
CSIR-CRRI ने दिल्ली PWD इंजीनियरों को CAQM मानकों और वैज्ञानिक तकनीकों पर प्रशिक्षित किया, जिससे धूल प्रदूषण में कमी आएगी।
मुख्य बातें
- CSIR-CRRI ने दिल्ली PWD के इंजीनियरों के लिए CAQM मानक ढांचे पर प्रशिक्षण आयोजित किया।
- एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में सड़क निर्माण से धूल प्रदूषण घटाने पर चर्चा हुई।
- सड़कों के क्रीटेड शोल्डर पक्के करने और हरियाली बढ़ाने की तकनीकों की जानकारी दी गई।
- जल निकासी, बिजली और संचार नेटवर्क के एकीकरण के लिए नई गाइडलाइन्स प्रस्तुत की गईं।
राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली सड़क निर्माण को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) ने एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। एनडीएमसी (NDMC) कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों ने भाग लिया।
दिल्ली सड़क निर्माण के नए मानक और वायु गुणवत्ता प्रबंधन ढांचा क्या है?
दिल्ली सड़क निर्माण के तहत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा तय किए गए मानकों का पालन करना अब अनिवार्य है। इस गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य शहरी सड़कों के कच्चे हिस्सों को पक्का करना, धूल उत्सर्जन को रोकना और सड़कों के किनारों पर पौधारोपण करके हरियाली को बढ़ावा देना है। इससे राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
एक दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के मानक ढांचे को लागू करने के लिए तकनीकी और मैदानी रणनीति साझा की। इस दौरान सड़क निर्माण तकनीकों, वैज्ञानिक डिजाइन और पर्यावरण संरक्षण के अंतर्संबंधों पर विस्तृत चर्चा हुई।
दिल्ली सड़क निर्माण में शामिल प्रमुख तकनीकी मॉड्यूल
प्रशिक्षण के दौरान सीएसआईआर-सीआरआरआई के वैज्ञानिकों ने PWD इंजीनियरों को सड़क डिजाइनिंग और प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से रूबरू कराया। दिल्ली सड़क निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए:
- एनसीआर क्षेत्र के लिए सड़क मानक: भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के दिशानिर्देशों के तहत सड़क नेटवर्क योजना और पर्यावरण सुरक्षा के नियम।
- कच्चे हिस्सों का पक्कीकरण: सड़कों के किनारों (शोल्डर) को पक्का करके धूल उड़ने की समस्या को समाप्त करने के उपाय।
- सार्वजनिक और गैर-मोटर चालित परिवहन: पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और गैर-मोटर चालित परिवहन (NMT) के लिए समर्पित लेन का निर्माण।
- शहरी बुनियादी ढांचे का एकीकरण: सड़क निर्माण के साथ ही जल निकासी, बिजली आपूर्ति, दूरसंचार नेटवर्क, बस स्टॉप और गैस स्टेशनों को एक साथ जोड़ना।
- सड़क सुरक्षा संकेत: चालकों की सुविधा और दुर्घटना रोकने के लिए मानक सड़क संकेतों और चिह्नों की उचित व्यवस्था।
दिल्ली सड़क निर्माण में प्रदूषण नियंत्रण और हरियाली का वैज्ञानिक ढांचा
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। इसमें सड़कों से उड़ने वाली धूल (Road Dust) एक बड़ा कारक मानी जाती है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने इसी समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सड़क निर्माण और रखरखाव के विशेष मानक तय किए हैं।
सड़कों को धूल-मुक्त बनाने के लिए क्रीटेड या पेव्ड शोल्डर का निर्माण आवश्यक है। जब तक सड़कों के किनारे कच्चे रहते हैं, वाहनों की आवाजाही से धूल हवा में तैरती रहती है। इसके अलावा, खाली बची जमीनों पर घास या उपयुक्त पौधे लगाना अनिवार्य किया गया है। यह हरियाली धूल कणों को हवा में उठने से रोकती है। दिल्ली सड़क निर्माण के दौरान इन नियमों का पालन करने से पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर में कमी लाई जा सकती है।
