
पीआईबी के अनुसार, खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) देश के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक कौशल और स्थानीय संसाधनों के जरिए आजीविका के नए अवसर सृजित कर रहा है।
मुख्य बातें
- तमिलनाडु के कन्याकुमारी में टी. अजिन ने मार्तंडम हनी प्रोडक्ट्स के जरिए शहद व्यवसाय को आगे बढ़ाया।
- ग्रामोद्योग विकास योजना (जीवीवाई) 2024-25 के तहत बी. सुंदराज ने अपनी वेटिवर अगरबत्ती इकाई का विस्तार किया।
- एम. मुरुगेसन ने पीएमईजीपी योजना के तहत केले के रेशों से सजावटी वस्तुएं बनाने का उद्यम शुरू किया।
- हनी मिशन के तहत 2017-18 से 2025-26 के बीच लगभग 2,46,000 मधुमक्खी के बक्से और मधुमक्खियाँ वितरित की गईं।
पारंपरिक कौशल और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन आज देश के ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण उद्यम स्थापित करने का मुख्य आधार बन रहे हैं। पीआईबी के अनुसार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) कारीगरों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर इस बदलाव में अहम सहयोग दे रहा है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), खादी विकास योजना और ग्रामोद्योग विकास योजना जैसी पहलों के माध्यम से ग्रामीण भारत में आजीविका के नए रास्ते खुल रहे हैं।
ग्रामीण उद्यम को बढ़ावा देने में केवीआईसी की भूमिका
ग्रामीण उद्यम के विकास के लिए केवीआईसी लगातार काम कर रहा है ताकि स्थानीय कारीगर अपनी पारंपरिक क्षमताओं को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार ढाल सकें। देश के विभिन्न हिस्सों में उद्यमी अपने हुनर और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके नए व्यवसाय खड़े कर रहे हैं। तमिलनाडु के कन्याकुमारी निवासी टी. अजिन ने मधुमक्खी पालन के अपने ज्ञान को मार्तंडम हनी प्रोडक्ट्स के जरिए एक सफल व्यवसाय में बदला है। वे एगमार्क प्रमाणित शहद का उत्पादन करने के साथ ही अन्य किसानों और कमजोर वर्ग के लोगों को आधुनिक मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
इसी तरह, बी. सुंदराज ने एक प्राकृतिक रूप से सुगंधित पौधे वेटिवर का उपयोग करके अपनी प्योर हेल्थ हर्बल अगरबत्ती यूनिट को आगे बढ़ाया। ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत मिले समर्थन से उन्होंने साल 2024-25 के दौरान अपनी उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की। उधर, एम. मुरुगेसन ने पीएमईजीपी योजना के तहत केले के रेशों से सजावटी और उपयोगी वस्तुएं बनाने वाली ओम बनाना क्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। उनके इन नवाचारों के लिए उन्हें केंद्र और राज्य स्तर पर पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
हनी मिशन और ग्रामीण उद्यम का विस्तार
वैज्ञानिक तरीकों से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा साल 2017 में हनी मिशन की शुरुआत की गई थी। इस योजना का उद्देश्य किसानों, आदिवासी समुदायों और बेरोजगार युवाओं को आजीविका के साधन प्रदान करना है। इसके तहत लाभार्थियों को मधुमक्खी पालन के लिए विशेष प्रशिक्षण के साथ-साथ बक्से, जीवित मधुमक्खियाँ और अन्य आवश्यक उपकरण मुफ्त या सहायता प्राप्त दरों पर दिए जाते हैं।
- 2017-18 से 2025-26 के बीच देश भर में लगभग 2,46,000 मधुमक्खी के बक्से वितरित किए गए।
- वर्ष 2025-26 के दौरान कुल मिलाकर लगभग 5,500 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन दर्ज किया गया।
- तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों के पालकों को इसका लाभ मिला।
- मधुमक्खी पालन से न सिर्फ शहद मिलता है बल्कि यह कृषि फसलों के परागण में भी मदद करता है।
मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि और जैव विविधता के बीच एक प्राकृतिक संतुलन बनाने का काम भी करता है। ग्रामीण भारत में इस प्रकार के स्थानीय उद्योग यह साबित करते हैं कि यदि सही समय पर वित्तीय मदद, तकनीकी सहायता और बाजार तक पहुंच मिल जाए, तो पारंपरिक ज्ञान भी एक बड़ा आर्थिक संबल बन सकता है। केवीआईसी के ये तमाम कार्यक्रम ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? ग्रामीण उद्यम को बढ़ावा देने के लिए कौन सी प्रमुख संस्था काम कर रही है?
उत्तर। खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
प्रश्न? हनी मिशन की शुरुआत कब की गई थी?
उत्तर। वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए हनी मिशन की शुरुआत वर्ष 2017 में की गई थी।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






