
आयकर कानून की धारा 80C के तहत मिलने वाली छूट, निवेश के मुख्य विकल्प और टैक्स फाइलिंग की पूरी जानकारी।
मुख्य बातें
- पुरानी टैक्स व्यवस्था में धारा 80C के तहत सालाना अधिकतम ₹1,50,000 की छूट मिलती है।
- ईएलएसएस (ELSS) में केवल 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है, जो 80C में सबसे कम है।
- निवेश के अलावा बच्चों की ट्यूशन फीस और होम लोन का मूलधन भी इसमें शामिल है।
- नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) चुनने पर 80C की छूट नहीं मिलती।
आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत मिलने वाली 80सी टैक्स छूट पुरानी कर व्यवस्था में आपकी कुल कर योग्य आय में से अधिकतम 1.5 लाख रुपये घटाने की सुविधा देती है। सही जगह निवेश और पात्र खर्चों का ब्योरा देकर आप अपना आयकर शून्य या काफी कम कर सकते हैं।
80सी टैक्स छूट क्या है?
80सी टैक्स छूट भारत सरकार द्वारा करदाताओं को बचत और निवेश के लिए प्रोत्साहित करने का एक कानूनी जरिया है। पुरानी कर व्यवस्था अपनाने वाला कोई भी व्यक्ति या अविभक्त हिंदू परिवार (HUF) एक वित्तीय वर्ष में 1,50,000 रुपये तक के निवेश या निर्धारित खर्चों पर इस धारा के तहत कर कटौती का दावा कर सकता है।
80सी टैक्स छूट के प्रमुख निवेश विकल्प
टैक्स बचाने के लिए बाजार में कई सरकारी और गैर-सरकारी योजनाएं मौजूद हैं। अपनी वित्तीय ज़रूरतों और जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार आप नीचे दिए गए साधनों को चुन सकते हैं:
- कर्मचारी भविष्य निधि (EPF): वेतनभोगी कर्मचारियों के मूल वेतन से कटने वाला 12% हिस्सा सीधा 80सी टैक्स छूट के दायरे में आता है। यह एक सुरक्षित और निश्चित रिटर्न देने वाला विकल्प है।
- पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF): यह सरकार द्वारा संचालित 15 साल की बचत योजना है। इसमें मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि पूरी तरह से कर-मुक्त होती है। इसमें न्यूनतम 500 रुपये से शुरुआत की जा सकती है।
- इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS): यह एक टैक्स-सेविंग म्यूचुअल फंड है। इसमें 80सी टैक्स छूट का लाभ उठाने के साथ-साथ शेयर बाजार से बेहतर रिटर्न पाने का मौका मिलता है। इसका लॉक-इन पीरियड केवल 3 साल का होता है।
- सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): यदि आपकी 10 वर्ष से कम उम्र की बेटी है, तो इस योजना में खाता खुलवाकर निवेश कर सकते हैं। यह सरकार की सबसे अधिक ब्याज देने वाली लघु बचत योजनाओं में से एक है।
- टैक्स-सेवर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): बैंकों और डाकघर में 5 साल की अवधि वाली टैक्स-सेवर एफडी में निवेश करके 80सी टैक्स छूट प्राप्त की जा सकती है। इसका ब्याज कर-योग्य होता है।
- राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC): पोस्ट ऑफिस की 5 साल की यह योजना सुरक्षित रिटर्न चाहने वाले निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प है।
निवेश के अलावा किन खर्चों पर मिलती है 80सी टैक्स छूट?