वैज्ञानिकों और PWD अधिकारियों का संयुक्त मंथन
उद्घाटन समारोह में सीआरआरआई के निदेशक डॉ. चालुमूरी रवि शेखर ने बताया कि वैज्ञानिक सड़क डिजाइन से न केवल निर्माण मजबूत होता है, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षा मिलती है। दिल्ली सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीकों का उपयोग समय की मांग है।
PWD के इंजीनियर-इन-चीफ नवीन बंसल और विशेष सचिव-2 रवि झा ने भी कार्यक्रम में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले इंजीनियरों को इन मानकों की सीधी जानकारी होने से सड़क निर्माण में तेजी और गुणवत्ता आएगी।
प्रशिक्षण सत्र में सीआरआरआई के वैज्ञानिकों की टीम ने प्रमुख भूमिका निभाई। इनमें डॉ. संपत कुमार, डॉ. के. रविंदर, डॉ. ई. मधु, डॉ. मुक्ति आडवाणी, डॉ. मिनल चंद्र, डॉ. चिंतामन बारी और डॉ. निश्चल गुप्ता शामिल थे। इन विशेषज्ञों ने विभिन्न श्रेणियों की शहरी सड़कों के लिए डेटा संग्रह प्रारूप और डिजाइन मापदंडों पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
शहरी बुनियादी ढांचे और पर्यावरण का संतुलन
शहरी क्षेत्रों में अक्सर सड़क निर्माण के बाद बार-बार खुदाई की समस्या सामने आती है। इससे न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि धूल का प्रदूषण भी बढ़ता है। नए मानक ढांचे में इस समस्या का समाधान प्रस्तावित किया गया है।
दिल्ली सड़क निर्माण के दौरान अब उपयोगिता सेवाओं जैसे ड्रेनेज, इलेक्ट्रिसिटी, केबल नेटवर्क और गैस पाइपलाइनों के लिए पहले से गलियारे निर्धारित किए जाएंगे। इससे भविष्य में सड़क तोड़े बिना मरम्मत और केबल बिछाने का काम हो सकेगा।
सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है। बस स्टॉप का ऐसा डिजाइन तैयार किया जाएगा, जिससे मुख्य सड़क पर जाम न लगे। इसके साथ ही पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए सुरक्षित रास्ते बनाना अनिवार्य किया गया है।
कार्यान्वयन के लिए रोडमैप और भावी योजना
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में सीआरआरआई के वैज्ञानिकों और PWD इंजीनियरों के बीच खुला संवाद हुआ। इसमें जमीनी स्तर पर आ रही व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की गई। दिल्ली सड़क निर्माण परियोजनाओं में नए सीएक्यूएम गाइडलाइन्स को तुरंत प्रभाव से लागू करने की योजना तैयार की गई।
भविष्य में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का दायरा एनसीआर के अन्य नगर निकायों और एजेंसियों तक बढ़ाने पर सहमति बनी है। इससे पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक समान मानक वाली टिकाऊ और हरित सड़कों का निर्माण संभव हो सकेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न? CSIR-CRRI ने किस विभाग के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया?
उत्तर: CSIR-CRRI ने दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों के लिए यह विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया।
प्रश्न? सड़क निर्माण में CAQM मानकों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य सड़कों से उठने वाली धूल को कम करना, क्रीटेड शोल्डर बनाना और हरियाली बढ़ाकर वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाना है।
प्रश्न? प्रशिक्षण कार्यक्रम में किन-किन सुविधाओं के एकीकरण पर जोर दिया गया?
उत्तर: सड़क निर्माण के साथ जल निकासी, बिजली, दूरसंचार नेटवर्क, बस स्टॉप और गैस स्टेशनों के निर्बाध एकीकरण पर जोर दिया गया।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






