पीआईबी के अनुसार, गोबर्धन योजना के तहत सीबीजी की खरीद कीमत में संशोधन किया गया है, लेकिन सरकारी सब्सिडी और गैस पूलिंग के कारण आम उपभोक्ताओं पर असर नगण्य रहेगा।
मुख्य बातें
- गोबर्धन योजना के तहत सीबीजी उत्पादकों के लिए खरीद दर ₹1,478 से बढ़ाकर ₹2,110 प्रति एमएमबीटीयू तय की गई है।
- केंद्र सरकार सीबीजी उत्पादकों को ₹10 प्रति किलोग्राम (लगभग ₹215 प्रति एमएमबीटीयू) की वहनीयता सहायता प्रदान करेगी।
- सब्सिडी के बाद उपभोक्ताओं के लिए प्रभावी सीबीजी लागत घटकर ₹1,895 प्रति एमएमबीटीयू रह जाएगी, जो लगभग 28% की प्रभावी वृद्धि है।
- नए ढांचे के तहत सीबीजी लागत को पहले की तुलना में 2.5 से 3 गुना बड़े घरेलू गैस पूल में बांटा जाएगा।
- सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यापक पूलिंग के कारण खुदरा सीएनजी और पीएनजी उपभोक्ताओं के बजट पर असर नगण्य रहेगा।
संशोधित सीबीजी मूल्य निर्धारण को लेकर केंद्र सरकार और पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया है। हाल ही में प्रकाशित कुछ मीडिया खबरों में यह आशंका व्यक्त की गई थी कि गोबर्धन योजना के अंतर्गत संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) की संशोधित दरों के कारण देश के सीएनजी (परिवहन) और घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ काफी अधिक बढ़ सकता है। सरकार ने इस प्रकार के दावों और निष्कर्षों को पूरी तरह से असंगत मान्यताओं पर आधारित बताया है। सरकारी बयान में कहा गया है कि संशोधित व्यवस्था को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि सीबीजी उत्पादकों को उनकी लागत का उचित मूल्य मिले, जबकि खुदरा उपभोक्ताओं की जेब पर इसका असर न्यूनतम या नगण्य रहे।
सीबीजी मूल्य निर्धारण का नया गणित और उत्पादक कीमतें
पीआईबी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पुरानी व्यवस्था के तहत सीबीजी उत्पादकों को जो दरें दी जा रही थीं, वे सीधे तौर पर सीएनजी के खुदरा विक्रय मूल्य के 85 प्रतिशत से जुड़ी हुई थीं। इस पुरानी गणितीय प्रणाली के आधार पर सीबीजी उत्पादकों को लगभग 1,478 रुपये प्रति एमएमबीटीयू (MMBTU) की कीमत मिलती थी। हालांकि, देश में बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने और संयंत्रों के संचालन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए गोबर्धन योजना के तहत सीबीजी की खरीद कीमत 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू निर्धारित की गई है।
यदि केवल उत्पादकों को मिलने वाली खरीद कीमत के दृष्टिकोण से देखा जाए, तो 1,478 रुपये प्रति एमएमबीटीयू से 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू तक की यह बढ़ोतरी लगभग 43 प्रतिशत बैठती है। लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह केवल वह खरीद दर है जो सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों द्वारा सीबीजी उत्पादकों को चुकाई जाती है। इसे सीधे तौर पर खुदरा ग्राहकों या पीएनजी-सीएनजी उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली अंतिम दर नहीं माना जा सकता।
सीबीजी मूल्य निर्धारण और सरकारी वहनीयता सहायता
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू की इस पूरी बढ़ी हुई कीमत को गैस उपभोक्ताओं से नहीं वसूला जाएगा। आम जनता को मूल्य वृद्धि के प्रभाव से बचाने के लिए केंद्र सरकार सीबीजी उत्पादकों को 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से वहनीयता सहायता (Viability Support) प्रदान करेगी। 95 प्रतिशत मीथेन सामग्री वाली सीबीजी के मामले में यह वहनीयता सहायता लगभग 215 रुपये प्रति एमएमबीटीयू के बराबर बैठती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस वहनीयता सहायता का पूरा वित्तीय भार केंद्र सरकार खुद वहन करेगी और इसे गैस उपभोक्ताओं पर हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। इस सरकारी छूट या सहायता को घटाने के बाद, गैस उपभोक्ताओं के बड़े समूह पर लागू होने वाली प्रभावी सीबीजी लागत 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू में से 215 रुपये घटकर लगभग 1,895 रुपये प्रति एमएमबीटीयू ही रह जाती है। इस प्रकार, पुरानी 1,478 रुपये प्रति एमएमबीटीयू की दर से तुलना करने पर वास्तविक या प्रभावी लागत वृद्धि 43 प्रतिशत के बजाय केवल 28 प्रतिशत ही बैठती है।