कई बार लोगों को लगता है कि केवल नया निवेश करने पर ही कर बचता है। हालांकि, कुछ सामान्य घरेलू खर्चे भी 80सी टैक्स छूट दिलाने में मदद करते हैं:
- गृह ऋण (Home Loan) का मूलधन: यदि आपने घर खरीदने के लिए होम लोन लिया है, तो उसकी ईएमआई (EMI) में से मूलधन (Principal) का हिस्सा 80C के तहत कर-मुक्त होता है।
- बच्चों की ट्यूशन फीस: दो बच्चों तक की स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी की पूरी ट्यूशन फीस पर आप छूट का दावा कर सकते हैं। ध्यान रखें कि कोचिंग सेंटर या डेवलपमेंट फीस इसमें शामिल नहीं होती।
- जीवन बीमा का प्रीमियम: अपने, जीवनसाथी या बच्चों के नाम ली गई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की प्रीमियम राशि पर 80सी टैक्स छूट मिलती है।
- स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज: नया मकान खरीदते समय दिया गया रजिस्ट्रेशन शुल्क और स्टांप ड्यूटी का खर्च भी उसी वर्ष 80C में क्लेम किया जा सकता है।
विभिन्न निवेश विकल्पों की तुलना
विभिन्न योजनाओं में से अपने लिए सही विकल्प चुनने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:
| विकल्प | लॉक-इन अवधि | संभावित रिटर्न | जोखिम स्तर |
|---|---|---|---|
| ELSS म्यूचुअल फंड | 3 वर्ष | 12% – 15% (अस्थिर) | उच्च |
| PPF (पीपीएफ) | 15 वर्ष | 7.1% (सरकारी दर) | शून्य |
| टैक्स-सेवर FD | 5 वर्ष | 6.5% – 7.5% | शून्य |
| EPF (कर्मचारी निधि) | रिटायरमेंट तक | 8.1% – 8.25% | शून्य |
80सी टैक्स छूट का दावा करने का चरण-दर-चरण तरीका
टैक्स भरते समय 80C का सही लाभ उठाने के लिए इस प्रक्रिया का पालन करें:
- अपनी वार्षिक आय की गणना करें और यह तय करें कि पुरानी कर व्यवस्था आपके लिए अधिक फायदेमंद है या नई।
- वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए कुल पात्र निवेशों और खर्चों (जैसे ट्यूशन फीस, बीमा प्रीमियम) की रसीदें एकत्र करें।
- वेतनभोगी कर्मचारी अपने संस्थान के एचआर (HR) या अकाउंट्स विभाग को फॉर्म 12BB के साथ निवेश के सभी दस्तावेज जमा करें।
- आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल incometax.gov.in पर अपने पैन (PAN) नंबर की मदद से लॉगिन करें।
- उपयुक्त आईटीआर फॉर्म (जैसे ITR-1 या ITR-2) चुनें और ‘Chapter VI-A Deductions’ के अंतर्गत 80C विकल्प में अपनी कुल निवेश राशि दर्ज करें।
- फॉर्म जमा करने के बाद अपने आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के जरिए आयकर रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन पूरा करें।
80सी टैक्स छूट का लाभ लेते समय सावधानियां
कर बचत योजना बनाते समय केवल टैक्स बचाना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए। 80सी टैक्स छूट की कुल सीमा 1.5 लाख रुपये ही है, इसलिए यदि आपका EPF और बच्चों की ट्यूशन फीस मिलाकर ही 1.5 लाख रुपये पूरा हो रहा है, तो अतिरिक्त टैक्स बचाने के लिए ELSS या PPF में जबरन पैसे न फंसाएं।
इसके अलावा, वित्त वर्ष 2020-21 से लागू नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) को चुनने वाले करदाताओं को धारा 80C के तहत कोई छूट नहीं दी जाती है। इसलिए आईटीआर दाखिल करने से पहले दोनों कर व्यवस्थाओं की तुलना अवश्य कर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: क्या नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में 80सी टैक्स छूट का लाभ मिलता है?
उत्तर: नहीं, नई टैक्स व्यवस्था में धारा 80C समेत अधिकांश कटौतियों और छूटों को हटा दिया गया है। यह लाभ केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में उपलब्ध है।
प्रश्न: यदि मेरा 80C में कुल निवेश 2 लाख रुपये है, तो कितनी छूट मिलेगी?
उत्तर: धारा 80C के तहत अधिकतम छूट की सीमा ₹1,50,000 ही तय है। शेष ₹50,000 पर धारा 80C में कोई अतिरिक्त छूट नहीं मिलेगी।
प्रश्न: क्या NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) भी 80C का हिस्सा है?
उत्तर: NPS में किया गया निवेश धारा 80CCD(1) के तहत 80C की 1.5 लाख की सीमा में आता है। हालांकि, धारा 80CCD(1B) के तहत NPS में अलग से ₹50,000 की अतिरिक्त छूट भी मिलती है।
प्रश्न: क्या दो बच्चों से अधिक की फीस पर 80C छूट ली जा सकती है?
उत्तर: नहीं, आयकर नियमों के अनुसार केवल अधिकतम दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर ही यह छूट प्रदान की जाती है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश या वित्तीय सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले किसी योग्य/सेबी-पंजीकृत सलाहकार से परामर्श करें।
आधिकारिक जानकारी और नवीनतम अपडेट के लिए: https://incometax.gov.in
यह लेख आज पत्रिका की एक्सप्लेनर डेस्क द्वारा सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। नियम और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदल सकती हैं — कृपया आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें। सुधार/सुझाव: corrections@aajpatrika.com






