प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा करेंगे और किर्गिज़ गणराज्य में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे।

मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 29-30 अगस्त 2026 को उज्बेकिस्तान की अपनी चौथी राजकीय यात्रा करेंगे।
- ताशकंद में राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, रक्षा और ऊर्जा पर चर्चा होगी।
- 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
- एससीओ की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित शिखर सम्मेलन को पीएम मोदी संबोधित करेंगे।
- किर्गिज़ गणराज्य में छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी होंगे शामिल।
विदेश मंत्रालय और पीआईबी के अनुसार, पीएम मोदी उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा के तहत 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक मध्य एशियाई क्षेत्र के चार दिवसीय महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 29 और 30 अगस्त 2026 को उज्बेकिस्तान की द्विपक्षीय राजकीय यात्रा करेंगे। इसके बाद, वे 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक किर्गिज़ गणराज्य की यात्रा करेंगे, जहां वे बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। भारत की ‘एक्सटेंडेड नेबरहुड’ यानी विस्तारित पड़ोस नीति और मध्य एशियाई देशों के साथ संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।
पीएम मोदी उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा का पहला चरण: ताशकंद में द्विपक्षीय वार्ता
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति महामहिम श्री शावकत मिर्जियोयेव के विशेष निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 29 से 30 अगस्त 2026 तक ताशकंद की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा होगी, जो दोनों राष्ट्रों के बीच निरंतर गहराई हासिल करते द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाती है। पीआईबी की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस ऐतिहासिक पीएम मोदी उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा के दौरान ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल स्तर की विस्तृत वार्ता आयोजित की जाएगी। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य भारत और उज्बेकिस्तान के बीच की रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत तथा व्यापक बनाना है।
दोनों शीर्ष नेता व्यापार और निवेश, रक्षा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा क्षेत्र, शिक्षा तथा जन-से-जन के बीच आपसी संबंधों (पीपल-टू-पीपल टाइज) सहित विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अब तक हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही, भविष्य के सहयोग का एजेंडा और कार्यसूची भी तय की जाएगी। वार्ता के दौरान दोनों नेता ‘विकसित भारत@2047’ और ‘उज्बेकिस्तान-2030’ के अपने-अपने राष्ट्रीय साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने तथा उन्हें हासिल करने के लिए आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। इस उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा को भारत की मध्य एशिया नीति के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है।
शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र का दौरा
ताशकंद में अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण करने की संभावना है। पीआईबी के अनुसार, प्रधानमंत्री ताशकंद स्थित भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। ताशकंद का भारत के इतिहास में एक विशेष स्थान है, क्योंकि यही वह शहर है जहां 1966 में लाल बहादुर शास्त्री का निधन हुआ था।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में स्थापित ‘महात्मा गांधी केंद्र’ का दौरा भी कर सकते हैं। यह केंद्र मध्य एशिया में भारतीय संस्कृति, गांधीवादी विचारों और भाषा अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यह दौरा न केवल दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को स्मरण कराएगा, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अकादमिक सहयोग को भी नई गति प्रदान करेगा।
पीएम मोदी उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा का दूसरा चरण: 26वां एससीओ शिखर सम्मेलन
उज्बेकिस्तान का दौरा संपन्न करने के पश्चात, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ताशकंद से बिश्केक के लिए रवाना होंगे। किर्गिज़ गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री सादिर झापारोव के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे। इस पीएम मोदी उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा के अंतर्गत एससीओ की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित यह शिखर सम्मेलन विशेष महत्व रखता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा का कार्यक्रम पहले ही तय हो चुका है।
उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा के समय बिश्केक में आयोजित इस सम्मेलन में भारत की भागीदारी अहम रहेगी, क्योंकि भारत 2017 से एससीओ का पूर्णकालिक सदस्य है और संगठन के मंच से क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी को सुगम बनाने और नए आर्थिक अवसरों के निर्माण पर भारत की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित करेंगे। इसके अलावा, सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी एससीओ के कई अन्य राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।
छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स का उद्घाटन और सांस्कृतिक सहभागिता
किर्गिज़ गणराज्य की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। वे मध्य एशिया की समृद्ध और जीवंत सांस्कृतिक विरासत के उत्सव के रूप में जाने जाने वाले ‘छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स’ (World Nomad Games) के भव्य उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। यह आयोजन मध्य एशियाई खानाबदोश संस्कृति, पारंपरिक खेलों और कलात्मक परंपराओं का एक अनूठा वैश्विक संगम है।
भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच प्राचीन काल से ही सिल्क रूट के माध्यम से गहरे सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। प्रधानमंत्री की इस सांस्कृतिक आयोजन में उपस्थिति भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत वह मध्य एशियाई देशों की विशिष्ट पहचान और परंपराओं का सम्मान करते हुए जन-सांख्यिकीय व सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है। उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा के दौरान व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे विषयों पर बातचीत होगी।
मध्य एशिया और भारत के रणनीतिक संबंधों का महत्व
कूटनीतिक दृष्टि से पीएम मोदी उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा मध्य एशिया के साथ भारत के संबंधों को नयी ऊंचाई देगी। यह यात्रा भारत की विदेश नीति के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रासंगिक है। मध्य एशिया भारत के लिए भू-राजनीतिक, ऊर्जा और सुरक्षा कारणों से अत्यधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। भारत इस क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और चाबहार बंदरगाह के माध्यम से कनेक्टिविटी बढ़ाने के प्रयासों में जुटा है, जिससे मध्य एशियाई देशों के साथ सीधा व्यापार मार्ग स्थापित किया जा सके।
इसके अलावा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दों पर भारत और मध्य एशियाई देशों का रुख समान रहा है। ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में उज्बेकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य जैसे देश भारत के लिए महत्वपूर्ण भागीदार बन सकते हैं। समग्र रूप से पीएम मोदी उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा क्षेत्रीय संतुलन और आर्थिक प्रगति की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी। कुल मिलाकर उज्बेकिस्तान किर्गिज़ यात्रा द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है।
यात्रा की प्रमुख झलकियां
- उज्बेकिस्तान दौरा (29-30 अगस्त 2026): राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता और पीएम मोदी की चौथी ताशकंद यात्रा।
- किर्गिज़ गणराज्य दौरा (31 अगस्त-1 सितंबर 2026): बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में भागीदारी और संबोधन।
- स्मार्ट एजेंडा: ‘विकसित भारत@2047’ तथा ‘उज्बेकिस्तान-2030’ के साझा विकास लक्ष्यों पर सहमति।
- ऐतिहासिक स्थल: लाल बहादुर शास्त्री स्मारक तथा महात्मा गांधी केंद्र का भ्रमण।
- सांस्कृतिक भागीदारी: छठे ‘वर्ल्ड नोमैड गेम्स’ के उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी की उपस्थिति।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






