शनिवार, अक्टूबर 17, 2026

संत मलूकदास डाक टिकट: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया विमोचन

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संत मलूकदास डाक टिकट

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संत मलूकदास जी की स्मृति में डाक विभाग द्वारा तैयार स्मारक डाक टिकट जारी किया।

मुख्य बातें

  • केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 15 सितंबर 2026 को संत मलूकदास जी की स्मृति में स्मारक डाक टिकट जारी किया।
  • डाक विभाग द्वारा आयोजित संत समागम और श्री राम कथा के शुभारंभ पर यह टिकट जारी हुआ।
  • समारोह में स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज सहित कई संत-महात्मा मौजूद रहे।
  • सिंधिया ने संत मलूकदास के विचारों को विकसित भारत 2047 की मानवीय आधारशिला बताया।

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 15 सितंबर 2026 को भक्ति कालीन संत मलूकदास जी की स्मृति में विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया। डाक विभाग द्वारा आयोजित संत समागम और श्री राम कथा के शुभारंभ अवसर पर संत मलूकदास डाक टिकट का विमोचन किया गया।

संत मलूकदास डाक टिकट क्यों जारी किया गया है?

संत मलूकदास डाक टिकट भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा संत मलूकदास जी की भक्ति, ज्ञान, करुणा और लोककल्याणकारी विचारों को सम्मानित करने के लिए जारी किया गया है। यह स्मारक टिकट उनके मानवतावादी संदेशों को राष्ट्रीय चेतना और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक औपचारिक प्रयास है।

संत मलूकदास डाक टिकट विमोचन समारोह की मुख्य जानकारी

15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित संत समागम में केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संत मलूकदास जी की पावन स्मृति को नमन करते हुए यह स्मारक डाक टिकट देश को समर्पित किया। इस अवसर पर श्री राम कथा का भी शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में पूज्य स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज, श्री मलूक पीठ सेवा संस्थान न्यास के वरिष्ठ पदाधिकारियों और देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी विवरण के अनुसार, भारतीय डाक विभाग समय-समय पर देश की महान विभूतियों, संतों, विचारकों और ऐतिहासिक घटनाओं की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए ऐसे विशेष स्मारक डाक टिकट जारी करता रहता है। संत मलूकदास जी के सम्मान में जारी किया गया यह टिकट भी इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कौन थे संत मलूकदास जी और क्या है उनका योगदान?

संत मलूकदास जी भारत के भक्ति आंदोलन के अत्यंत प्रभावशाली और जनप्रिय संतों में से एक माने जाते हैं। उनका जीवन और उनकी वाणी समाज में प्रेम, करुणा, भाईचारे तथा ईश्वर भक्ति का अलख जगाने वाली रही है। भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त होने के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक कुरीतियों, आपसी भेदभाव और आडंबरों पर कड़ा प्रहार किया।

संत मलूकदास जी की रचनाएं और दोहे आज भी लोकजीवन में गहरे रचे-बसे हैं। उनका मानना था कि सच्चे रामभक्त का हृदय निष्पाप और वैर-भाव से मुक्त होता है। उन्होंने रामभक्ति को केवल मंदिरों और पूजा-पाठ तक सीमित न मानकर, उसे मानव सेवा और कर्तव्य परायणता से जोड़ा। उनकी रामभक्ति में पूरी मानवता का कल्याण समाहित था।

केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने अपने संबोधन में संत मलूकदास जी के प्रसिद्ध दोहे का विशेष रूप से उल्लेख किया:

"मलूका ऐसी राम की, कृपा भई है मोय। सकल जगत अपना भया, बैरी रहा न कोय॥"

इस दोहे का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि जब ईश्वर की कृपा होती है, तो मनुष्य के मन से अपना और पराया होने का संकीर्ण भाव समाप्त हो जाता है। पूरा संसार एक परिवार लगने लगता है और समाज में किसी के प्रति शत्रुता नहीं रह जाती।

कार्यक्रम में मंत्री सिंधिया के भाषण के प्रमुख बिंदु

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने संतों की परंपरा और आधुनिक भारत की प्रगति के बीच के गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया। उनके वक्तव्य के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • मानवतावादी संदेश: संत मलूकदास जी का जीवन त्याग, सत्य, न्याय, करुणा और लोककल्याण का प्रतीक रहा है।
  • विरासत और विकास का संतुलन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आर्थिक प्रगति के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजने का कार्य कर रहा है।
  • प्रमुख सांस्कृतिक स्थल: अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन के महाकाल लोक का पुनरुद्धार इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अपनी जड़ों से जुड़कर आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है।
  • विकसित भारत 2047: वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति केवल तकनीकी या आर्थिक आधार पर नहीं होगी, बल्कि उसका मानवीय आधार संतों के विचार ही बनेंगे।
  • डाक विभाग का योगदान: भारतीय डाक विभाग का यह स्मारक टिकट संत जी के विचारों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा।

यह भी जानें: डाक विभाग के स्मारक टिकटों की परंपरा

भारतीय डाक विभाग (Department of Posts) द्वारा जारी किए जाने वाले स्मारक डाक टिकट (Commemorative Postage Stamps) केवल डाक शुल्क भुगतान का साधन नहीं होते, बल्कि वे देश के इतिहास, संस्कृति, कला और महान हस्तियों के जीवंत दस्तावेज होते हैं।

ये टिकट सीमित संख्या में छापे जाते हैं और एक विशेष अवसर पर ही जारी होते हैं। इन्हें देश-दुनिया के डाक टिकट संग्राहक (Philatelists) बहुत सहेजकर रखते हैं। संत मलूकदास जी पर जारी यह स्मारक डाक टिकट भारतीय डाक की उसी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाता है, जो भारत की सांस्कृतिक चेतना को विश्व मंच पर प्रदर्शित करती है।

विकसित भारत 2047 और सांस्कृतिक चेतना

अपने भाषण में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए विकास और संस्कृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। देश जहां एक ओर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी हजारों वर्ष पुरानी आध्यात्मिक धरोहरों का संरक्षण भी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि जब तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है और शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण होता है, तभी वास्तविक विकास संभव हो पाता है। संत मलूकदास जी की वाणी इसी मानवीय संवेदना और सामाजिक समरसता की आधारशिला प्रस्तुत करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: संत मलूकदास डाक टिकट का विमोचन किसने और कब किया?
उत्तर: संत मलूकदास डाक टिकट का विमोचन केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित संत समागम के दौरान किया।

प्रश्न 2: संत मलूकदास डाक टिकट किस विभाग द्वारा जारी किया गया है?
उत्तर: यह स्मारक डाक टिकट भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डाक विभाग (Department of Posts) द्वारा जारी किया गया है।

प्रश्न 3: इस स्मारक डाक टिकट को जारी करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य संत मलूकदास जी के ज्ञान, भक्ति, करुणा और लोककल्याणकारी विचारों को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाना और आने वाली पीढ़ियों तक उनका संदेश पहुंचाना है।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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