मंगलवार, अक्टूबर 13, 2026

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण पर जोर

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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण

नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया है, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और केंद्रीय मंत्रियों ने हिस्सा लिया।

मुख्य बातें

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के सम्मेलन को संबोधित किया।
  • केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि भारत ने गैर-जीवाश्म ऊर्जा का 50% लक्ष्य पांच साल पहले हासिल किया।
  • सम्मेलन में ‘हरित न्यायम’ शीर्षक से एनजीटी का स्मारिका प्रकाशन जारी किया गया।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 सितंबर 2026 को इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया था।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ के समापन सत्र को संबोधित किया। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अनुसार, इस कार्यक्रम में देश के कई प्रतिष्ठित न्यायविदों, मंत्रियों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण सम्मेलन में राष्ट्रपति का संबोधन

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गंभीर चुनौतियों पर चर्चा करना था। राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने मुख्य वक्तव्य में पर्यावरण प्रशासन को मजबूत करने में न्यायाधिकरण की सराहना की। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित और समुदाय-आधारित अनुकूलन दृष्टिकोणों से जलवायु सुदृढीकरण पर जोर दिया।

इस समापन सत्र में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों और विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल, सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और भारत के सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता उपस्थित थे। सभी वक्ताओं ने पर्यावरणीय स्थिरता और तीव्र विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।

ऊर्जा और सतत विकास के आंकड़े

इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने देश के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए।

  • भारत की कुल स्थापित ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लगभग 55 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त होता है।
  • देश ने अपने 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य को निर्धारित समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है।
  • सतत शहरी विकास, जल सुरक्षा, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित पहलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • सम्मेलन में ‘हरित न्यायम’ शीर्षक से एनजीटी का स्मारिका प्रकाशन जारी किया गया, जिसकी पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट की गई।

न्यायिक और कानूनी दृष्टिकोण

सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि पर्यावरण प्रशासन को विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना चाहिए। उन्होंने प्रभावी संस्थानों, पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय तक पहुंच पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का नुकसान और जल संकट जैसी चुनौतियों के लिए विभिन्न न्यायक्षेत्रों के बीच सहयोग आवश्यक है।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि दो दिन की चर्चाओं ने पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में सक्षम कानूनों और संस्थानों के निर्माण की आवश्यकता को उजागर किया है। भारत के सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण मानव प्रगति में बाधा नहीं, बल्कि सतत प्रगति की एक शर्त है।

अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी और तकनीकी सत्र

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 19 सितंबर 2026 को उद्घाटन किए गए इस आयोजन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा 17 देशों के न्यायविद, वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञ भी शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान दो मुख्य तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें ग्रहीय पर्यावरणीय चुनौतियाँ और वन संरक्षण पर संवाद शामिल था।

यह भी जानें और पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) भारत का एक विशेष निकाय है जिसकी स्थापना देश में पर्यावरण से जुड़े मामलों के तेज और प्रभावी निपटारे के लिए की गई थी। इस तरह के सम्मेलन नीति निर्माताओं और न्यायविदों को सीमा पार पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का अवसर देते हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से जलवायु न्याय और मजबूत संस्थागत सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न? राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के इस सम्मेलन का मुख्य विषय क्या था?
उत्तर। इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ था।

प्रश्न? इस सम्मेलन का उद्घाटन किसने किया था?
उत्तर। इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 19 सितंबर 2026 को किया गया था।

यह रिपोर्ट PIB (पत्र सूचना कार्यालय) द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। स्रोत: PIB (पत्र सूचना कार्यालय)। त्रुटि की सूचना: corrections@aajpatrika.com

सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी
सौरभ तिवारी आज पत्रिका में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक मामलों के संपादक हैं। वे संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही, सरकारी नीतियों, चुनाव, और भारत से जुड़ी बड़ी राष्ट्रीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्य-आधारित, संतुलित और स्रोत-सहित रिपोर्टिंग पर रहता है — हर लेख में वे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), संबंधित मंत्रालयों की विज्ञप्तियों और आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हैं। राय और विश्लेषण को वे समाचार से स्पष्ट रूप से अलग रखते हैं। सुझाव या तथ्य-सुधार के लिए: corrections@aajpatrika.com।

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