वस्त्र मंत्रालय ने नई दिल्ली में टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन की दूसरी समन्वय समिति बैठक आयोजित कर अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-संचालित विकास की रणनीतियों पर चर्चा की।
मुख्य बातें
- वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव ने विज्ञान भवन में आयोजित दूसरी समन्वय समिति बैठक की अध्यक्षता की।
- बैठक में अनुसंधान को उद्योग-संचालित, पेटेंट-उन्मुख और एमएसएमई की समस्याओं को सुलझाने पर केंद्रित करने का निर्णय लिया गया।
- i-TRAMS पोर्टल, ई-लाइब्रेरी प्लेटफॉर्म और ‘न्यू एज फाइबर्स’ जैसी पहलों की समीक्षा की गई।
- वर्ष 2026-27 के लिए पंचवर्षीय योजना और केपीआई-आधारित मूल्यांकन ढांचा लागू करने पर सहमति बनी।
वस्त्र मंत्रालय ने भारतीय कपड़ा उद्योग में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई दिल्ली के विज्ञान भवन में टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (टीआरए) की दूसरी समन्वय समिति बैठक आयोजित की। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने की। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य देशभर में टेक्सटाइल अनुसंधान गतिविधियों में आपसी समन्वय को सुदृढ़ बनाना, शोध की प्रभावशीलता को बढ़ाना और अनुसंधान के ठोस परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना था। वस्त्र मंत्रालय द्वारा बुलाई गई इस बैठक में उद्योग और शोध संस्थानों के बीच के अंतर को कम करने पर विशेष बल दिया गया।
दिनभर चले इस गहन विचार-मंथन सत्र में वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) तथा विभिन्न आईआईटी के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त देश के प्रमुख टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशनों के अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया और शोध प्राथमिकताओं, नवाचार, प्रौद्योगिकी विकास तथा अनुसंधानों के कमर्शियलाइज़ेशन पर व्यापक चर्चा की।
वस्त्र मंत्रालय का नवाचार और तकनीकी विकास पर ध्यान
बैठक में वस्त्र मंत्रालय की सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशनों द्वारा किया जाने वाला शोध पूरी तरह से उद्योग-संचालित और परिणाम-उन्मुख होना चाहिए। सरकार का मानना है कि अनुसंधान केवल कागजों तक सीमित न रहकर बाजार की व्यावहारिक जरूरतों को पूरा करने वाला होना चाहिए। वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, अनुसंधान एवं विकास के परिणामों को नई तकनीकों, पेटेंट, प्रोटोटाइप और आयात प्रतिस्थापन (इम्पोर्ट सब्स्टिट्यूशन) में परिवर्तित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
इस बैठक के दौरान विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की चुनौतियों का समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित किया गया। वस्त्र मंत्रालय का मानना है कि कपड़ा क्षेत्र में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए शोध के शुरुआती चरण यानी संकल्पना (कॉन्सेप्ट स्टेज) से ही उद्योग जगत की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे शोध के परिणामों को सीधे कारखानों और उत्पादन इकाइयों में लागू करना आसान हो जाएगा और भारतीय कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धी क्षमता वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी।
समन्वय समिति बैठक के प्रमुख निर्णय और समीक्षा
बैठक के दौरान टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशनों की पहली समन्वय समिति बैठक के बाद से हासिल की गई प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इसमें i-TRAMS पोर्टल के माध्यम से उपकरणों की सूची तैयार करने और डिजिटल जानकारी को मजबूत करने की प्रगति शामिल थी। इसके अलावा उप-समितियों के गठन, ‘उत्कृष्टता केंद्र’ (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) तथा ‘न्यू एज फाइबर्स’ की पहचान करने की दिशा में उठाए गए कदमों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के मुख्य आकर्षणों और रणनीतिक निर्णयों की सूची इस प्रकार है:
- i-TRAMS पोर्टल का सुदृढ़ीकरण: अनुसंधान उपकरणों की मैपिंग, जानकारी साझा करने और गतिविधियों की प्रभावी निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग करना।
- उत्कृष्टता केंद्रों का वैश्विक मानकीकरण: टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन के उत्कृष्टता केंद्रों की ग्लोबल बेंचमार्किंग करना ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध संभव हो सकें।
- टेक्नोलॉजी रेडीनेस असेसमेंट: विकसित की जा रही तकनीकों के सटीक मूल्यांकन के लिए एक व्यवस्थित फ्रेमवर्क को अपनाना।
