है।
क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट की निगरानी और सुधारात्मक कदम
देश के महत्वपूर्ण ताप विद्युत संयंत्रों में ईंधन की कमी न हो, इसके लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार जिन संयंत्रों में कोयले का भंडार उनकी मानक आवश्यकता के 25 प्रतिशत से भी कम है, उन्हें क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है। इन संयंत्रों की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड मिलकर ऐसे संयंत्रों को प्राथमिकता के आधार पर रेक आवंटित कर रहे हैं ताकि बिजली उत्पादन पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। लगातार बेहतर हो रही लोडिंग से इन संयंत्रों के कोयला स्टॉक में सुधार होने की पूरी संभावना है।
भारत में कोयला आपूर्ति प्रणाली और रेक लोडिंग का महत्व
भारत में बिजली का बड़ा हिस्सा थर्मल पावर प्लांट से आता है, जो कोयले पर आधारित हैं। कोयला खदानों से लेकर बिजली संयंत्रों तक ईंधन पहुंचाने का सबसे मुख्य और तेज माध्यम भारतीय रेलवे की मालगाड़ियां यानी रेक हैं। एक मालगाड़ी रेक में औसतन 3500 से 4000 टन कोयला ढोया जाता है। इसलिए रेक लोडिंग की संख्या सीधे तौर पर इस बात का संकेत देती है कि देश के पावर प्लांट तक कितना ईंधन पहुंच रहा है।
कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है। सीआईएल की कई सहायक कंपनियां अलग-अलग राज्यों में कोयला खनन का काम करती हैं। जब बारिश के मौसम के बाद या मांग बढ़ने पर बिजली संयंत्रों को अधिक ईंधन की आवश्यकता होती है, तो सीआईएल और रेल मंत्रालय मिलकर रेक की संख्या बढ़ाते हैं। रेक की संख्या 370 से बढ़कर 444 होना यह दर्शाता है कि आपूर्ति श्रृंखला अब बेहद मजबूत स्थिति में काम कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: देश में कोयला आपूर्ति का ताजा आंकड़ा क्या है?
उत्तर: पीआईबी के अनुसार 6 सितंबर 2026 तक बिजली क्षेत्र के लिए कोयला आपूर्ति बढ़कर 444 रेक प्रति दिन पहुंच चुकी है, जो 3 सितंबर के 370 रेक की तुलना में 74 रेक अधिक है।
प्रश्न: सबसे अधिक रेक लोडिंग किस कंपनी ने दर्ज की?
उत्तर: महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) ने 111 रेक प्रति दिन की लोडिंग के साथ सबसे तेज और अधिक सुधार दर्ज किया है।
प्रश्न: क्रिटिकल बिजली संयंत्र किन्हें माना जाता है?
उत्तर: जिन बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक उनकी सामान्य आवश्यकता के 25 प्रतिशत से कम बचा होता है, उन्हें क्रिटिकल माना जाता है और वहां प्राथमिकता से ईंधन भेजा जाता है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