घरेलू गैस पूलिंग और सीबीजी मूल्य निर्धारण का प्रभाव
सीबीजी की खुदरा कीमतों पर असर न पड़ने का एक और सबसे बड़ा तकनीकी कारण गैस आवंटन का व्यापक ढांचा है। नए नियमों के तहत सीबीजी को सीजीडी संस्थाओं को सीधे उसकी खरीद दर पर नहीं बेचा जाता है। इसके बजाय, उत्पादित सीबीजी को देश में उत्पादित अन्य सभी घरेलू प्राकृतिक गैस के साथ एक बड़े पूल में मिलाया या ‘पूल’ किया जाता है। इसके बाद सीबीजी की कुल लागत को इस संयुक्त घरेलू गैस पूल में आनुपातिक रूप से वितरित कर दिया जाता है।
पहले की व्यवस्था में, सीबीजी की लागत को केवल सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) क्षेत्रों के लिए आवंटित एडमिनिस्टर्ड प्राइस मैकेनिज्म (APM) गैस की सीमित मात्रा पर ही विभाजित किया जाता था। इससे छोटे आधार पर लागत का प्रभाव अधिक दिखता था। नए ढांचे के अंतर्गत, सीबीजी की कुल लागत को एक ऐसे घरेलू गैस आधार पर वितरित किया जा रहा है जो पुराने आधार से लगभग 2.5 से 3 गुना अधिक बड़ा है। इतने विशाल गैस पूल में लागत के विभाजित होने के कारण किसी भी व्यक्तिगत गैस उपभोक्ता के बिल पर मूल्य परिवर्तन का प्रभाव बिल्कुल नगण्य रहेगा।
गोबर्धन योजना और हरित ईंधन ढांचा
गोबर्धन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्वच्छता में सुधार लाना, मवेशियों के गोबर व कृषि अवशेषों से धन और ऊर्जा उत्पन्न करना है। इसके तहत स्थापित होने वाले संपीड़ित बायोगैस संयंत्र न केवल जीवाश्म ईंधनों पर देश की निर्भरता को घटाते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पराली जलाने जैसी समस्याओं का भी स्थायी समाधान प्रस्तुत करते हैं।
संशोधित सीबीजी मूल्य निर्धारण व्यवस्था को दो मुख्य प्राथमिकताओं में संतुलन स्थापित करने के लिए तैयार किया गया है। पहली प्राथमिकता सीबीजी उत्पादकों को एक स्थिर, अनुमानित और लाभदायक बाजार मूल्य प्रदान करना है ताकि वे अपने बायोगैस संयंत्रों का निर्बाध और स्थायी संचालन कर सकें। दूसरी प्राथमिकता देश के आम नागरिकों को ऊर्जा मुद्रास्फीति से सुरक्षित रखना है। सरकारी सब्सिडी और विस्तारित पूलिंग तंत्र के माध्यम से सरकार ने उत्पादक प्रोत्साहन और उपभोक्ता संरक्षण के बीच एक मजबूत संतुलन स्थापित किया है।
संशोधित सीबीजी व्यवस्था से जुड़ी मुख्य बातें
- उत्पादक खरीद दर: गोबर्धन योजना के तहत सीबीजी की खरीद दर 1,478 रुपये से बढ़ाकर 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू की गई है।
- सरकारी सब्सिडी: केंद्र सरकार द्वारा 10 रुपये प्रति किलोग्राम (लगभग 215 रुपये प्रति एमएमबीटीयू) की वहनीयता सहायता दी जाएगी।
- प्रभावी लागत: सब्सिडी समायोजन के बाद प्रभावी लागत 1,895 रुपये प्रति एमएमबीटीयू रहती है, जो कि केवल 28% की प्रभावी वृद्धि है।
- गैस पूल का विस्तार: नए नियमों में सीबीजी लागत को 2.5 से 3 गुना बड़े घरेलू गैस पूल में बांटा जाएगा।
- उपभोक्ताओं पर प्रभाव: सीएनजी और घरेलू पीएनजी के खुदरा उपभोक्ताओं के बजट पर मूल्य वृद्धि का प्रभाव पूरी तरह नगण्य रहेगा।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
संक्षेप में कहें तो, सीबीजी मूल्य निर्धारण में किए गए इन सुधारों से भारत के बायो-एनर्जी क्षेत्र को नया प्रोत्साहन मिलेगा। उत्पादकों को मिलने वाले बेहतर दाम से नए निवेश आकर्षित होंगे और बायोगैस बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा। वहीं दूसरी ओर, व्यापक पूलिंग व्यवस्था और सरकारी वित्तीय मदद के कारण घरेलू रसोई गैस और वाहन चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा। सरकार के इस कदम से देश के सतत विकास लक्ष्यों और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति मिलने की पूरी संभावना है।
यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com