- स्टार्टअप्स और इनोवेशन: कपड़ा क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना और उनके लिए एक मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार करना।
- साझा ई-लाइब्रेरी प्लेटफॉर्म: शोधकर्ताओं, छात्रों और उद्योग विशेषज्ञों के लिए एक कॉमन डिजिटल लाइब्रेरी प्लेटफॉर्म का निर्माण करना।
- नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन: इस मिशन के तहत स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू करना।
वस्त्र मंत्रालय की पंचवर्षीय योजना और नई रणनीति
वस्त्र मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशनों के लिए वर्ष 2026-27 की पंचवर्षीय योजना और वार्षिक कार्य योजना तैयार की जा रही है। यह योजना कपड़ा शोध के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा प्रदान करेगी, जिसमें अनुसंधान एवं विकास, नई प्रौद्योगिकियों का विकास, परीक्षण एवं मानकीकरण, क्षमता निर्माण और संस्थागत सहयोग जैसे विषय शामिल होंगे। वस्त्र मंत्रालय द्वारा तैयार की जा रही इस रूपरेखा से शोध संस्थानों को अपनी भविष्य की दिशा तय करने में काफी स्पष्टता मिलेगी।
बैठक में संस्थागत प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक मजबूत केपीआई (की परफॉर्मेंस इंडिकेटर) आधारित फ्रेमवर्क की आवश्यकता पर भी सहमति बनी। वस्त्र मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि समय-समय पर निष्पक्ष समीक्षा और भरोसेमंद डेटा के आधार पर शोध की प्रगति का आकलन किया जाएगा। इससे संस्थागत जवाबदेही तय होगी, वित्तीय व भौतिक संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित होगा और निर्धारित समय-सीमा के भीतर मापने योग्य परिणाम हासिल किए जा सकेंगे।
भारतीय कपड़ा क्षेत्र में शोध का महत्व और दूरगामी प्रभाव
भारत का कपड़ा उद्योग देश के सबसे पुराने और सबसे बड़े उद्योगों में से एक है, जो करोड़ों लोगों को आजीविका प्रदान करता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में तकनीकी वस्त्र (टेक्निकल टेक्सटाइल्स) और टिकाऊ वस्त्र निर्माण (सस्टेनेबल टेक्सटाइल्स) की मांग दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है। वस्त्र मंत्रालय का यह नया पहल-समूह भारतीय कपड़ा क्षेत्र को पारंपरिक विनिर्माण से निकालकर आधुनिक, उच्च-प्रौद्योगिकी संचालित उद्योग में बदलने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
टेक्सटाइल अनुसंधान का सीधा प्रभाव कपड़ा निर्यात में वृद्धि और विदेशी मुद्रा की बचत के रूप में दिखाई देता है। जब देश में ही नए युग के रेशे (न्यू एज फाइबर्स) और उन्नत तकनीकी वस्त्रों का विकास होगा, तो भारत को महंगे आयात पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वस्त्र मंत्रालय का लक्ष्य है कि भारत न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करे, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी वस्त्रों का निर्यात करे।
इसके अलावा, अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में तेजी आने से देश में उच्च-कुशल नौकरियों का सृजन होगा। शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और विनिर्माण उद्योग के बीच सहयोग बढ़ने से युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए नवाचार के नए अवसर खुलेंगे। वस्त्र मंत्रालय द्वारा शुरू की गई यह समन्वय प्रक्रिया अंततः भारत को वैश्विक कपड़ा मानचित्र पर एक अग्रणी तकनीकी केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: वस्त्र मंत्रालय द्वारा आयोजित बैठक की मुख्य प्राथमिकता क्या थी?
उत्तर: वस्त्र मंत्रालय द्वारा आयोजित टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन की दूसरी समन्वय समिति बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में टेक्सटाइल अनुसंधान गतिविधियों में समन्वय बढ़ाना, शोध को उद्योग की जरूरतों से जोड़ना और परिणाम-आधारित नवाचार को बढ़ावा देना था।
प्रश्न: i-TRAMS पोर्टल क्या है और इसका क्या उपयोग है?
उत्तर: i-TRAMS पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसका उपयोग टेक्सटाइल अनुसंधान उपकरणों की मैपिंग करने, शोध गतिविधियों की निगरानी करने और उद्योग तथा अनुसंधान संस्थानों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को आसान बनाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न: इस समन्वय बैठक की अध्यक्षता किसने की?
उत्तर: इस बैठक की अध्यक्षता वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने की, जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों और प्रमुख शोध संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






